बारिश में उगने वाला यह औषधीय पौधा है सेहत का खजाना, जानें ट्रायनथेमा पोर्टुलाकैस्ट्रम के फायदे और सेवन का तरीका

उत्तर प्रदेश समेत कई ग्रामीण इलाकों में बरसात के मौसम में पनपने वाला ट्रायनथेमा पोर्टुलाकैस्ट्रम पारंपरिक रूप से कई स्वास्थ्य समस्याओं के घरेलू उपचार में इस्तेमाल होता आया है। हालांकि जानकार इसे सावधानी और उचित सलाह के साथ ही लेने की सलाह देते हैं।

उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले में ऐसी कई औषधीय वनस्पतियां पाई जाती हैं, जिन्हें सेहत के लिहाज से बेहद उपयोगी माना जाता है। इन्हीं में से एक है ट्रायनथेमा पोर्टुलाकैस्ट्रम, जो सिर्फ बरसात के मौसम में ही दिखाई देता है, लेकिन औषधीय गुणों से भरपूर होता है। जमीन पर फैलने वाली यह शाकीय वनस्पति कई बीमारियों में रामबाण मानी जाती है।

कैसा दिखता है यह पौधा

ट्रायनथेमा पोर्टुलाकैस्ट्रम का रंग लाल या हल्का बैंगनी होता है और इसके फूल छोटे तथा गुलाबी रंग के होते हैं। बरसात के मौसम में यह तेजी से बढ़ता है और लगभग 15 से 40 सेंटीमीटर तक फैल सकता है। खेतों में अक्सर खरपतवार के रूप में उगने वाला यह पौधा ग्रामीण इलाकों में अलग-अलग स्थानीय नामों से जाना जाता है।

किन समस्याओं में माना जाता है फायदेमंद

इस पौधे को त्वचा रोग, सूजन, पेट की समस्या, कब्ज, घाव, मूत्र संबंधी दिक्कत और जोड़ों के दर्द जैसी परेशानियों में उपयोगी माना जाता है।

जोड़ों की सूजन में राहत

अगर आप जोड़ों की सूजन से परेशान हैं तो ट्रायनथेमा पोर्टुलाकैस्ट्रम के पौधे को पीसकर पेस्ट बना लें और उसे प्रभावित जोड़ों पर लगाएं। माना जाता है कि इससे धीरे-धीरे सूजन में आराम मिलता है।

त्वचा रोगों में उपयोग

भीषण गर्मी में दाद, खाज और खुजली की समस्या आम हो जाती है। ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी लोग इस पौधे की पत्तियों का लेप दाद, खुजली, फोड़े-फुंसी और त्वचा की जलन में लगाते हैं। इसके लिए ताजी पत्तियों को पीसकर प्रभावित जगह पर लगाया जाता है और दिन में दो बार इसका प्रयोग किया जा सकता है।

पीलिया में पारंपरिक उपयोग

पीलिया वह स्थिति है जिसमें शरीर और आंखों का रंग पीला पड़ जाता है। गांवों में लंबे समय से विषखपरा यानी ट्रायनथेमा पोर्टुलाकैस्ट्रम के रस का इस्तेमाल पीलिया के दौरान किया जाता रहा है। माना जाता है कि सुबह खाली पेट इसकी पत्तियों के रस का सेवन करने से पीलिया जैसी समस्या में राहत मिल सकती है।

पेट की समस्याओं में लाभ

गर्मियों में कब्ज की शिकायत आम रहती है और इस पौधे को कब्ज में रामबाण माना जाता है। इसकी पत्तियों का रस सुबह खाली पेट लेने से कब्ज और गैस जैसी समस्याओं में राहत मिलती है। हालांकि ध्यान रहे कि लंबे समय तक लगातार पत्तियों के रस का सेवन नहीं करना चाहिए।

डेंगू-मलेरिया में काढ़े का सेवन

बदलते मौसम में डेंगू, मलेरिया और वायरल फीवर का प्रकोप बढ़ जाता है। ऐसे में अगर आप इन समस्याओं से अक्सर परेशान रहते हैं तो ट्रायनथेमा पोर्टुलाकैस्ट्रम की पत्तियों को अच्छी तरह साफ कर उनका काढ़ा बना लें। माना जाता है कि सुबह-शाम इसका सेवन करने से मलेरिया और डेंगू जैसी समस्याओं में राहत मिल सकती है।

विशेषज्ञ की सलाह

आयुर्वेदिक आचार्य देवेंद्र कुमार के मुताबिक ट्रायनथेमा पोर्टुलाकैस्ट्रम में एंटीऑक्सीडेंट गुण पाए जाते हैं। उन्होंने बताया कि गर्भवती महिलाओं को इसका सेवन चिकित्सकीय सलाह के बिना नहीं करना चाहिए। ग्रामीण इलाकों में लोग इसकी पत्तियों का रस, काढ़ा और लेप बनाकर उपयोग करते हैं, लेकिन गंभीर बीमारियों में इसे आधुनिक चिकित्सा का विकल्प नहीं माना जा सकता। सही मात्रा और उचित परामर्श के साथ ही इसका उपयोग लाभकारी साबित हो सकता है।

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