हरियाणा सरकार ने राज्य की सुरक्षा व्यवस्था को और पुख्ता करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के नेतृत्व वाली सरकार ने राज्य में एंटी टेररिज्म स्क्वॉड यानी ATS के गठन को हरी झंडी दे दी है। इसे प्रदेश की आंतरिक सुरक्षा के लिहाज से बेहद अहम फैसला माना जा रहा है।
बीते कुछ वर्षों में देश के कई राज्यों में आतंकी मॉड्यूल, कट्टरपंथी नेटवर्क, साइबर माध्यम से चलने वाली संदिग्ध गतिविधियां और सीमा पार से संचालित संगठित नेटवर्क सुरक्षा एजेंसियों के सामने बड़ी चुनौती बनकर उभरे हैं। हरियाणा की सीमाएं दिल्ली, पंजाब, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और चंडीगढ़ से जुड़ी हुई हैं, ऐसे में राज्य में एक समर्पित ATS इकाई की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही थी।
हरियाणा पुलिस के महानिदेशक अजय सिंघल के अनुसार मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी का स्पष्ट मानना है कि राज्य की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और आतंकवाद के मामले में किसी भी तरह की नरमी स्वीकार नहीं की जाएगी। इसी सोच के तहत ATS के गठन को मंजूरी दी गई है।
क्यों खास है ATS का गठन
अब तक आतंकवाद से जुड़े मामलों में हरियाणा पुलिस को अलग-अलग इकाइयों और केंद्रीय एजेंसियों के साथ तालमेल बिठाकर काम करना पड़ता था। ATS के बनने के बाद आतंकवाद, कट्टरपंथ, आतंकी फंडिंग, संदिग्ध नेटवर्क और साइबर माध्यम से चल रही गतिविधियों की निगरानी के लिए एक विशेष और प्रशिक्षित इकाई राज्य के पास होगी।
यह दस्ता आतंकी घटनाओं पर तुरंत कार्रवाई करने, खुफिया जानकारी जुटाने और उसका विश्लेषण करने, विभिन्न एजेंसियों के साथ समन्वय स्थापित करने तथा आतंकवाद से जुड़े मामलों की जांच और अभियोजन का काम संभालेगा।
NSG की तर्ज पर तैयार होगा ढांचा
हरियाणा ATS की कमान पुलिस महानिरीक्षक (IG) स्तर के अधिकारी के हाथ में होगी और यह CID के नियंत्रण में काम करेगी। इस इकाई का ढांचा कई स्तरों वाला होगा, जिसमें NSG की तर्ज पर एक विशेष कमांडो बल भी शामिल किया जाएगा। यह कमांडो यूनिट संवेदनशील अभियानों और तत्काल कार्रवाई के लिए प्रशिक्षित होगी।
इसके साथ ही एक समर्पित ATS पुलिस स्टेशन भी स्थापित किया जाएगा, जहां आतंकवाद से जुड़े मामलों की जांच की जाएगी। कानूनी, वित्तीय और फॉरेंसिक विशेषज्ञ भी इस पूरे तंत्र का हिस्सा रहेंगे।
साइबर और तकनीकी निगरानी पर जोर
मौजूदा दौर में आतंकी संगठन इंटरनेट, सोशल मीडिया और डार्क वेब का इस्तेमाल कर रहे हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए ATS में एक साइबर एवं तकनीकी इंटेलिजेंस यूनिट भी बनाई जाएगी। यह यूनिट ओपन सोर्स इंटेलिजेंस, डार्क वेब और संदिग्ध डिजिटल गतिविधियों पर लगातार नजर रखेगी।
डि-रेडिकलाइजेशन पर भी रहेगा फोकस
हरियाणा ATS केवल कार्रवाई तक सीमित नहीं रहेगी। इसमें एक डि-रेडिकलाइजेशन यूनिट भी बनाई जाएगी, जो युवाओं को कट्टरपंथी विचारधाराओं से दूर रखने और जागरूकता कार्यक्रम चलाने का काम करेगी।
सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि ATS के गठन से हरियाणा की कानून-व्यवस्था और सुरक्षा तंत्र को नई मजबूती मिलेगी। इससे न केवल आतंकवाद और कट्टरपंथी नेटवर्क पर असरदार निगरानी रखी जा सकेगी, बल्कि राज्य में निवेश, औद्योगिक विकास और आम नागरिकों के सुरक्षा को लेकर भरोसे को भी बल मिलेगा।
https://hindi.news18.com/news/haryana/chandigarh-city-haryana-police-ats-formed-to-fight-terrorism-and-radical-networks-10560567.html