फीफा वर्ल्ड कप से पहले सुरक्षा में बड़ी चूक, लियोनल मेसी समेत पूरी अर्जेंटीना टीम का पासपोर्ट डेटा सार्वजनिक

वर्ल्ड कप 2026 की शुरुआत से पहले अर्जेंटीना की पूरी टीम के पासपोर्ट नंबर लीक हो गए, जबकि सेनेगल टीम की कड़ी एयरपोर्ट जांच और सोमाली रेफरी को अमेरिका में एंट्री न मिलने से फीफा सवालों के घेरे में है।

फीफा वर्ल्ड कप 2026 की शुरुआत होने से ठीक पहले टूर्नामेंट विवादों और सुरक्षा खामियों में उलझता दिख रहा है। एक ओर मैदान पर टीमें तैयारियों में जुटी हैं, वहीं दूसरी ओर सुरक्षा, कथित भेदभाव और प्रशासनिक लापरवाही से जुड़ी खबरों ने इस आयोजन की साख पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। लियोनल मेसी से जुड़े डेटा लीक से लेकर अफ्रीकी खिलाड़ियों के साथ कथित भेदभाव और एक शीर्ष रेफरी को अमेरिका में प्रवेश न मिलने तक — फिलहाल वर्ल्ड कप की सुर्खियां फुटबॉल से ज्यादा विवादों के नाम रही हैं।

अर्जेंटीना टीम के पासपोर्ट नंबर हुए लीक

टूर्नामेंट शुरू होने से पहले ही एक बड़ी सुरक्षा चूक सामने आ गई है। समाचार एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, एक गंभीर प्रशासनिक लापरवाही की वजह से मौजूदा चैंपियन अर्जेंटीना की पूरी टीम के पासपोर्ट विवरण सार्वजनिक हो गए। मंगलवार को आइसलैंड के खिलाफ खेले गए प्री-वर्ल्ड कप वॉर्म-अप फ्रेंडली मैच के दौरान आधिकारिक टीम शीट पर खिलाड़ियों के पासपोर्ट नंबर दर्ज थे।

नियम के अनुसार, मीडिया और जनता को जारी करने से पहले इन नंबरों को धुंधला (ब्लर) किया जाना चाहिए था, लेकिन अलबामा के जॉर्डन-हारे स्टेडियम में यह शीट बिना किसी कांट-छांट के हर जगह घूम गई। इस लीक में सर्वकालिक महान खिलाड़ियों में गिने जाने वाले लियोनल मेसी का पासपोर्ट डेटा भी शामिल है। राहत की बात इतनी रही कि विरोधी टीम आइसलैंड के खिलाड़ियों की जानकारी सुरक्षित रही, क्योंकि उन्होंने अपनी टीम शीट में पासपोर्ट नंबर दर्ज ही नहीं किए थे।

इस संवेदनशील मामले को लेकर रॉयटर्स ने अर्जेंटीना फुटबॉल फेडरेशन और फीफा से संपर्क किया है। खेल जगत में इस चूक को लेकर खासी नाराजगी देखी जा रही है।

सेनेगल टीम के साथ एयरपोर्ट पर 'भेदभाव' का आरोप

विवाद यहीं नहीं रुके। सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसने अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियों और फीफा प्रबंधन को कठघरे में खड़ा कर दिया है। वीडियो में दावा किया जा रहा है कि साडियो माने और कालिदौ कौलीबाली जैसे वैश्विक सितारों से सजी सेनेगल की फुटबॉल टीम को अमेरिका के सैन एंटोनियो हवाईअड्डे पर असामान्य रूप से कड़ी सुरक्षा जांच से गुजरना पड़ा। उड़ान से उतरते ही खिलाड़ियों की एयरपोर्ट के टरमैक पर ही मेटल डिटेक्टरों से जांच की जा रही थी।

सोशल मीडिया पर लोगों का गुस्सा इस बात को लेकर है कि स्पेन जैसी यूरोपीय टीमों को इस तरह की गहन जांच का सामना नहीं करना पड़ा, जबकि सेनेगल और उज्बेकिस्तान — जिसके साथ न्यूयॉर्क में कथित तौर पर ऐसा ही बर्ताव हुआ — जैसी टीमों को निशाना बनाया गया। फैंस और विशेषज्ञ इसे नस्लीय और क्षेत्रीय भेदभाव का रूप मान रहे हैं।

सोमाली रेफरी उमर अरतान को अमेरिका में नहीं मिली एंट्री

एक और चौंकाने वाले घटनाक्रम में सोमालिया के शीर्ष रेफरी उमर अरतान को अमेरिका में प्रवेश देने से इनकार कर दिया गया। अरतान को साल 2025 में अफ्रीका का सर्वश्रेष्ठ पुरुष रेफरी चुना गया था और वे फीफा की अंतिम सूची में जगह बनाकर वर्ल्ड कप में मैच ऑफिशियल बनने वाले सोमालिया के पहले रेफरी बनने जा रहे थे।

केन्या स्थित सोमाली दूतावास द्वारा वीज़ा जारी किए जाने के बावजूद, शनिवार को मियामी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर 'यू.एस. कस्टम्स एंड बॉर्डर प्रोटेक्शन' ने 'वेटिंग चिंताओं' का हवाला देकर उन्हें रोक दिया। इसके तुरंत बाद फीफा ने भी उन्हें टूर्नामेंट की रेफरी सूची से बाहर कर दिया।

बुधवार को जब अरतान राजधानी मोगादिशु लौटे, तो समर्थकों और अधिकारियों की भारी भीड़ ने उनका स्वागत किया। निराशा के बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और कहा, 'मैं अगले वर्ल्ड कप में जरूर रहूंगा। मैं सोमाली युवाओं से अपील करता हूं कि वे हमेशा अपने देश पर गर्व करें।'

मैदान पर लौटे मेसी, रच दिया इतिहास

इन तमाम विवादों के बीच जब अर्जेंटीना की टीम आइसलैंड के खिलाफ मैदान में उतरी, तो फैंस को लियोनल मेसी का वही पुराना जादू देखने को मिला। हैमस्ट्रिंग की चोट से उबरकर लौट रहे मेसी दूसरी छमाही में सब्स्टीट्यूट के तौर पर मैदान में आए और आते ही इतिहास रच दिया।

जॉर्डन-हारे स्टेडियम में मौजूद 88,000 से अधिक दर्शकों के सामने अर्जेंटीना ने यह मुकाबला 3-0 से जीता। मैच के दौरान मेसी के एक शानदार थ्रू-बॉल पर लुटारो मार्टिनेज को पेनल्टी बॉक्स में फाउल किया गया। इसके बाद मेसी ने बिना कोई गलती किए पेनल्टी को गोल में बदला और टीम को 2-0 की बढ़त दिला दी।

इस गोल के साथ मेसी 38 वर्ष और 11 महीने की उम्र में अर्जेंटीना के इतिहास के सबसे उम्रदराज गोलस्कोरर बन गए। उन्होंने एंजेल लाब्रूना का 1957 से चला आ रहा रिकॉर्ड तोड़ दिया, जो उस समय मेसी से दो महीने छोटे थे।

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