कांग्रेस ने बुधवार को उन रिपोर्टों को पूरी तरह से बेबुनियाद बताया, जिनमें कहा गया था कि पार्टी की संसदीय दल अध्यक्ष सोनिया गांधी और तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी की हालिया मुलाकात में दोनों दलों के विलय पर चर्चा हुई थी। पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने स्पष्ट किया कि इस भेंट में दोनों नेताओं ने केवल अपने निजी विषयों पर बातचीत की।
क्या है पूरा मामला
टीएमसी में चल रही अंदरूनी बगावत के बीच ममता बनर्जी ने मंगलवार को सोनिया गांधी से उनके आवास पर मुलाकात की थी। कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया कि इस दौरान कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व की ओर से ममता को अपनी पार्टी का कांग्रेस में विलय करने का प्रस्ताव दिया गया।
जयराम रमेश का बयान
इन अटकलों पर विराम लगाते हुए जयराम रमेश ने 'एक्स' पर लिखा कि सोनिया गांधी और ममता बनर्जी की मुलाकात को लेकर सामने आई कुछ खबरें पूरी तरह गलत हैं। उन्होंने कहा कि यह बैठक बेहद सौहार्दपूर्ण माहौल में हुई और दोनों के बीच लंबे समय से चले आ रहे रिश्तों को देखते हुए कई व्यक्तिगत मुद्दों पर बातचीत हुई।
हवाई अड्डे पर चुप रहीं ममता
कोलकाता लौटने के बाद नेताजी सुभाष चंद्र बोस अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर मौजूद मीडियाकर्मियों ने ममता बनर्जी से तृणमूल कांग्रेस के कांग्रेस में पुनर्विलय की संभावना पर सवाल पूछे। हालांकि पूर्व मुख्यमंत्री बिना कोई जवाब दिए तेजी से अपनी गाड़ी में बैठकर वहां से रवाना हो गईं।
टीएमसी के गठन की पृष्ठभूमि
ममता बनर्जी ने 1 जनवरी, 1998 को कांग्रेस से अलग होकर तृणमूल कांग्रेस की नींव रखी थी। उस समय उन्होंने देश की सबसे पुरानी राजनीतिक पार्टी के नेतृत्व पर आरोप लगाया था कि वह पश्चिम बंगाल में तत्कालीन सीपीआई (एम) के नेतृत्व वाली वाम मोर्चा सरकार के खिलाफ आंदोलन खड़ा करने में हिचक रहा है।
विलय की संभावना से इनकार
पश्चिम बंगाल विधानसभा में तृणमूल कांग्रेस विधायक दल के नवगठित लेकिन बहुमत वाले गुट के नेता और सदन में विपक्ष के आधिकारिक नेता ऋतब्रत बनर्जी ने दोनों दलों के पुनर्मिलन की किसी भी संभावना से दो-टूक इनकार किया।
उन्होंने कहा कि उनका गुट ही पश्चिम बंगाल विधानसभा में असली तृणमूल कांग्रेस है। ऋतब्रत बनर्जी के अनुसार, हमने 58 विधायकों के साथ शुरुआत की थी और आज यह संख्या बढ़कर 64 हो गई है। उन्होंने दावा किया कि तृणमूल कांग्रेस के 28 लोकसभा सदस्यों में से अधिकांश अब बागी गुट में शामिल हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि चूंकि वही मुख्य तृणमूल कांग्रेस हैं, इसलिए पार्टी के कांग्रेस में विलय का सवाल ही पैदा नहीं होता।
राज्य कांग्रेस नेताओं की राय
पश्चिम बंगाल में राज्य कांग्रेस के नेताओं ने भी दोनों दलों के पुनर्विलय की संभावना पर संदेह जताया। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष शुभंकर सरकार के मुताबिक ऐसी किसी भी संभावना में दो प्रमुख शर्तें अहम होंगी।
उन्होंने कहा कि पहली शर्त यह है कि जो भी कांग्रेस में वापसी करना चाहेगा, उसे राहुल गांधी को अपना सर्वोच्च नेता स्वीकार करना होगा। दूसरी शर्त यह है कि अगर कोई यह सोचकर लौटना चाहता है कि वह अपने भ्रष्टाचार के पुराने कृत्यों के चलते कानूनी उलझनों से बचने के लिए कांग्रेस को ढाल की तरह इस्तेमाल करेगा, तो यह किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं होगा।
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