फुटबॉल वर्ल्ड कप का काउंटडाउन शुरू हो चुका है और पूरी दुनिया इस समय टीवी स्क्रीन से चिपकी हुई है। आज आधी रात से टूर्नामेंट की शुरुआत हो जाएगी। लेकिन अगर आप यह मानते हैं कि भारत में लोग सिर्फ क्रिकेट के दीवाने हैं, तो आपको महाराष्ट्र के एक ऐतिहासिक शहर का चक्कर जरूर लगाना चाहिए। इस शहर का नाम है कोल्हापुर। यहां की जिस सड़क से भी आप गुजरेंगे, फुटबॉल के दिग्गज खिलाड़ियों के कटआउट और पोस्टर आपको हर तरफ दिखाई देंगे।
जिस कोल्हापुर को लोग पहलवानों का गढ़ मानते हैं, वही असल में भारत का 'मिनी ब्राजील' है। यहां पहलवान भी कुश्ती के बाद शाम होते ही फुटबॉल बूट पहन लेते हैं। आज जब दुनिया भर में वर्ल्ड कप की किक-ऑफ हो रही है, कोल्हापुर में फुटबॉल का जो दीवाना रूप देखने को मिल रहा है, उसकी कहानी किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं।
इतिहास का वो पन्ना: 1910 में शुरू हुआ सफर
आमतौर पर लोग सोचते हैं कि भारत में फुटबॉल को लेकर ज्यादा दीवानगी नहीं है। मगर कोल्हापुर में यह खेल उस दौर से मौजूद है, जब हमारे-आपके दादाजी का जन्म भी नहीं हुआ था।
आज से करीब 116 साल पहले कोल्हापुर में 'जामदार फुटबॉल क्लब' (1910) की स्थापना के साथ इस खेल का पहला बीज बोया गया था। यहां के राजा छत्रपति राजाराम महाराज खुद खेलों के बहुत बड़े मुरीद थे। उन्होंने 1940 में कोल्हापुर स्पोर्ट्स एसोसिएशन (KSA) की नींव रखी और फुटबॉल को सिर्फ एक खेल नहीं, बल्कि कोल्हापुर की शान बना दिया।
द्वितीय विश्व युद्ध और 'पोलिश कनेक्शन'
कोल्हापुर के फुटबॉल का सबसे बड़ा और अनोखा मोड़ दूसरे विश्व युद्ध के दौरान आया। जब हिटलर की नाजी सेना पोलैंड को तबाह कर रही थी, तब कोल्हापुर के शाही परिवार ने दरियादिली दिखाई। पोलैंड के करीब 5,000 शरणार्थियों को कोल्हापुर के 'वलिवड़े' कैंप में ठहराया गया।
ये पोलिश लोग अपने साथ यूरोप का एडवांस और आधुनिक फुटबॉल लेकर आए थे। जब स्थानीय कोल्हापुरी लड़के इन पोलिश खिलाड़ियों के साथ मैदान में उतरे, तो उन्होंने फुटबॉल की वे बारीकियां और पासिंग गेम सीखीं, जो उस जमाने में सिर्फ यूरोप में खेली जाती थीं।
पहलवानों का शहर, लेकिन फुटबॉल की दीवानगी
कोल्हापुर का फुटबॉल इसलिए भी अनोखा है क्योंकि यह अखाड़ों से निकलकर सामने आता है। यहां 124 से ज्यादा रजिस्टर्ड फुटबॉल क्लब हैं, और दिलचस्प बात यह है कि इनमें से ज्यादातर क्लब किसी न किसी पारंपरिक 'तालीम' यानी कुश्ती के अखाड़े से जुड़े हैं। पहलवान मिट्टी में जोर आजमाने के बाद अपना स्टैमिना बढ़ाने के लिए फुटबॉल खेलते हैं।
यहां के अलग-अलग 'पेठों' यानी मोहल्लों के बीच जब मैच होता है, तो माहौल बिल्कुल वैसा ही बन जाता है जैसा मोहन बागान बनाम ईस्ट बंगाल या रियल मैड्रिड बनाम बार्सिलोना के मुकाबले में होता है। पूरा शहर थम सा जाता है।
11 जून से शुरू असली त्योहार: 40 फीट के मेस्सी और रोनाल्डो
आज रात से वर्ल्ड कप शुरू होते ही कोल्हापुर की सड़कों पर पैर रखने की जगह नहीं बचेगी। शहर के हर बड़े चौराहे पर लियोनेल मेस्सी, क्रिस्टियानो रोनाल्डो और नेमार के 40-40 फीट ऊंचे कट-आउट्स खड़े कर दिए गए हैं। ऐसा लगता है मानो ये खिलाड़ी कतर या अमेरिका में नहीं, बल्कि कोल्हापुर की गलियों में ही ड्रिबलिंग कर रहे हों।
ब्राजील बनाम अर्जेंटीना की 'गैंग वॉर'
पूरा कोल्हापुर इस समय दो रंगों में रंगा हुआ है। एक तरफ नीला-सफेद (अर्जेंटीना) और दूसरी तरफ पीला-हरा (ब्राजील)। छतों पर झंडे लहरा रहे हैं और दोस्तों के बीच शर्तें लग रही हैं।
यहां फुटबॉल की दीवानगी इस हद तक है कि जब इन इंटरनेशनल स्टार्स का जन्मदिन आता है, तो फैंस केक काटकर जश्न मनाते हैं। इतना ही नहीं, वर्ल्ड कप के इस जश्न के बीच गरीब और जरूरतमंद बच्चों को मुफ्त में स्पोर्ट्स किट और फुटबॉल बांटी जाती है, ताकि अगली पीढ़ी का 'मेस्सी' कोल्हापुर की ही किसी तालीम से निकल सके।
तो अगली बार जब कोई कहे कि भारत में फुटबॉल का क्रेज सिर्फ कोलकाता या केरल में है, तो उसे टोक दीजिएगा और कहिएगा — बॉस, कभी कोल्हापुर आकर देखो, यहां फुटबॉल मैच के दिन कोल्हापुरी चप्पलें नहीं, सीधे फुटबॉल बूट गरजते हैं।
फीफा मेंस फुटबॉल वर्ल्ड कप 2026: एक नजर में
- तारीख: यह टूर्नामेंट 11 जून से शुरू होकर 19 जुलाई 2026 तक चलेगा।
- मेजबान देश: इतिहास में पहली बार तीन देश मिलकर इसकी मेजबानी कर रहे हैं — अमेरिका (USA), कनाडा और मैक्सिको। मैच इन तीनों देशों के 16 अलग-अलग शहरों में खेले जाएंगे।
- बड़ा फॉर्मेट (48 टीमें): इस बार टीमों की संख्या बढ़ा दी गई है। पहले 32 टीमें खेलती थीं, लेकिन इस बार 48 टीमें खिताब के लिए भिड़ेंगी, जिसके चलते कुल 104 मैच खेले जाएंगे।
- पहला मुकाबला: उद्घाटन मैच मैक्सिको के ऐतिहासिक 'मेक्सिको सिटी स्टेडियम' एस्टाडियो एज़्टेका में मैक्सिको और साउथ अफ्रीका के बीच खेला जाएगा।
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