राजस्थान में सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की हालत को लेकर एक बार फिर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। बीकानेर और कोटा से सामने आए दो अलग-अलग मामलों ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठा दिए हैं। एक ओर जहां प्रसूताओं की जान पर बनी, वहीं दूसरी ओर कई महिलाओं को किडनी से जुड़ी जटिल समस्याओं का सामना करना पड़ा। इन घटनाओं के बाद प्रदेश की सियासत भी गरमा गई है।
बीकानेर में किडनी संबंधी मामलों ने मचाई हलचल
बीकानेर के पीबीएम अस्पताल में करीब 5 प्रसूताओं को प्रसव के बाद किडनी से जुड़ी गंभीर परेशानी का सामना करना पड़ा। इन मामलों के सामने आते ही अस्पताल प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही पर अंगुलियां उठने लगीं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए कांग्रेस ने जोरदार विरोध जताया और अस्पताल परिसर के बाहर उग्र प्रदर्शन किया।
कोटा में प्रसूताओं की मौत से गहराया संकट
दूसरी ओर कोटा में 5 प्रसूताओं की मौत और कई अन्य महिलाओं की नाजुक हालत ने स्वास्थ्य विभाग को पहले ही कठघरे में खड़ा कर दिया था। इस घटना ने न सिर्फ परिजनों में आक्रोश पैदा किया, बल्कि सरकारी अस्पतालों में मरीजों की देखभाल और सुविधाओं की कमी को लेकर व्यापक चिंता भी जताई गई।
जांच समितियों की रिपोर्ट में सामने आईं खामियां
दोनों ही मामलों की गहन पड़ताल के लिए जांच समितियां गठित की गई हैं। इन समितियों की रिपोर्ट में अस्पतालों की कई खामियां उजागर हुई हैं, जिससे यह साफ हो गया कि व्यवस्था में गंभीर चूक हुई। रिपोर्ट सामने आने के बाद मामले ने और तूल पकड़ लिया।
सियासी टकराव हुआ तेज
इन घटनाओं को आधार बनाकर विपक्ष ने सत्तापक्ष पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस ने सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था की नाकामी को लेकर सरकार को घेरते हुए जवाबदेही तय करने की मांग की। इस मुद्दे पर राजस्थान में राजनीतिक टकराव लगातार बढ़ता जा रहा है।
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