सेबी का केस अब सिर्फ 9 सवालों तक सिमटा, ₹15.15 लाख करोड़ के विवाद पर राजेश मेहता बोले– हमारे पास हर पैसे का हिसाब

सेबी की जांच का सामना कर रही राजेश एक्सपोर्ट्स के चेयरमैन राजेश मेहता का दावा है कि हजारों स्पष्टीकरणों के बाद अब केवल 9 मुद्दे लंबित हैं। उनका कहना है कि 15.15 लाख करोड़ रुपये के राजस्व का विवाद वित्तीय आंकड़ों की गलत व्याख्या से उपजा है।

बाजार नियामक सेबी की जांच के घेरे में आई राजेश एक्सपोर्ट्स ने रेगुलेटर की ओर से लगाए गए आरोपों पर विस्तार से अपना पक्ष रखा है। कंपनी के चेयरमैन राजेश मेहता का कहना है कि अब तक हजारों सवालों और स्पष्टीकरणों का जवाब दिया जा चुका है और मौजूदा समय में केवल 9 मुद्दे ही बाकी रह गए हैं। इन सभी विवादों में सबसे बड़ा मामला 15.15 लाख करोड़ रुपये के कथित रूप से बढ़ा-चढ़ाकर दिखाए गए राजस्व से जुड़ा है।

पूरा केस अब केवल 9 सवालों पर

समाचार एजेंसी से बातचीत में राजेश मेहता ने कहा कि सेबी का पूरा मामला अब सिर्फ नौ सवालों पर टिका हुआ है। उनके मुताबिक बीते ढाई वर्षों के दौरान नियामक ने जितने भी स्पष्टीकरण मांगे थे, उनमें से अधिकांश के जवाब कंपनी पहले ही दे चुकी है और अब केवल नौ बिंदुओं पर ही चर्चा शेष है।

मेहता ने जोर देकर कहा कि कंपनी के पास हर लेनदेन का पूरा रिकॉर्ड मौजूद है और एक-एक पैसे का हिसाब उपलब्ध है। उन्होंने आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि यह पूरा विवाद वित्तीय आंकड़ों की गलत व्याख्या का परिणाम है।

15.15 लाख करोड़ के राजस्व पर विवाद

कंपनी के अनुसार सबसे बड़ा विवाद 15.15 लाख करोड़ रुपये के राजस्व को लेकर है, जिसे सेबी ने कथित तौर पर बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया राजस्व करार दिया है। राजेश मेहता का दावा है कि यह पूरा मामला कंपनी की स्विट्जरलैंड स्थित सहायक इकाई वाल्कैम्बी के वित्तीय आंकड़ों को गलत तरीके से समझे जाने की वजह से खड़ा हुआ है।

सेबी के अंतरिम आदेश में कहा गया था कि वित्तीय वर्ष 2021 से 2025 के बीच विदेशी सहायक कंपनियों के जरिए राजेश एक्सपोर्ट्स ने अपने कंसोलिडेटेड राजस्व को 15.15 लाख करोड़ रुपये तक बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया। इस आरोप को नकारते हुए मेहता ने कहा कि रेगुलेटर ने वाल्कैम्बी के एबिटडा और वास्तविक कारोबार के आंकड़ों के संबंध में गलत निष्कर्ष निकाला है।

वाल्कैम्बी का कारोबार और सोने की प्रोसेसिंग

मेहता के अनुसार वाल्कैम्बी दुनिया के सबसे बड़े कीमती धातु रिफाइनिंग कारोबारों में से एक है। यह कंपनी हर साल करीब 900 टन कीमती धातुओं की प्रोसेसिंग करती है, जिसमें 300 टन टोल रिफाइनिंग और लगभग 600 टन धातुओं की खरीद, प्रोसेसिंग, ब्रांडिंग और वैश्विक बिक्री शामिल है।

उन्होंने बताया कि पांच वर्षों के दौरान करीब 3,000 टन सोने की प्रोसेसिंग की गई, जिसकी कुल कीमत लगभग 15.15 लाख करोड़ रुपये बैठती है। मेहता का कहना है कि इसी आंकड़े को लेकर पूरा विवाद उत्पन्न हुआ है।

विदेशी इकाइयों के दस्तावेजों पर आपत्ति

सेबी ने इस बात पर भी आपत्ति जताई थी कि विदेशी सहायक कंपनियों के वित्तीय दस्तावेज कंपनी की वेबसाइट पर उपलब्ध नहीं हैं। कंपनी का कहना है कि वह नियामक के सभी सवालों का जवाब उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर दे रही है।

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