PoK के बाद अब बलूचिस्तान में भी भड़का आक्रोश, सरकारी कर्मचारी 15 जून को करेंगे बड़ा धरना

पाकिस्तान के बलूचिस्तान में सरकारी कर्मचारी संगठनों और ट्रेड यूनियनों ने महंगाई और वेतन असमानता के खिलाफ दो दिवसीय विरोध प्रदर्शन का ऐलान किया है, जिसका बड़ा धरना 15 जून को होगा।

पाकिस्तान इन दिनों भारी अंदरूनी असंतोष से जूझ रहा है। एक ओर पीओके में विद्रोह की चिंगारी सुलग रही है, तो दूसरी ओर अब बलूचिस्तान के सरकारी कर्मचारी भी सड़कों पर उतरने की चेतावनी दे रहे हैं। विरोध प्रदर्शन की शुरुआत हो चुकी है और 15 जून को एक बड़े धरने को लेकर आगाह किया गया है।

बलूचिस्तान में दो दिवसीय आंदोलन का ऐलान

बलूचिस्तान प्रांत में विभिन्न सरकारी कर्मचारी संगठनों और ट्रेड यूनियनों के गठबंधन ने अपनी मांगों को लेकर दो दिवसीय विरोध प्रदर्शन और धरने की घोषणा की है। स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार यह आंदोलन कर्मचारियों के अधिकारों और लगातार बढ़ती महंगाई के खिलाफ खड़ा किया जा रहा है।

गठबंधन के संयोजक अब्दुल कुद्दूस काकर ने बताया कि विरोध प्रदर्शन आज से आरंभ होगा, जबकि 15 जून को बड़ा धरना आयोजित किया जाएगा। उन्होंने सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि वह कर्मचारियों और आम जनता की मुश्किलों को हल करने में नाकाम रही है।

कर्मचारियों की प्रमुख मांगें

कर्मचारी संगठनों की प्रमुख मांग है कि बढ़ती महंगाई को ध्यान में रखते हुए न्यूनतम वेतन में बढ़ोतरी की जाए। इसके साथ ही संघीय और प्रांतीय कर्मचारियों के वेतन में मौजूद अंतर को समाप्त करने की भी मांग रखी गई है। गठबंधन का कहना है कि एक समान ग्रेड में काम करने वाले कर्मचारियों को समान वेतन और सुविधाएं मिलनी चाहिए।

इससे पहले 2 जून को पंजाब के ऑल गवर्नमेंट एम्प्लॉइज ग्रैंड अलायंस (AGEGA) ने भी कहा था कि लगातार बढ़ती महंगाई के कारण सरकारी कर्मचारियों की क्रय शक्ति में काफी गिरावट आई है। सीमित आमदनी में परिवार का खर्च चलाना दिन-ब-दिन कठिन होता जा रहा है।

सरकारी कर्मचारियों की नाराजगी

कर्मचारी नेताओं का आरोप है कि संघीय बजट 2025-26 में घोषित 30 प्रतिशत डिस्पैरिटी अलाउंस अब तक पंजाब और अन्य प्रांतों के कर्मचारियों तक नहीं पहुंचा है। साथ ही पंजाब सरकार द्वारा लीव एनकैशमेंट नियमों में किए गए बदलावों से कर्मचारियों को नुकसान हुआ है।

गठबंधन ने यह भी आरोप लगाया कि पेंशन, ग्रेच्युटी और अन्य सेवानिवृत्ति लाभों में कटौती की जा रही है। संगठनों ने प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ से आगामी संघीय बजट 2026-27 में कर्मचारियों के लिए राहत उपायों की घोषणा करने की मांग की है।

धरने की चेतावनी और विस्तृत मांगें

कर्मचारी संगठनों ने सभी प्रांतों में 30 प्रतिशत डिस्पैरिटी अलाउंस लागू करने, अतिरिक्त 15 प्रतिशत वेतन वृद्धि, पेंशन सुधारों को वापस लेने और सभी एडहॉक भत्तों को मूल वेतन में शामिल करने की मांग रखी है।

इसके अलावा उन्होंने मौजूदा महंगाई को देखते हुए वेतन और पेंशन में कम से कम 50 प्रतिशत बढ़ोतरी तथा मकान किराया, चिकित्सा और यात्रा भत्तों में पांच गुना वृद्धि की मांग भी उठाई है। यहां के लोग लंबे समय से पाकिस्तान सरकार के खिलाफ आवाज बुलंद कर रहे हैं, लेकिन उन्हें उनका हक नहीं मिल पाया। अब वे एक बार फिर धरने पर बैठने का ऐलान कर चुके हैं।

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