रूस को नाकों चने चबवाने वाला HIMARS अब ताइवान के पास, पहले लाइव टेस्ट से चीन को कड़ा संदेश

चीन से बढ़ते तनाव के बीच ताइवान ने पहली बार अमेरिकी HIMARS रॉकेट सिस्टम से लाइव फायर अभ्यास किया। ताइवान स्ट्रेट में हुए इस युद्धाभ्यास का मकसद संभावित चीनी हमले की सूरत में तुरंत जवाबी कार्रवाई की क्षमता को परखना था।

चीन के साथ लगातार गहराते तनाव के बीच ताइवान ने अपनी सैन्य तैयारियों का प्रदर्शन किया है। ताइवान की सेना ने पहली बार अमेरिकी HIMARS (हाई मोबिलिटी आर्टिलरी रॉकेट सिस्टम) से रॉकेट दागकर लाइव फायर अभ्यास किया। यह अभ्यास ताइवान स्ट्रेट में हुआ, जो ताइवान और चीन के बीच स्थित रणनीतिक रूप से अहम समुद्री क्षेत्र है। यही HIMARS वह रॉकेट सिस्टम है, जिसने यूक्रेन युद्ध के दौरान रूस को भारी नुकसान पहुंचाया था।

ताइवानी सैन्य अधिकारियों के मुताबिक इस ड्रिल का मकसद संभावित चीनी सैन्य हमले की स्थिति में फौरन तैनाती और सटीक प्रहार की क्षमता की जांच करना था।

चीन को सीधी चेतावनी

युद्धाभ्यास के दौरान HIMARS लॉन्चर महज कुछ ही मिनटों में अपनी फायरिंग पोजिशन तक पहुंच गए और आदेश मिलते ही उन्होंने रॉकेट दाग दिए। ताइवानी सेना ने बताया कि यह उसकी ‘शूट एंड स्कूट’ रणनीति का हिस्सा है, जिसमें हमला करते ही सैन्य वाहन तुरंत अपनी जगह बदल लेते हैं, ताकि दुश्मन पलटवार न कर सके।

सेना के सार्जेंट वांग मिंग-हुई ने कहा, ‘मौजूदा दुश्मन के खतरे को देखते हुए हम ताइवान की रक्षा के लिए पूरे संकल्प के साथ HIMARS का प्रशिक्षण जारी रखेंगे।’

समुद्र में दागे गए रॉकेट

ताइवानी सेना ने स्पष्ट किया कि अभ्यास में इस्तेमाल किए गए रॉकेट प्रशिक्षण के लिए सीमित दूरी वाले थे। ये रॉकेट समुद्र में थोड़ी दूरी तय करने के बाद पानी में जा गिरे। ड्रिल में HIMARS के साथ-साथ 155 मिमी सेल्फ-प्रोपेल्ड हॉवित्जर भी शामिल किए गए थे। पूरे अभ्यास को संभावित चीनी आक्रमण के जवाब की सैन्य रणनीति के रूप में तैयार किया गया था।

क्यों खास है HIMARS?

HIMARS को अमेरिकी सेना का बेहद आधुनिक रॉकेट सिस्टम माना जाता है। यूक्रेन युद्ध में भी इस सिस्टम ने रूस को भयानक क्षति पहुंचाई थी। ट्रकों पर लगे ये लॉन्चर तेजी से तैनात किए जा सकते हैं और कम समय में कई रॉकेट दाग सकते हैं। ताइवान इन्हें अपनी रक्षा रणनीति का अहम हिस्सा मानता है।

  • यह लंबी दूरी तक सटीक हमला करने में सक्षम रॉकेट सिस्टम है।
  • GPS-गाइडेड रॉकेटों की मदद से यह लक्ष्य को बेहद सटीकता से निशाना बनाता है।
  • ‘शूट एंड स्कूट’ क्षमता, यानी फायरिंग के तुरंत बाद यह अपनी जगह बदल सकता है।
  • ट्रक-माउंटेड होने के कारण इसे तेजी से तैनात और ऑपरेट किया जा सकता है।
  • GMLRS रॉकेट से 70-150 किमी और ATACMS मिसाइल से 300 किमी तक हमला संभव है।
  • दुश्मन के कमांड सेंटर, हथियार डिपो और सैन्य ठिकानों पर काफी अंदर तक हमले के लिए यह प्रभावी है।
  • आधुनिक युद्ध में सटीक और तेज स्ट्राइक के लिए यह अमेरिका और उसके सहयोगी देशों की प्रमुख पसंद है।

चीन और ताइवान में तनाव की वजह

चीन ताइवान को अपना हिस्सा मानता है और बार-बार दोहरा चुका है कि एकीकरण किसी न किसी रूप में होकर रहेगा और जरूरत पड़ने पर बल का प्रयोग भी किया जा सकता है। हाल के दिनों में कई जहाज और फाइटर जेट ताइवान की सीमा के नजदीक पहुंचे हैं। पिछले कुछ वर्षों में चीन ने ताइवान के आसपास कई बड़े सैन्य अभ्यास भी किए हैं।

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