बिहार की महत्वाकांक्षी रक्सौल-हल्दिया ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे परियोजना के रूट में बड़ा परिवर्तन किया जा रहा है। रक्सौल में प्रस्तावित एयरपोर्ट और एक्सप्रेसवे के लिए तय की गई जमीन एक-दूसरे से टकराने की स्थिति में आ गई थी, जिसके चलते यह निर्णय लिया गया है। इस तकनीकी अड़चन को दूर करने और दोनों ही परियोजनाओं को बिना रुकावट आगे बढ़ाने के मकसद से एक्सप्रेसवे के अलाइनमेंट में संशोधन किया जा रहा है।
एजेंसी ने तैयार किया नया प्रस्ताव
रक्सौल प्रखंड के किशनी, भरथारी, हरैया और चंदौली इलाके में एयरपोर्ट तथा एक्सप्रेसवे के लिए चिन्हित जमीन का कुछ हिस्सा आपस में ओवरलैप कर रहा है। इसी कारण संबंधित एजेंसी ने एक नया प्रस्ताव तैयार कर भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) को भेज दिया है।
कुछ जगहों पर बदलेगा रास्ता
नई योजना के अनुसार अब एक्सप्रेसवे की शुरुआत एयरपोर्ट के पीछे से होने के बजाय इंटीग्रेटेड चेक पोस्ट (ICP) के पास से होने की संभावना है। इससे एक्सप्रेसवे को अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिहाज से अहम ICP से सीधा जुड़ाव मिल सकेगा। इसके अलावा जयसिंहपुर, नगर और पंथी टोला क्षेत्र में भी कुछ स्थानों पर रूट में फेरबदल किया जा सकता है।
56 गांवों में भूमि अधिग्रहण जारी
करीब 715 किलोमीटर लंबे रक्सौल-हल्दिया एक्सप्रेसवे से माल ढुलाई आसान होगी और नेपाल सीमा से जुड़े कारोबार को भी बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद है। फिलहाल जिले के आठ प्रखंडों के 56 गांवों में भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया चल रही है। यह 6-लेन एक्सप्रेसवे बनने के बाद रक्सौल का सीधा संपर्क पश्चिम बंगाल के हल्दिया बंदरगाह से जुड़ जाएगा।
खत्म होगा भूमि विवाद
अलाइनमेंट बदलने का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि एयरपोर्ट और एक्सप्रेसवे के बीच का भूमि विवाद समाप्त हो जाएगा। साथ ही ICP से सीधा जुड़ाव मिलने से अंतरराष्ट्रीय व्यापार और परिवहन को बढ़ावा मिलेगा। हालांकि रूट में बदलाव की वजह से कुछ इलाकों में दोबारा सर्वेक्षण, नोटिस और कागजी कार्यवाही पूरी करनी होगी, जिससे परियोजना के शुरू होने में थोड़ी देरी हो सकती है।
विकसित होंगी आधुनिक सुविधाएं
एक्सप्रेसवे पर आधुनिक सुविधाओं का भी विकास किया जाएगा। इनमें सर्विस रोड, फ्लाईओवर, अंडरपास, टोल प्लाजा, एम्बुलेंस सेवा, पेट्रोल पंप, विश्राम स्थल और ट्रक पार्किंग जैसी सुविधाएं शामिल होंगी। इस पर वाहन केवल निर्धारित एंट्री और एग्जिट प्वाइंट से ही आ-जा सकेंगे।
घटेगी लॉजिस्टिक लागत
विशेषज्ञों का मानना है कि रूट में किया गया यह बदलाव भविष्य में लॉजिस्टिक लागत को कम करेगा और रक्सौल को एक बड़े व्यापारिक केंद्र के रूप में विकसित करने में सहायक साबित होगा। इससे बिहार और नेपाल के बीच कारोबारी गतिविधियों को भी नई रफ्तार मिलने की संभावना है।
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