पन्ना के घने जंगलों के बीच सबसे ऊंची मुनियागढ़ पहाड़ियों पर पूरी मजबूती के साथ खड़ा ओबेरॉय राजगढ़ पैलेस अपनी भव्यता, वास्तुकला और इतिहास के लिए जाना जाता है। कभी बुंदेला राजाओं की शान रहे इस महल की विरासत को अब ओबेरॉय होटल ने संभालकर जीवंत बनाए रखा है। खजुराहो के नजदीक होने के कारण यह दुनिया भर के सैलानियों के लिए आकर्षण का बड़ा केंद्र बना रहता है।
फ्रांसीसी पुरस्कार में मिली अंतरराष्ट्रीय पहचान
फ्रांस के प्रतिष्ठित पुरस्कार कार्यक्रम प्रिक्स वर्साय ने खजुराहो स्थित ओबेरॉय राजगढ़ पैलेस को वर्ष 2026 के विश्व के सबसे खूबसूरत होटलों की सूची में शामिल किया है। पूरी दुनिया से इस सूची में सिर्फ 16 होटलों को चुना गया है, जिसमें भारत ने अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई है।
यह सम्मान केवल होटल की शानदार वास्तुकला और बेहतरीन डिजाइन का ही प्रमाण नहीं है, बल्कि इसके समृद्ध इतिहास, सांस्कृतिक विरासत और अनूठे आतिथ्य को भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिली पहचान है। पैलेस में बारीक नक्काशीदार पत्थर, ऊंचे मेहराब और विशाल आंगन बुंदेली राजाओं के ठाट-बाट को आज भी जीवंत बनाते हैं।
राजगढ़ पैलेस की खासियत
राजगढ़ पैलेस खजुराहो के पास पन्ना की ऊंची पहाड़ियों पर स्थित है। घने जंगल और झील के कारण यहां की प्राकृतिक सुंदरता अपने आप में भव्य है और यहां से पन्ना के प्राकृतिक नजारे बेहद खूबसूरत दिखाई देते हैं। करीब 350 साल पुराने इस महल को अब ओबेरॉय होटल एंड रिजॉर्ट का रूप दे दिया गया है।
इस पैलेस की एक-एक दीवार को इतनी बारीकी और भव्यता से नक्काशीदार बनाया गया है कि हर किसी का ध्यान अपनी ओर खींच लेती है। इसके मूल ढांचे और वास्तुकला को संरक्षित रखते हुए इसे आधुनिक सुख-सुविधाओं से सजाया गया है। इसमें बुंदेली राजशाही के वैभव की छाप साफ झलकती है, यही वजह है कि प्रिक्स वर्साय में इसे राजसी भव्यता का प्रमाण माना गया।
यह पूरा परिसर 76 एकड़ में फैला हुआ है, जिसमें 65 बड़े कमरे और सुइट्स हैं। इसकी सादगीपूर्ण लेकिन सुरुचिपूर्ण सजावट, राखी-धूसर रंग के चंदेरी पर्दे और ओबेरॉय परिवार के निजी संग्रह से चुनी गई लिथोग्राफ कलाकृतियां इसकी सुंदरता में चार चांद लगाती हैं।
यह परिसर दो हिस्सों में बंटा है। निचले हिस्से के बगीचों में साल और पलाश के पेड़ों की छांव के बीच गार्डन रूम बने हैं, वहीं पहाड़ी की ऊंचाई पर बने मुख्य महल में 17 कमरे और सुइट्स हैं, जिन्हें कभी चंदेला शासकों के निजी कक्षों के रूप में इस्तेमाल किया जाता था।
महल के चार पैलेस रूम आकार में अपेक्षाकृत छोटे हैं, लेकिन उनकी खूबसूरती और सुविधाएं उन्हें बेहद खास बनाती हैं। इनमें खुले आसमान के नीचे बने बाथटब, निजी टैरेस और पन्ना राष्ट्रीय उद्यान के शानदार नजारे शामिल हैं। सबसे ऊपर स्थित कोहिनूर सुइट इस शाही अनुभव का शिखर है, जिसमें दो बेडरूम, निजी स्विमिंग पूल, बगीचा, टैरेस और अद्भुत प्राकृतिक दृश्य मौजूद हैं। इसमें ठहरने का एक दिन का किराया 11 लाख से ज्यादा है।
मस्तानी से क्या है संबंध
मस्तानी महाराजा छत्रसाल की बेटी और बाजीराव पेशवा की दूसरी पत्नी थीं। महाराजा छत्रसाल ने 18वीं सदी में मुगलों की बची-खुची सेना को हराकर अपना स्वतंत्र शासन कायम किया और बुंदेलखंड में एक स्वतंत्र राज्य की स्थापना की। उनके शासनकाल में पन्ना और खजुराहो का पूरा इलाका बुंदेलखंड के अंतर्गत आता था।
