उत्तर प्रदेश के महोबा जिले में पड़ रही भीषण गर्मी के बीच एक ऐसी तस्वीर सामने आई है जो व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है। जिला मुख्यालय से सिर्फ 6 किलोमीटर की दूरी पर बसा पूरा मुड़हरा गांव बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहा है। बुंदेलखंड के इस गांव की कहानी सरकारी दावों और जमीनी हकीकत के बीच के बड़े फासले को उजागर करती है।
हर घर नल योजना के दावों की खुल रही पोल
सदर तहसील के इस गांव में सरकार ने नमामि गंगे योजना के तहत पाइपलाइन बिछाई और पानी की टंकी भी खड़ी कर दी। करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद ये निर्माण सिर्फ दिखावा बनकर रह गए हैं। ढाई साल बीत जाने के बाद भी ग्रामीणों को पानी नसीब नहीं हुआ। ग्रामीणों के मुताबिक इन ढाई वर्षों में जो हुआ, वह केवल पानी की टेस्टिंग थी और उसके बाद से नलों ने एक बूंद पानी तक नहीं उगला।
तीन हैंडपंप और एक कुएं के भरोसे पूरा गांव
2 हजार से ज्यादा आबादी वाला यह गांव इस भीषण गर्मी में सिर्फ तीन हैंडपंपों और एक मंदिर के कुएं के सहारे जिंदगी काट रहा है। हालात यह हैं कि तीन में से दो हैंडपंपों का पानी इतना खारा है कि उसे पीना तो दूर, इस्तेमाल करना भी बीमारियों को न्योता देने जैसा है।
गांव के बाहर लगा इकलौता हैंडपंप ही अब प्यास बुझाने का एकमात्र जरिया बचा है। यहां दिनभर बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों की लंबी कतार लगी रहती है।
पानी की किल्लत ने रोकीं शादियां
पानी का यह संकट अब गांव के युवाओं के भविष्य पर भी भारी पड़ रहा है। गांव में करीब 30 से 40 ऐसे लड़के हैं, जिनकी शादी की उम्र हो चुकी है, लेकिन पानी की किल्लत देखकर कोई भी पिता अपनी बेटी को इस गांव में ब्याहने के लिए तैयार नहीं होता।
ग्रामीण बताते हैं कि जब रिश्तेदार आते हैं तो उन्हें नहाने के लिए पानी तक नहीं मिलता और उन्हें तालाब भेजना पड़ता है। शादी-ब्याह के मौकों पर रुपये खर्च करके बाहर से पानी के टैंकर मंगवाने पड़ते हैं।
महिलाओं की पूरी जिंदगी पानी ढोने में बीती
गांव की सुमित्रा, संतोषी और सुमन जैसी महिलाओं का दर्द है कि उनकी पूरी जिंदगी सिर्फ पानी ढोने में ही गुजर गई। अब उनके बच्चों की पढ़ाई भी इसी समस्या की भेंट चढ़ रही है, क्योंकि बच्चों का काफी समय पानी के इंतजाम में ही निकल जाता है।
जनप्रतिनिधियों के खिलाफ गहरा आक्रोश
स्थानीय प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के खिलाफ ग्रामीणों में भारी नाराजगी है। लोगों का आरोप है कि चुनाव के समय हाथ जोड़कर वोट मांगने वाले नेता जीतने के बाद गायब हो जाते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि सदर विधायक राकेश गोस्वामी जीतने के बाद पांच साल में एक बार भी उनकी सुध लेने नहीं आए।
हर घर जल का सरकारी दावा मुड़हरा गांव की जमीनी हकीकत के सामने पूरी तरह दम तोड़ चुका है, और ग्रामीण आज भी बुनियादी जरूरत पानी के लिए संघर्ष करने को मजबूर हैं।
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