Raja Raghuvanshi Case: सोनम की जमानत रद्द करने की याचिका पर बहस खत्म, हाई कोर्ट ने सुरक्षित रखा फैसला

मेघालय हाई कोर्ट ने सोनम रघुवंशी की नियमित जमानत रद्द करने की राज्य सरकार की याचिका पर सुनवाई पूरी कर ली है। न्यायमूर्ति डब्ल्यू डिएंगडोह की एकल पीठ ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया।

इंदौर के चर्चित राजा रघुवंशी हत्याकांड की मुख्य आरोपी और मृतक की पत्नी सोनम रघुवंशी की नियमित जमानत रद्द करने की मांग वाली राज्य सरकार की याचिका पर मेघालय हाई कोर्ट में सुनवाई पूरी हो गई है। उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति डब्ल्यू डिएंगडोह की एकल पीठ ने इस अत्यंत संवेदनशील प्रकरण से जुड़े दोनों पक्षों की दलीलें विस्तार से सुनने के बाद अपना अंतिम फैसला सुरक्षित रख लिया है।

अदालत अब आने वाले दिनों में अपना लिखित आदेश जारी करेगी। इसके बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि आरोपी पत्नी को जेल से मिली राहत बनी रहेगी या उसे दोबारा सलाखों के पीछे जाना पड़ेगा।

क्या है पूरा मामला

यह प्रकरण मध्य प्रदेश के इंदौर निवासी राजा रघुवंशी की मेघालय में हनीमून के दौरान हुई संदिग्ध हत्या से जुड़ा है। शादी के बाद राजा रघुवंशी अपनी पत्नी सोनम रघुवंशी के साथ घूमने मेघालय गए थे, जहां उनकी बेरहमी से हत्या कर दी गई थी।

पुलिस जांच के बाद इस हत्याकांड में मृतक की पत्नी सोनम रघुवंशी को ही मुख्य साजिशकर्ता और आरोपी मानते हुए गिरफ्तार किया गया था। सोनम को पहले निचली अदालत से नियमित जमानत मिल गई थी, जिसके खिलाफ अब मेघालय राज्य सरकार ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।

राज्य सरकार की दलीलें

राज्य सरकार के गृह विभाग और अभियोजन पक्ष ने हाई कोर्ट के समक्ष मुख्य रूप से यह तर्क रखा कि इतने जघन्य और हाई प्रोफाइल हत्याकांड की मुख्य आरोपी का जेल से बाहर रहना न्याय की प्रक्रिया को गंभीर रूप से बाधित कर सकता है।

सरकार की ओर से कहा गया कि सोनम रघुवंशी को बाहर रहने की अनुमति देने पर मामले के गवाहों को प्रभावित किए जाने और सबूतों से छेड़छाड़ की प्रबल आशंका बनी हुई है। सरकार ने अदालत से आग्रह किया कि मामले की गंभीरता और इंदौर से जुड़े पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने के लिए सोनम की जमानत तत्काल प्रभाव से निरस्त की जानी बेहद जरूरी है।

बचाव पक्ष का जवाब

इसके विपरीत बुधवार को हुई विशेष सुनवाई के दौरान सोनम रघुवंशी की ओर से पैरवी कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता एस चंदा ने सरकार की सभी दलीलों को पूरी तरह निराधार बताते हुए याचिका खारिज करने का अनुरोध किया।

बचाव पक्ष के वकील ने अदालत में तर्क दिया कि उनकी मुवक्किल को कानून के दायरे में रहकर ही जमानत का लाभ मिला है और उन्होंने जमानत की किसी भी शर्त का उल्लंघन नहीं किया है। अधिवक्ता एस चंदा ने न्यायालय को यह भी बताया कि वे अपनी मुवक्किल के पक्ष में सभी मजबूत लिखित तर्क दिन की कार्यवाही समाप्त होने से पहले ही अदालत के समक्ष प्रस्तुत कर देंगे, ताकि वे रिकॉर्ड पर आ सकें।

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