इटावा सफारी पार्क के पीछे बनी बीहड़ वाले सैयद बाबा की मजार को गिरा दिया गया है। रात के अंधेरे में कड़ी सुरक्षा के बीच सबसे पहले मजार की बड़ी गुम्बद, मजार शरीफ और दरगाह के बाहर बने बड़े पक्के चबूतरे के साथ-साथ पूजा से जुड़ी सामग्री को हटाया गया। इसके बाद जिला प्रशासन और वन विभाग ने मिलकर गुपचुप तरीके से ध्वस्तीकरण की पूरी कार्रवाई को अंजाम दिया।
दोनों विभागों ने इस कार्रवाई को मीडिया की नजरों से दूर रखा और बेहद शांतिपूर्ण ढंग से इसे पूरा किया गया। बुलडोजर चलाकर वहां बने कमरे और मजार के अवशेषों का मलबा हटाया गया तथा उसी जंगल में मलबे को दफना दिया गया। अब उस जगह पर वृक्षारोपण कर दिया गया है। वन विभाग की ओर से वहां बड़े-बड़े पेड़ लगाए गए हैं और इसके साथ ही सैकड़ों की संख्या में पौधे भी रोपित करवा दिए गए हैं।
अधिकारी कुछ भी बोलने को तैयार नहीं
इस पूरी कार्रवाई पर वन विभाग और जिला प्रशासन का कोई भी अधिकारी कुछ कहने को तैयार नहीं है। वन विभाग की ओर से मजार के केयरटेकर को पहले नोटिस दिया गया था और उनसे संबंधित दस्तावेज पेश करने को कहा गया था। लगातार पांच महीने तक कई तारीखों पर सुनवाई होती रही, लेकिन केयरटेकर फजले इलाही और उनके सहयोगी वन विभाग की जमीन पर बनी मजार से जुड़ा कोई भी दस्तावेज नहीं दे सके। इसके बाद वन विभाग की कोर्ट के आदेश पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की गई।
रात भर चलता रहा बुलडोजर
जानकारी के अनुसार, बुधवार शाम करीब 6 बजे वन विभाग की टीम बुलडोजर लेकर मौके पर पहुंची। मजार तक पहुंचने वाले रास्ते पर पुलिस तैनात कर दी गई और किसी को भी वहां तक जाने की इजाजत नहीं दी गई। करीब सात घंटे तक बुलडोजर चलाकर मजार को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया गया। यह मजार लगभग 3000 स्क्वायर फीट तक फैली हुई थी। वन विभाग का दावा है कि यह मजार सरकारी जमीन पर बनी थी, जबकि केयरटेकर का कहना है कि यह मजार वर्षों पुरानी है। यह मामला कोर्ट तक भी पहुंचा, लेकिन वहां से केयरटेकर को कोई राहत नहीं मिल सकी।
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