रांची की किरण ने 60 की उम्र में खड़ा किया 'जयपुरी कलेक्शन', सालाना कमाई 14 लाख के पार

झारखंड की राजधानी रांची की किरण ने 40 साल की उम्र में साड़ी का कारोबार शुरू किया और आज 'जयपुरी कलेक्शन' नाम से अपना ब्रांड चला रही हैं, जिससे उनकी सालाना कमाई 14 लाख रुपये से ऊपर है।

जिस उम्र में ज्यादातर लोग नौकरी से रिटायर होकर आराम की जिंदगी चुनते हैं, उसी पड़ाव पर रांची की किरण ने एक नई शुरुआत कर दिखाई। झारखंड की राजधानी रांची की रहने वाली किरण ने 60-65 की उम्र में अपना साड़ी का ब्रांड खड़ा किया है, जिसका नाम 'जयपुरी कलेक्शन' है। इस ब्रांड के तहत वह खास तौर पर सिर्फ जयपुर के मशहूर डिजाइन और फैब्रिक से जुड़ी साड़ियां तैयार करवाने का काम करती हैं।

40 की उम्र में शुरू किया सफर

किरण के कारीगर उनके लिए साड़ियां बनाकर देते हैं और इनके सभी डिजाइन बेहद यूनिक होते हैं। उन्होंने 40 साल की उम्र में यह काम शुरू किया था और आज हालत यह है कि उनकी सालाना कमाई 14 लाख रुपये से ऊपर पहुंच चुकी है।

किरण ने बताया कि उन्होंने करीब 20-25 साल पहले यह काम शुरू किया था। उस वक्त उन्हें अंदाजा भी नहीं था कि उनका कारोबार इस स्तर तक पहुंच जाएगा। आज उनके साथ 20 से 25 लोग काम करते हैं।

दुल्हनों की पसंद बनी दोजा सिल्क साड़ी

किरण बताती हैं कि उनके पास जयपुर कलेक्शन की साड़ियों से लेकर घाटचोला लहंगा, सलवार सूट और भी बहुत कुछ देखने को मिलता है। खास तौर पर दोजा सिल्क साड़ी, जिस पर पूरा फैब्रिक गोल्डन रंग से तैयार किया गया है। देखने में ऐसा लगता है मानो पल्लू सोने का बना हो। इस तरह की साड़ियां खासकर दुल्हनें पसंद करती हैं। इन साड़ियों की कीमत 5000 से 8000 रुपये तक होती है।

बंदेज़ डिजाइन का सलवार सूट सबसे हिट

इसके अलावा उनके पास जयपुरी सिल्क में कई तरह के सलवार सूट भी मौजूद रहते हैं, जिनमें बंदेज़ डिजाइन सबसे ज्यादा लोकप्रिय है। किरण के मुताबिक, एक बार जो ग्राहक उनसे खरीदारी करता है, वह बार-बार लौटकर आता है। इसकी वजह यह है कि उनकी स्टिचिंग की क्वालिटी बड़े-बड़े ब्रांड को टक्कर देती है।

देशभर में 5000 से ज्यादा स्थायी ग्राहक

किरण ने स्टिचिंग और फैब्रिक — इन दो चीजों पर पूरी पकड़ बना रखी है। यही वजह है कि आज पूरे देश में उनके 5000 से अधिक पेटेंट (स्थायी) ग्राहक हैं। वह बताती हैं कि उनके बच्चे अब बड़े हो चुके हैं और सबसे अच्छी बात यह है कि बच्चे भी कमा रहे हैं, लेकिन वह अपने बच्चों से भी ज्यादा कमाई कर रही हैं।

इस उम्र में भी खुद हैं 'बॉस'

किरण कहती हैं कि अब उन्हें किसी पर निर्भर रहने या किसी से एक रुपया मांगने की जरूरत नहीं है। उल्टा, पर्व और त्योहार पर वह खुद अपने बच्चों को गिफ्ट देकर आती हैं। उन्हें इस बात का बड़ा गर्व महसूस होता है कि इस उम्र में भी वह खुद अपनी मालकिन यानी 'बॉस' हैं।

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