कमजोर चल रहे थे IT शेयर, फिर इस रिपोर्ट ने बढ़ाई मुसीबत! जानिए कब रुकेगी गिरावट

शेयर बाजार में आज TCS, इंफोसिस, विप्रो और HCL Tech समेत बड़े IT शेयर तेजी से लुढ़के और निफ्टी IT इंडेक्स 2% से ज्यादा गिर गया। AI को लेकर बढ़ती चिंताओं और HSBC की एक रिपोर्ट ने इस बिकवाली को और हवा दी है।

शेयर बाजार में आज एक बार फिर IT कंपनियों के निवेशकों को बड़ा झटका लगा। बाजार खुलते ही TCS, इंफोसिस, HCL टेक और विप्रो जैसी दिग्गज सूचना प्रौद्योगिकी कंपनियों के शेयरों में जोरदार बिकवाली शुरू हो गई, जिसके चलते निफ्टी IT इंडेक्स 2% से ज्यादा टूट गया। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को लेकर गहराती आशंकाओं और वैश्विक दबाव के बीच निवेशक घबराए हुए हैं और लगातार पैसा निकाल रहे हैं। यही वजह रही कि यह सेक्टर गुरुवार को बाजार का सबसे कमजोर प्रदर्शन करने वाला क्षेत्र साबित हुआ।

किन शेयरों में कितनी गिरावट

गुरुवार को कारोबार शुरू होते ही IT शेयरों पर बिकवाली का भारी बोझ दिखा। बड़ी कंपनियों में HCL Technologies सबसे आगे रहा और इसके शेयर 3.5% तक नीचे आ गए। वहीं इंफोसिस में 2.5% की कमजोरी देखी गई, जबकि TCS, विप्रो और टेक महिंद्रा के शेयर 1.4 से 2 प्रतिशत तक टूटे। स्थिति यह रही कि निफ्टी के टॉप लूजर्स में 5 बड़ी IT कंपनियां ही शामिल रहीं।

गिरावट सिर्फ बड़े शेयरों तक सीमित नहीं रही। मिडकैप दायरे में भी Persistent Systems 3.6% और Coforge 2.7% तक फिसल गए, जिसने निवेशकों की चिंता और गहरी कर दी।

IT सेक्टर पर मंडराता AI का खतरा

भारतीय IT शेयरों में आई इस तेज गिरावट की असली जड़ अमेरिकी बाजार में आई कमजोरी है। नैस्डैक बुधवार रात करीब 2% तक टूटकर बंद हुआ था। इसके अलावा ब्रोकरेज फर्म HSBC की एक रिपोर्ट ने हालात और बिगाड़ दिए। रिपोर्ट के अनुसार, कंपनियों के बीच बढ़ते मर्जर एवं एक्विजिशन (M&A) के चलते IT सेक्टर पर AI से जुड़ा जोखिम और बढ़ सकता है।

HSBC का अनुमान है कि AI के असर से आने वाली सुस्ती अगले 6 से 8 तिमाहियों यानी करीब डेढ़ से दो साल तक IT सेक्टर की ग्रोथ पर दबाव बनाए रख सकती है।

कब थमेगी यह गिरावट

अब सबसे अहम सवाल यही है कि आखिर यह गिरावट कहां जाकर रुकेगी। एक्सपर्ट्स और ब्रोकरेज फर्म्स का मानना है कि IT कंपनियों के वैल्यूएशन में अभी और सुधार आ सकता है। HSBC के मुताबिक इस सेक्टर के शेयरों के दाम अपने प्राइस-टू-अर्निंग (P/E) मल्टीपल के 13-14 गुना पर पहुंचकर स्थिर हो सकते हैं। इसका मतलब है कि कुछ समय तक बाजार में सुस्ती और उतार-चढ़ाव बना रह सकता है।

दूसरे दबाव भी बढ़ा रहे चिंता

इन कारणों के अलावा मध्य-पूर्व में बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव, कच्चे तेल की चढ़ती कीमतें और विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की लगातार बिकवाली भी इस गिरावट को हवा दे रही है। इस माहौल में निवेशक अब IT से दूरी बनाकर फार्मा जैसे अपेक्षाकृत सुरक्षित सेक्टर की ओर रुख कर रहे हैं।

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