अग्नि-6 का संभावित परीक्षण: बालासोर में तैयारियां अंतिम चरण में, भारत की सामरिक ताकत का नया अध्याय

ओडिशा के चांदीपुर स्थित एकीकृत परीक्षण रेंज से अग्नि-6 मिसाइल के संभावित परीक्षण की तैयारियां पूरी होने को हैं। 8,000 से 10,000 किलोमीटर की अनुमानित मारक क्षमता वाली यह परमाणु-सक्षम मिसाइल भारत की प्रतिरोधक शक्ति को नई धार देगी।

ओडिशा के बालासोर जिले में स्थित चांदीपुर के एकीकृत परीक्षण रेंज (ITR) में एक अहम मिसाइल परीक्षण की तैयारियां अपने अंतिम पड़ाव पर पहुंच चुकी हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, लॉन्च कॉम्प्लेक्स-3 (LC-3) से अग्नि-6 मिसाइल का परीक्षण किए जाने की संभावना है। इस संभावित परीक्षण को भारत की सामरिक क्षमता की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है, और क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े समीकरणों की निगाहें इस पर टिकी हुई हैं।

परीक्षण से पहले बड़े पैमाने पर एहतियात

परीक्षण को सुरक्षित तरीके से पूरा कराने के लिए जिला प्रशासन ने व्यापक स्तर पर सावधानी भरे इंतजाम किए हैं। लॉन्च पैड के आसपास 1 किलोमीटर से 3.5 किलोमीटर के दायरे में रहने वाले निवासियों और उनके पालतू जानवरों को अस्थायी रूप से सुरक्षित ठिकानों पर पहुंचाया गया है।

मंगलवार दोपहर तक प्रभावित इलाकों से करीब 11,442 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला जा चुका था। प्रशासन ने इन लोगों के ठहरने के लिए कई अस्थायी आश्रय केंद्र तैयार किए हैं।

लोगों के लिए बनाए गए आश्रय केंद्र

जिन अस्थायी आश्रय स्थलों पर लोगों को ठहराया गया है, उनमें बर्धनपुर बहुउद्देशीय चक्रवात केंद्र, बर्धनपुर हाई स्कूल, भीमपुर बहुउद्देशीय चक्रवात केंद्र, तुंद्रा बहुउद्देशीय चक्रवात केंद्र और निधिपाड़ा सेवाश्रम शामिल हैं। पूरे अभियान की निगरानी जिला प्रशासन और पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी कर रहे हैं।

रणनीतिक मायने

रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि लंबी दूरी की मिसाइल क्षमताएं किसी भी देश की रणनीतिक प्रतिरोधक शक्ति को और मजबूत बनाती हैं। इस तरह के परीक्षण भारत की रक्षा तैयारियों और तकनीकी सामर्थ्य को सामने लाते हैं। क्षेत्रीय नजरिये से इसे भारत की सुरक्षा नीति और सामरिक आत्मनिर्भरता के एक अहम संकेत के रूप में भी देखा जा रहा है।

विशेषज्ञों के अनुसार, अग्नि-6 में मल्टीपल इंडिपेंडेंटली टार्गेटेबल री-एंट्री व्हीकल तकनीक शामिल हो सकती है, जिसके जरिये एक ही मिसाइल कई अलग-अलग लक्ष्यों को निशाना बना सकेगी। यह क्षमता भारत की रणनीतिक सुरक्षा को नई मजबूती देने के साथ-साथ लंबी दूरी के खतरों के खिलाफ कारगर प्रतिरोधक शक्ति भी उपलब्ध कराएगी।

अग्नि-6 की खासियतें

परीक्षण से जुड़ी आधिकारिक तकनीकी जानकारी और नतीजों का अभी इंतजार रहेगा, लेकिन चांदीपुर में जारी विस्तृत तैयारियां इस ओर इशारा कर रही हैं कि देश की रक्षा व्यवस्था एक महत्वपूर्ण चरण की ओर बढ़ रही है।

अग्नि-6 को भारत की अगली पीढ़ी की लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल माना जाता है, जिसे देश की सामरिक प्रतिरोधक क्षमता को और सशक्त बनाने के मकसद से विकसित किया जा रहा है। यह मिसाइल परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम होगी और इसकी अनुमानित मारक क्षमता 8,000 से 10,000 किलोमीटर तक बताई जाती है।

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