सब्जी मंडी में भिंडी की कीमत काफी हद तक उसके सीधे आकार, गहरे हरे रंग और ताजगी पर टिकी होती है। खरीदार वही भिंडी पसंद करते हैं जो देखने में आकर्षक और चमकदार हो। लेकिन कई बार फसल में फल टेढ़े-मेढ़े निकलने लगते हैं और उनकी प्राकृतिक चमक गायब हो जाती है, जिसके चलते किसानों को बाजार में अच्छा भाव नहीं मिल पाता और भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है।
समस्या की असली जड़ क्या है
फसल सुरक्षा वैज्ञानिक डॉ. हादी हुसैन खान बताते हैं कि भिंडी के फलों के बेडौल होने और उनकी चमक खोने के पीछे दो मुख्य कारण होते हैं। पहला कारण है सिस्टोडिया और थ्रिप्स जैसे रस चूसने वाले कीट, जो पौधे का रस खींचकर फल के विकास को बिगाड़ देते हैं। दूसरा बड़ा कारण है मिट्टी में बोरॉन और कैल्शियम जैसे जरूरी पोषक तत्वों की कमी, जिससे फल सही आकार नहीं ले पाते।
बचाव और सुधार के 4 कारगर उपाय
विशेषज्ञ के अनुसार कुछ सरल और वैज्ञानिक तरीके अपनाकर किसान अपनी भिंडी की फसल को दोबारा सीधा, स्वस्थ और चमकदार बना सकते हैं।
- सही सिंचाई: खेत में नमी का संतुलन बनाए रखना जरूरी है, ताकि पौधों को पोषक तत्व आसानी से मिल सकें और फलों का विकास सही ढंग से हो।
- नीम के तेल का छिड़काव: रस चूसने वाले कीटों, खासकर थ्रिप्स पर नियंत्रण के लिए नीम का तेल एक असरदार और प्राकृतिक उपाय है।
- बोरॉन का छिड़काव: मिट्टी और फसल में बोरॉन की कमी पूरी करने के लिए इसका छिड़काव करने से फल टेढ़े होने की समस्या काफी हद तक दूर होती है।
- कैल्शियम की पूर्ति: कैल्शियम की कमी दूर करने से फलों का आकार सुधरता है और उनमें प्राकृतिक चमक लौट आती है।
किसानों को क्या फायदा
इन आसान वैज्ञानिक उपायों को समय रहते अपनाकर किसान न सिर्फ अपनी फसल को कीटों के हमले और पोषक तत्वों की कमी से बचा सकते हैं, बल्कि सीधी और चमकदार भिंडी पैदा कर मंडी में बेहतर दाम भी हासिल कर सकते हैं।
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