Shukra Pradosh Vrat 2026: जून का पहला प्रदोष व्रत किस दिन? शिव पूजा के लिए मिलेंगे 1 घंटा 44 मिनट, जानें मुहूर्त और सर्वार्थ सिद्धि योग

जून माह का पहला प्रदोष व्रत 12 जून, शुक्रवार को है, इसलिए यह शुक्र प्रदोष व्रत कहलाएगा। इस दिन भगवान शिव की पूजा के लिए भक्तों को 1 घंटा 44 मिनट का शुभ समय मिलेगा और सर्वार्थ सिद्धि योग भी बन रहा है।

जून महीने का पहला प्रदोष व्रत अधिकमास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को पड़ रहा है। चूंकि यह व्रत शुक्रवार को है, इसलिए इसे शुक्र प्रदोष व्रत कहा जाएगा। इस अवसर पर भगवान शिव की आराधना के लिए श्रद्धालुओं को 1 घंटा 44 मिनट का शुभ समय प्राप्त होगा। खास बात यह है कि इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग का निर्माण हो रहा है, साथ ही परमा एकादशी का पारण भी इसी दिन किया जाएगा। मान्यता है कि प्रदोष व्रत रखकर शिव पूजन करने से पाप और कष्ट दूर होते हैं, जीवन में तरक्की मिलती है और मनोकामनाएं पूरी होती हैं।

जून का पहला प्रदोष व्रत 2026 कब है

वैदिक पंचांग के अनुसार ज्येष्ठ अधिकमास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि 12 जून को शाम 7 बजकर 36 मिनट पर शुरू होगी। यह तिथि अगले दिन यानी 13 जून को शाम 4 बजकर 7 मिनट तक रहेगी। प्रदोष पूजा के मुहूर्त को आधार मानते हुए जून का पहला प्रदोष व्रत 12 जून को रखा जाएगा। इसी दिन शुक्रवार होने के कारण यह शुक्र प्रदोष व्रत के रूप में मनाया जाएगा।

शुक्र प्रदोष व्रत 2026 का शुभ मुहूर्त

12 जून को शुक्र प्रदोष व्रत के दिन शिव पूजा का मुहूर्त शाम 7 बजकर 36 मिनट से आरंभ होगा और रात 9 बजकर 40 मिनट तक बना रहेगा। व्रत रखने वालों को सूर्यास्त के पश्चात इसी अवधि में भगवान शिव की पूजा करनी चाहिए। मान्यता है कि त्रयोदशी के प्रदोष काल में भगवान शिव हिमालय पर प्रसन्न होकर नृत्य करते हैं, इसी कारण प्रदोष व्रत की पूजा संध्या के समय की जाती है।

इस दिन ब्रह्म मुहूर्त सुबह 04:02 बजे से 04:42 बजे तक रहेगा। दिन का शुभ समय यानी अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:53 बजे से दोपहर 12:49 बजे तक है। वहीं निशिता मुहूर्त देर रात 12:01 बजे से शुरू होकर 13 जून को 12:41 बजे तक रहेगा।

शुक्र प्रदोष पर सर्वार्थ सिद्धि योग

इस बार के शुक्र प्रदोष व्रत पर सर्वार्थ सिद्धि योग का संयोग बन रहा है। यह शुभ और फलदायी योग सुबह 05 बजकर 23 मिनट से आरंभ होकर सुबह 06 बजकर 28 मिनट पर समाप्त होगा। इस दिन अतिगण्ड योग प्रात:काल से रात 09:26 बजे तक रहेगा, इसके बाद सुकर्मा योग प्रारंभ हो जाएगा। नक्षत्रों की बात करें तो व्रत के दिन अश्विनी नक्षत्र सुबह से लेकर 06:28 बजे तक रहेगा, इसके बाद भरणी नक्षत्र लग जाएगा, जो 13 जून को 04:05 तक मान्य रहेगा।

प्रदोष व्रत का महत्व

किसी भी महीने की त्रयोदशी तिथि पर प्रदोष व्रत रखा जाता है। हर माह में दो प्रदोष व्रत आते हैं, एक शुक्ल पक्ष में और दूसरा कृष्ण पक्ष में। इस दिन संकल्प लेकर विधि-विधान से भगवान शिव की पूजा करने पर कष्टों का निवारण होता है। साथ ही सुख, संपत्ति, संतान, आरोग्य, उत्तम जीवनसाथी, समृद्धि और मोक्ष जैसी कामनाओं की प्राप्ति होती है।

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