खरीफ सीजन की दस्तक के साथ ही किसान खेतों में धान की नर्सरी तैयार करने में जुट गए हैं। जानकारों का कहना है कि अच्छी पैदावार की नींव शुरुआत में ही पड़ जाती है, इसलिए मजबूत और स्वस्थ नर्सरी का होना बेहद जरूरी है। यदि बुवाई के समय से ही सही प्रबंधन अपनाया जाए तो बीजों का अंकुरण बेहतर होता है, पौधे ताकतवर विकसित होते हैं और अंततः उत्पादन में भी इजाफा होता है।
नर्सरी की बुवाई में खाद का सही प्रयोग
कृषि विशेषज्ञ अवनीश पटेल ने बताया कि नर्सरी की बुवाई के समय खेत में 2 से 3 किलो डीएपी, 2 से 3 किलो एनओपी के साथ-साथ पर्याप्त मात्रा में सड़ा हुआ गोबर या वर्मी कंपोस्ट खाद डालनी चाहिए। उनके अनुसार ऐसा करने से पौधों को शुरुआती अवस्था में ही जरूरी पोषक तत्व मिल जाते हैं, जिससे उनका विकास बेहतर ढंग से होता है।
नमी का संतुलन क्यों है अहम
विशेषज्ञ का कहना है कि बीजों के अंकुरण के लिए खेत में पर्याप्त नमी का होना आवश्यक है, लेकिन इस मामले में संतुलन बनाए रखना जरूरी है। उन्होंने आगाह किया कि अधिक पानी भर जाने पर बीज सड़ सकते हैं या बहकर एक जगह जमा हो सकते हैं, जिसका सीधा असर अंकुरण पर पड़ता है।
इसी वजह से अवनीश पटेल किसानों को जरूरत के मुताबिक हल्की सिंचाई करने और जलभराव से बचने की सलाह देते हैं।
खरपतवार हटाना बेहद जरूरी
विशेषज्ञ के अनुसार नर्सरी में खरपतवार नियंत्रण भी उतना ही महत्वपूर्ण है। यदि घास-फूस या अन्य खरपतवार उग आते हैं तो वे पौधों के साथ पोषक तत्वों और पानी के लिए होड़ करने लगते हैं, जिससे धान के पौधे कमजोर पड़ सकते हैं।
इसलिए उन्होंने जोर देकर कहा कि समय-समय पर नर्सरी की निगरानी करते रहना चाहिए और जैसे ही खरपतवार दिखें, उन्हें तुरंत हटा देना चाहिए। इस सावधानी से पौधे स्वस्थ रहते हैं और बेहतर पैदावार की राह आसान होती है।
https://hindi.news18.com/news/agriculture/special-trick-when-preparing-paddy-nurseries-to-ensure-excellent-seed-germination-local18-10560518.html