भारत प्राचीन काल से ही धार्मिक और आध्यात्मिक मान्यताओं की भूमि रहा है। यहां ऐसी अनेक कथाएं सुनने को मिलती हैं जो कल्पना को भी हकीकत जैसा रूप दे देती हैं। आस्था से जुड़ा ऐसा ही एक स्थल उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर जिले के लोहरा मऊ गांव में मौजूद है, जहां करीब 160 साल पुराना एक नीम का पेड़ ग्रामीणों की श्रद्धा का केंद्र बना हुआ है।
इस पेड़ की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसकी छाल पर स्वाभाविक रूप से एक अद्भुत आकृति उभर आई है। इसके अलावा गर्मी के मौसम में दोपहर के समय इसकी जड़ से लेकर ऊंची शाखाओं तक चींटियों की लंबी कतारें देखी जाती हैं। गांव के लोग इस पेड़ की पूजा करते हैं और इसे ऐतिहासिक धरोहर मानते हुए सुरक्षित रखने का प्रयास कर रहे हैं।
पेड़ का इतिहास और मान्यता
गांव के बुजुर्ग और स्थानीय निवासी बंशीधर सिंह के अनुसार इस नीम के पेड़ का इतिहास 160 वर्षों से भी अधिक पुराना माना जाता है। बताया जाता है कि इस पेड़ को इसी गांव के ठाकुर बृजमोहन सिंह ने लगाया था। यह नीम न केवल प्रकृति के लिए वरदान साबित हुआ, बल्कि सुल्तानपुर के लोगों के लिए आस्था का अनूठा केंद्र भी बन गया।
बंशीधर सिंह का परिवार इस पेड़ की नियमित रूप से पूजा करता है। गांव के कई लोगों ने यहां मन्नतें मांगी हैं और उनका दावा है कि उनकी मुरादें भी पूरी हुईं। इसके बाद से लोगों की इस पेड़ के प्रति आस्था और गहरी होती चली गई।
पूरे गांव की आस्था का केंद्र
इस पेड़ पर केवल एक परिवार ही नहीं, बल्कि पूरे लोहरा मऊ गांव के लोग दर्शन और पूजन के लिए पहुंचते हैं। यह पेड़ न सिर्फ धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि ऐतिहासिक दृष्टि से भी प्रकृति की एक महत्वपूर्ण धरोहर माना जाता है। करीब 160 वर्ष पुराने इस नीम को सुल्तानपुर की एक जीवंत और ऐतिहासिक विरासत के रूप में देखा जाता है, जिसे ग्रामीण मिलकर सहेज रहे हैं।
छाल पर उभरी अद्भुत आकृति
पेड़ की जड़ के पास एक चबूतरा बनाया गया है। इसी चबूतरे से ऊपर की ओर बढ़ते हुए पेड़ की छाल पर स्वाभाविक रूप से एक अद्भुत आकृति बन गई है। जहां-जहां से इसकी शाखाएं निकलती हैं, वहां अलग-अलग आकार दिखाई देते हैं, जो इस पेड़ की विशिष्टता और अनोखी बनावट को दर्शाते हैं।
चींटियों की कतार का अनोखा दृश्य
आमतौर पर नीम को उसकी कड़वाहट और औषधीय गुणों के लिए जाना जाता है, लेकिन इस पेड़ की एक और खासियत यह है कि एक निश्चित समय पर इस पर चींटियों की लंबी कतारें लगती हैं। काली और लाल चींटियां चबूतरे के चारों ओर परिक्रमा करती हुई पेड़ पर ऊपर की ओर चढ़ती हैं। यह दृश्य विशेष रूप से गर्मी के मौसम में दोपहर के समय देखने को मिलता है।
अब तक इसका कोई वैज्ञानिक या स्पष्ट कारण सामने नहीं आया है। स्थानीय लोगों का मानना है कि यह पेड़ अद्भुत और चमत्कारी है, इसी वजह से यहां ऐसा अनोखा नजारा दिखाई देता है।
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