टविशा केस: गिरिबाला सिंह ने जेल में अलग सेल की मांग रखी, CBI पर लगाए गंभीर आरोप, जानें समर्थ ने अदालत में क्या कहा

टविशा शर्मा मौत मामले में पूर्व जिला जज गिरिबाला सिंह ने अपनी और समर्थ सिंह की सुरक्षा के लिए जेल में अलग सेल देने की मांग की है, वहीं समर्थ के वकील ने सीबीआई पर चोट की मेडिकल देखभाल को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया।

भोपाल के बहुचर्चित टविशा शर्मा मौत मामले में लगातार नए घटनाक्रम सामने आ रहे हैं। ताजा सुनवाई में पूर्व जिला जज गिरिबाला सिंह और समर्थ सिंह ने अदालत के सामने अपनी सुरक्षा को लेकर आशंका जाहिर की।

गिरिबाला सिंह ने न्यायालय को बताया कि अपने न्यायिक कार्यकाल में उन्होंने कई आरोपियों को सजा सुनाई है, इस कारण जेल में उनकी जान को खतरा हो सकता है। उन्होंने अनुरोध किया कि उन्हें और समर्थ सिंह को एक अलग सेल में रखा जाए।

समर्थ के पैर में चोट, वकील ने CBI पर उठाए सवाल

सुनवाई के दौरान समर्थ सिंह के अधिवक्ता एनॉश जॉर्ज कार्लो ने कहा कि मेडिकल जांच के समय यह सामने आया कि समर्थ के पैर में चोट है। उनका आरोप रहा कि सीबीआई इस चोट को गंभीरता से नहीं ले रही और राहत देने वाला स्प्रे तक मुहैया नहीं कराया गया।

समर्थ ने अदालत को बताया कि पिछली पेशी के दौरान एक मीडियाकर्मी का पैर उनके पैर पर आ गया था, जिससे उन्हें यह चोट लगी।

गिरिबाला सिंह ने एजेंसी पर लगाए आरोप

गिरिबाला सिंह ने कहा कि वह एक बुजुर्ग महिला हैं और सीन रीक्रिएशन के दौरान सीबीआई उन्हें बार-बार छत पर ले जाकर सवाल कर रही थी। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि एजेंसी ने जानबूझकर वाहन उनके घर से कुछ दूरी पर खड़ा किया, जिससे उन्हें असुविधा हुई।

जबलपुर में मारपीट का आरोप

सुनवाई में समर्थ सिंह ने यह भी कहा कि जबलपुर में एक वकील ने उनके साथ मारपीट की और अभद्र भाषा का प्रयोग किया। इस पर अदालत ने संबंधित वकील को तलब करने के निर्देश दिए। संबंधित वकील ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि उन्होंने केवल आरोपी को पकड़ा था और किसी प्रकार की मारपीट नहीं हुई। उनका कहना था कि इसकी पुष्टि सीसीटीवी फुटेज से की जा सकती है।

करीब चार साल तक जज रहीं गिरिबाला

गिरिबाला सिंह भोपाल में लगभग चार साल तक जज के रूप में सेवाएं दे चुकी हैं। प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश तथा अपर सत्र न्यायाधीश के पद पर रहते हुए उन्होंने कई अहम मामलों में फैसले सुनाए। अपने कार्यकाल में उन्होंने हत्या, पॉक्सो और अन्य गंभीर अपराधों से जुड़े मामलों में कई आरोपियों को दोषी ठहराकर सजा दी थी। इन्हीं कारणों का हवाला देते हुए उन्होंने जेल में विशेष सुरक्षा और अलग सेल की मांग रखी है।

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