यूपी पंचायत चुनाव की आहट तेज: अंतिम मतदाता सूची जारी, अब सरकार के निर्णय पर टिकीं निगाहें

राज्य निर्वाचन आयोग ने त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की अंतिम मतदाता सूची जारी कर तैयारियां पूरी कर ली हैं, जबकि ओबीसी आयोग आरक्षण पर रिपोर्ट बना रहा है। प्रधानों को प्रशासक बनाने और समय पर चुनाव न होने को लेकर हाईकोर्ट में याचिकाएं लंबित हैं और अब चुनाव की तारीखों का फैसला सरकार के हाथ में है।

उत्तर प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव का बेसब्री से इंतजार कर रहे करोड़ों लोगों के लिए अहम खबर सामने आई है। राज्य निर्वाचन आयोग ने चुनाव की अंतिम मतदाता सूची जारी कर दी है, जिसके बाद पूरे प्रदेश में चुनावी हलचल अचानक तेज हो गई है। आयोग ने अपने स्तर पर सारी तैयारियां पूरी कर ली हैं और अब निर्णय की जिम्मेदारी पूरी तरह राज्य सरकार पर आ गई है। राष्ट्रीय प्रधान संघ के अध्यक्ष डॉ. अखिलेश सिंह के बयान और हाईकोर्ट के सख्त रवैये को देखते हुए माना जा रहा है कि जल्द ही पंचायत चुनाव की तारीखों की घोषणा हो सकती है।

मतदाता सूची हुई फाइनल, प्रधान संघ ने रखी बात

राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा मतदाता सूची जारी किए जाने के बाद राष्ट्रीय प्रधान संघ के अध्यक्ष डॉ. अखिलेश सिंह की प्रतिक्रिया सामने आई है। उन्होंने बताया कि आयोग ने अपनी पूरी तैयारी कर ली है। दूसरी ओर, ओबीसी आयोग भी आरक्षण से जुड़ी अपनी रिपोर्ट तेजी से तैयार कर रहा है, ताकि चुनाव में आरक्षण की स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सके।

मतदाता सूची में बड़ा फेरबदल, 40 लाख से अधिक बढ़े मतदाता

राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार इस बार मतदाता सूची में जबरदस्त उलटफेर देखने को मिला है। दावों और आपत्तियों के निपटारे तथा पूरी छानबीन के बाद जारी की गई इस सूची में करीब 1.81 करोड़ नए मतदाता जोड़े गए हैं, जबकि 1.41 करोड़ मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं। इस तरह कुल मतदाताओं की संख्या में 40.19 लाख की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

हालांकि सूची जारी होने के बाद कई जिलों से तकनीकी दिक्कत के चलते मतदाता सूची डाउनलोड न हो पाने की शिकायतें भी आ रही हैं। उल्लेखनीय है कि इससे पहले आयोग ने 18 दिसंबर 2025 को भी एक सूची जारी की थी, लेकिन किन्हीं कारणों से इसकी तारीख को 5 बार आगे बढ़ाना पड़ा और आखिरकार 10 जून को यह अंतिम सूची जारी हो सकी।

इस बार मिलेगा 9 अंकों का विशेष पहचान नंबर

इस बार के पंचायत चुनाव में मतदाताओं के लिए एक बिल्कुल नई व्यवस्था लागू की जा रही है। नई गाइडलाइंस के तहत हर पंचायत मतदाता को 9 अंकों का एक नया राज्य वोटर पहचान नंबर दिया गया है। आयोग का मानना है कि इस अनूठी पहल से फर्जी मतदान पर तो रोक लगेगी ही, साथ ही चुनाव प्रबंधन और मतदाताओं की पहचान की प्रक्रिया भी पहले की तुलना में कहीं अधिक सरल और व्यवस्थित हो जाएगी।

हाईकोर्ट में क्यों अटका है मामला

दरअसल, यूपी में पंचायत चुनाव समय पर न होने के कारण यह मामला फिलहाल हाईकोर्ट में है। बीते दिनों हाईकोर्ट ने समय पर चुनाव न कराए जाने को लेकर राज्य निर्वाचन आयोग से जवाब भी तलब किया था। चुनाव टलने की एक बड़ी वजह ओबीसी आरक्षण का मसला भी है, जिस पर ओबीसी आयोग अपनी रिपोर्ट तैयार कर रहा है। अब जब निर्वाचन आयोग ने मतदाता सूची जारी कर अपनी तैयारी पूरी होने का हलफनामा दे दिया है, तो माना जा रहा है कि हाईकोर्ट सरकार का पक्ष सुनने के बाद इस पर कोई बड़ा और अंतिम फैसला सुना सकता है।

इतिहास में पहली बार प्रधान बने ‘प्रशासक’

चुनाव में हो रही देरी को देखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने पहली बार एक ऐतिहासिक निर्णय लिया है। सरकार ने ग्राम प्रधानों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद उन्हें ही अगले 6 महीने के लिए ‘प्रशासक’ नियुक्त कर दिया है। सरकार के इस कदम के विरोध में और समय पर चुनाव कराने की मांग को लेकर हाईकोर्ट में कई याचिकाएं भी दायर की गई हैं। अब आयोग की इस अंतिम तैयारी के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि सरकार जल्द ही कोई बड़ा फैसला लेगी और प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव का बिगुल बज जाएगा।

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