गरीब बच्चों की फीस का बोझ उठा रहे शीतल, हर माह दस विद्यार्थियों की पढ़ाई का जिम्मा

जमशेदपुर के बिष्टुपुर में मोबाइल शोरूम संचालक शीतल आगीवाल ने 'डीजी टॉक शिक्षा योजना' शुरू की है, जिसके तहत हर महीने करीब दस जरूरतमंद बच्चों की एक महीने की स्कूल फीस भरी जाती है।

आज के समय में लगातार बढ़ती महंगाई ने आम परिवारों की रोजमर्रा की जिंदगी को बुरी तरह प्रभावित किया है। घर का खर्च, बिजली-पानी का बिल, राशन और दूसरी जरूरतें पूरी करने के बाद कई परिवारों के सामने बच्चों की स्कूल फीस जमा करना एक बड़ी मुश्किल बन जाता है। ऐसी स्थिति में अगर किसी बच्चे की एक महीने की फीस कोई दूसरा व्यक्ति भर दे, तो यह परिवार के लिए बड़ी राहत बन जाती है। इसी भावना के साथ जमशेदपुर के बिष्टुपुर स्थित मोबाइल शोरूम डीजी टॉक के संचालक शीतल आगीवाल ने एक सराहनीय कदम उठाया है।

आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए बनी योजना

शीतल ने अपने प्रतिष्ठान में 'डीजी टॉक शिक्षा योजना' शुरू की है। इसका मकसद आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों की पढ़ाई में मदद करना है। उन्होंने बताया कि अक्सर ऐसे परिवार सामने आते हैं जिनके बच्चे पढ़ाई में होनहार होते हैं, मगर पैसों की तंगी के चलते समय पर फीस नहीं भर पाते। ऐसे बच्चों और उनके परिवारों तक सहायता पहुंचाने के लिए ही यह खास योजना तैयार की गई है।

हर महीने होती है जरूरतमंद बच्चों की पहचान

इस योजना के तहत डीजी टॉक के शोरूम में एक विशेष बॉक्स रखा गया है। अगर किसी व्यक्ति की नजर अपने आसपास किसी ऐसे बच्चे पर पड़ती है, जिसकी आर्थिक हालत कमजोर है और जिसे पढ़ाई जारी रखने में दिक्कत आ रही है, तो वह उस बच्चे का नाम, अभिभावक का मोबाइल नंबर और जरूरी जानकारी एक कागज पर लिखकर इस बॉक्स में डाल सकता है। हर महीने इस बॉक्स को खोला जाता है और उसमें मिली जानकारियों के आधार पर जरूरतमंद बच्चों को चुना जाता है।

हर माह चुने जाते हैं दस बच्चे

शीतल ने बताया कि हर महीने इस योजना के तहत करीब 10 बच्चों का चयन किया जाता है। चुने गए बच्चों की एक महीने की स्कूल फीस डीजी टॉक की ओर से जमा कराई जाती है। इससे एक तरफ बच्चों की पढ़ाई रुकने से बच जाती है, वहीं दूसरी ओर उनके माता-पिता को भी आर्थिक राहत मिलती है। कई परिवारों के लिए यह मदद किसी वरदान से कम नहीं होती, क्योंकि कई बार एक महीने की फीस का इंतजाम करना भी उनके लिए कठिन हो जाता है।

ताकि पूरे हों हर बच्चे के सपने

शीतल ने बताया कि बचपन में उन्होंने भी कई कठिनाइयों के बीच पढ़ाई पूरी की है, इसलिए वे शिक्षा के महत्व को बखूबी समझते हैं। उनका मानना है कि आर्थिक तंगी के कारण किसी भी बच्चे की पढ़ाई नहीं रुकनी चाहिए। उनके मुताबिक, समाज के सक्षम लोगों को आगे बढ़कर जरूरतमंद बच्चों की मदद करनी चाहिए, ताकि हर बच्चा अपने सपनों को पूरा कर सके।

दूसरों के लिए प्रेरणा बनती पहल

शीतल का कहना है कि सिर्फ अपने लिए कमाना ही काफी नहीं है, बल्कि समाज के हित में योगदान देना भी उतना ही जरूरी है। उनका विश्वास है कि जब बच्चे शिक्षित होंगे, तभी समाज और देश का समग्र विकास संभव हो पाएगा। उनकी यह पहल न केवल जरूरतमंद परिवारों को राहत दे रही है, बल्कि दूसरे लोगों को भी शिक्षा के क्षेत्र में आगे आकर मदद करने के लिए प्रेरित कर रही है।

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