17वीं शताब्दी के आखिर में महाराजा छत्रसाल के परपोते बुंदेला राजा हिंदूपत सिंह ने पन्ना राष्ट्रीय उद्यान के घने जंगलों और दुर्गम मनियागढ़ पहाड़ियों के बीच राजगढ़ को एक अभेद्य किले के रूप में स्थापित किया। घने जंगल और पहाड़ियों के बीच होने के कारण यह किला दुश्मनों की नजरों से छिपा रहता था और पन्ना रियासत के लिए एक मजबूत सुरक्षा कवच का काम करता था। बाद में इसे धीरे-धीरे एक भव्य पैलेस के रूप में विकसित किया गया।
राजगढ़ के इस वैभवशाली ढांचे में चंदेल और बुंदेला स्थापत्य कला का अनूठा मेल दिखता है। हिंदूपत सिंह ने इस महल के एक मुख्य द्वार का नाम मस्तानी के नाम पर रखा, जो आज भी इस महल के वैभव का प्रतीक माना जाता है। होटल और रिजॉर्ट बन जाने के बाद भी यह ऐतिहासिक विरासत आज तक कायम है।
आज भी कायम है शाही वैभव
ओबेरॉय समूह ने उस ऐतिहासिक दौर की विरासत को बेहद सावधानी और सम्मान के साथ संजोकर रखा है। महल में प्रवेश कचहरी के रास्ते से होता है, जो कभी प्रशासनिक कार्यालय हुआ करता था। अब यह ऐतिहासिक खंडहर गुलाबी बोगनवेलिया के फूलों से सजा है और विरासत तथा प्राकृतिक सुंदरता का अनोखा संगम प्रस्तुत करता है। इसे भारत के सबसे आकर्षक चेक-इन स्थलों में से एक माना जाता है।
आगे बढ़ने पर दरबार हॉल आता है, जो आठ खूबसूरत और भव्य स्तंभों पर टिका हुआ है। सदियों बाद भी इन स्तंभों की शान और गरिमा वैसी ही बनी हुई है, मानो वे आज भी अपने गौरवशाली इतिहास की कहानी सुना रहे हों। महल के आंगन में फव्वारे की मधुर ध्वनि के बीच स्थित अमरवा बार शाम की चाय यानी हाई टी के लिए एक बेहतरीन जगह है। सूर्यास्त के समय यहां कभी-कभी कथक नृत्य की प्रस्तुति भी होती है, जो पूरे अनुभव को और भी यादगार बना देती है।
झील किनारे बना नीरांगना कॉरिडोर कुदरत का अनमोल वरदान है। यहां का खास रेस्तरां मान्या प्रसिद्ध खाद्य इतिहासकार पुष्पेश पंत और शेफ विजय साही के सहयोग से तैयार किया गया है, जिसमें कपूरथला से लेकर त्रावणकोर तक के स्वाद का संगम मिलता है। इन मेन्यू के जरिए भारतीय राजघरानों के असली खानपान और उनकी मेहमाननवाजी की परंपराओं को नए अंदाज में पेश किया जाता है।
प्रिंसली स्टेट्स नामक मेन्यू मेहमानों को भारत की विभिन्न रियासतों की शाही रसोइयों की यात्रा पर ले जाता है, जिसमें कपूरथला से त्रावणकोर तक के राजघरानों के व्यंजनों का स्वाद और इतिहास एक साथ परोसा जाता है। हल्के नाश्ते के शौकीनों के लिए झील किनारे स्थित नीरांगना एक खास अनुभव प्रदान करता है।
ठहरने का किराया कितना
राजगढ़ पैलेस में एक रात ठहरने की शुरुआती कीमत लगभग 40,000 रुपये है, वहीं सबसे आलीशान कोहिनूर सुइट का किराया 11 लाख रुपये से अधिक तक पहुंच सकता है। प्रिक्स वर्साय ने जिस बात को सम्मानित किया है, उसे यहां आने वाला हर व्यक्ति जल्दी ही महसूस कर सकता है।
राजगढ़ केवल एक आलीशान पैलेस नहीं है, बल्कि यह एक ऐसी जगह है जहां वास्तुकला, प्राकृतिक परिवेश, इतिहास और आतिथ्य को बेहद समझदारी, संवेदनशीलता और सावधानी के साथ एक-दूसरे में पिरोया गया है। यही कारण है कि ओबेरॉय राजगढ़ पैलेस भारत की शाही विरासत, सांस्कृतिक समृद्धि और आधुनिक विलासिता का अद्वितीय संगम महसूस कराता है।
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