तेजस एमके-1ए फाइटर जेट कार्यक्रम में एक बड़ी जालसाजी पकड़ में आई है। हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) ने इस मामले में प्राथमिकी दर्ज कराई है। हैदराबाद स्थित कंपनी टेक एयरो डिवाइस पर आरोप है कि उसने 199 स्पेयर पार्ट्स की फर्जी जांच रिपोर्ट सौंपी। क्वालिटी कंट्रोल ऑडिट के दौरान इस गड़बड़ी का खुलासा हुआ, जिसके बाद एचएएल ने कंपनी को ब्लैकलिस्ट कर दिया और पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।
कैसे शुरू हुआ पूरा मामला
एचएएल एयरक्राफ्ट डिवीजन के डिप्टी जनरल मैनेजर रानू गुप्ता ने अपनी शिकायत में बताया कि LCA-83-Mk1A परियोजना से जुड़े विभिन्न पुर्जों की आपूर्ति के लिए M/s. TEC Aero Devices को 28 मार्च 2022 से कुल 18 परचेज ऑर्डर दिए गए थे। तय शर्तों के मुताबिक कंपनी ने सैंपल, टेस्ट रिपोर्ट और अन्य आवश्यक दस्तावेज जमा करने के बाद 35 श्रेणियों के पुर्जों, यानी कुल 172 आइटम के निर्माण के लिए एचएएल से मंजूरी के प्रमाणपत्र प्राप्त कर लिए थे।
असली रिपोर्ट देने में नाकाम रही कंपनी
स्पेयर पार्ट्स की थोक आपूर्ति के समय कंपनी को मूल जांच रिपोर्ट जमा करनी थी। टेक एयरो डिवाइस ने 199 टेस्ट रिपोर्ट सौंपीं। एक मौके पर एचएएल एयरक्राफ्ट डिवीजन के क्वालिटी कंट्रोल विभाग ने कंपनी से टेन्साइल स्ट्रेंथ, हार्डनेस, ब्रेक लोड, शियर, NDT, माइक्रोस्ट्रक्चर और सॉल्ट स्प्रे टेस्ट जैसी जांचों से जुड़ी ओरिजिनल रिपोर्ट मांगीं। हालांकि कंपनी ये मूल रिपोर्ट देने में विफल रही। बार-बार याद दिलाने के बाद कंपनी के प्रतिनिधियों ने डिवीजन का दौरा किया और 22.11.2023 की तारीख का एक माफीनामा सौंपा, जिसमें यह स्वीकार किया गया कि उन्होंने एक्सिस इंस्पेक्शन सॉल्यूशंस, हैदराबाद के नाम से दो गलत रिपोर्ट दी थीं।
ऑडिट में खुली पूरी सच्चाई
शक होने के बाद एचएएल ने कंपनी की सभी 199 टेस्ट रिपोर्ट की जांच करने का फैसला किया। एचएएल एयरक्राफ्ट डिवीजन ने 29.11.2023 को एक्सिस इंस्पेक्शन सॉल्यूशंस, हैदराबाद में ऑडिट किया। इस ऑडिट में सामने आया कि 199 में से एक भी रिपोर्ट एक्सिस इंस्पेक्शन सॉल्यूशंस ने जारी नहीं की थी। जांच में यह भी पता चला कि फरवरी 2023 से सितंबर 2023 तक के आठ महीनों के दौरान टेक एयरो डिवाइस की ओर से जमा की गई सभी 199 रिपोर्ट जाली थीं। एक्सिस इंस्पेक्शन सॉल्यूशंस ने 29.11.2023 के अपने पत्र में एचएएल को बताया कि टेक एयरो डिवाइस ने जानबूझकर उनकी कंपनी के नाम का दुरुपयोग किया और नकली रिपोर्ट बनाकर जमा करने के लिए उनके हस्ताक्षर तक जाली बनाए।
तीन साल के लिए ब्लैकलिस्ट
जालसाजी का खुलासा होने के बाद टेक एयरो डिवाइस को 10.03.2027 तक यानी तीन साल की अवधि के लिए एचएएल के साथ कारोबार करने से रोक दिया गया। यह भी बताया गया कि उस तारीख तक एचएएल एयरक्राफ्ट डिवीजन की ओर से कंपनी को कोई वित्तीय भुगतान नहीं किया गया था। 29.11.2023 को एक्सिस इंस्पेक्शन सॉल्यूशंस से मिले पत्र के आधार पर टेक एयरो डिवाइस हैदराबाद को 'कारण बताओ नोटिस' जारी किया गया, जिसमें व्यापारिक लेन-देन पर रोक लगाने का प्रस्ताव रखा गया। अपने पत्र में एक्सिस इंस्पेक्शन सॉल्यूशंस ने दोहराया कि टेक एयरो डिवाइस ने जानबूझकर उसके नाम का गलत इस्तेमाल कर जाली रिपोर्ट जमा कीं।
दिसंबर 2023 में मांगी गई माफी
टेक एयरो डिवाइस ने 20.12.2023 के अपने पत्र में अनुरोध किया कि उनकी गलती को माफ कर दिया जाए। इसके बाद 06.01.2024 के पत्र के जरिए एचएएल एयरक्राफ्ट डिवीजन ने कंपनी को सूचित किया कि उसे तीन साल की अवधि के लिए स्वीकृत आपूर्तिकर्ताओं की सूची से हटा दिया गया है। आगे चलकर इस मामले पर आंतरिक बैठकें हुईं और टेक एयरो डिवाइस के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर कार्रवाई शुरू करने का निर्णय लिया गया। इन आंतरिक प्रक्रियाओं के चलते शिकायत दर्ज करने में देरी हुई। यही वजह है कि शिकायतकर्ता ने जाली टेस्ट रिपोर्ट जमा करने के लिए कंपनी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई का अनुरोध करते हुए यह शिकायत दर्ज कराई।
https://www.indiatv.in/india/national/hal-files-fir-against-hyderabad-based-company-for-fraud-in-tejas-mk-1-fighter-jet-program-2026-06-11-1224356