सहकारी बैंक के डिप्टी मैनेजर पर गिरी गाज, ₹68 करोड़ के फर्जी खाते का खुलासा, 159 लोगों से ठगी में गिरफ्तार

दिल्ली पुलिस की साइबर सेल ने नेशनल अर्बन कोऑपरेटिव बैंक के डिप्टी मैनेजर को गिरफ्तार किया है, जिसने नियमों को दरकिनार कर एक फर्जी खाता खुलवाया। इसी एक खाते के जरिए साइबर ठगों ने देशभर के 159 लोगों से करीब ₹68 करोड़ की ठगी की।

दिल्ली पुलिस की साइबर सेल ने एक सहकारी बैंक के डिप्टी मैनेजर को सलाखों के पीछे पहुंचा दिया है। आरोप है कि उसने बैंक की सख्त प्रक्रियाओं को अनदेखा करते हुए एक फर्जी खाता खुलवा दिया। इसी अकेले खाते का सहारा लेकर साइबर अपराधियों ने देशभर के 159 लोगों को अपना निशाना बनाया और उनसे करीब ₹68 करोड़ की रकम ठगकर पूरा पैसा इसी खाते में जमा कराया। जांच एजेंसी ने आरोपी के पास से दो मोबाइल फोन बरामद किए हैं। अब पुलिस इस गिरोह से जुड़े बाकी सहयोगियों, ठगी की रकम हड़पने वाले मुख्य आरोपियों और बैंक के अन्य संदिग्धों तक पहुंचने में जुटी है।

मामला सामने कैसे आया

डीसीपी ईस्ट के अनुसार, नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर अलग-अलग राज्यों से आई शिकायतों की पड़ताल के दौरान एक हैरान कर देने वाली कड़ी पकड़ में आई। देश के विभिन्न हिस्सों से ठगा गया पैसा घूम-फिरकर दिल्ली के न्यू कोंडली इलाके में स्थित नेशनल अर्बन कोऑपरेटिव बैंक के एक खास खाते में पहुंच रहा था। इसके बाद ईस्ट दिल्ली के डीसीपी राजीव कुमार ने साइबर थाने के इंस्पेक्टर पवन यादव और सब-इंस्पेक्टर विनय कुमार की अगुवाई में एक विशेष टीम गठित की। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया और जैसे ही इस खाते की पूरी जानकारी खंगाली गई, परत-दर-परत पूरा खेल सामने आता चला गया।

किसी और की पहचान का दुरुपयोग

डीसीपी से मिली जानकारी के मुताबिक, बैंक के रिकॉर्ड में यह खाता महाकाल एंटरप्राइजेज नाम की एक कंपनी के लिए खोला गया दिखाया गया था और इसे शैलेंद्र कुमार यादव नाम के व्यक्ति के नाम पर दर्ज किया गया था। जब पुलिस ने शैलेंद्र को तलाश कर उससे पूछताछ की तो उसने बताया कि उसने ऐसी किसी कंपनी या खाते के लिए कभी कोई आवेदन ही नहीं दिया। न तो वह कभी इस बैंक की शाखा में गया और न ही उसने किसी फॉर्म पर हस्ताक्षर किए। पुलिस की जांच और दस्तावेजों के मिलान से यह स्पष्ट हो गया कि इस पूरी ठगी में शैलेंद्र की कोई भूमिका नहीं है। दरअसल किसी शातिर अपराधी ने उसके असली पहचान दस्तावेजों का गलत इस्तेमाल किया और फॉर्म पर उसके नकली हस्ताक्षर कर यह खाता चालू करा लिया। इसके बाद जब बैंक के अंदरूनी कागजात की पड़ताल हुई तो साफ हुआ कि इस फर्जी खाते को खोलने और उसे मंजूरी देने की पूरी जिम्मेदारी बैंक के डिप्टी मैनेजर पवित्र कुमार बिसवाल पर थी।

पूछताछ में आरोपी का कबूलनामा

हिरासत में लेकर जब पुलिस ने डिप्टी मैनेजर पवित्र कुमार से सवाल-जवाब किए तो उसने अपनी बड़ी चूक और लापरवाही स्वीकार कर ली। उसने माना कि महाकाल एंटरप्राइजेज नाम की फर्म की पड़ताल के लिए उसने कोई फिजिकल वेरिफिकेशन यानी मौके पर जाकर जांच नहीं की थी। कागजों में दर्ज पते पर वह कभी पहुंचा ही नहीं और बिना उचित पहचान प्रक्रिया, बिना जरूरी कस्टमर ड्यू डिलिजेंस तथा अनिवार्य सत्यापन के ही खाते को मंजूरी दे दी।

नियमों की अनदेखी पड़ी भारी

जांच में यह बात उभरकर सामने आई कि बैंकिंग व्यवस्था में धोखाधड़ी रोकने के लिए बनाए गए सुरक्षा नियमों और कानूनी दिशा-निर्देशों को डिप्टी मैनेजर ने पूरी तरह नजरअंदाज किया। इसी लापरवाही और मिलीभगत के चलते अपराधियों के हाथ एक 'म्यूल अकाउंट' यानी फर्जी खाता लग गया, जिसका इस्तेमाल कर उन्होंने बेखौफ होकर ₹67.92 करोड़ का भारी लेन-देन कर डाला। इसके बाद पुलिस ने आरोपी पवित्र कुमार बिसवाल को गिरफ्तार कर लिया।

आरोपी के बारे में जानकारी

आरोपी डिप्टी मैनेजर पवित्र कुमार बिसवाल की उम्र 42 साल है और वह जनता फ्लैट्स, मयूर विहार फेज-3, दिल्ली का रहने वाला है। फिलहाल वह नेशनल अर्बन कोऑपरेटिव बैंक में डिप्टी मैनेजर के पद पर कार्यरत था। पुलिस के अनुसार इससे पहले वह किसी आपराधिक मामले में शामिल नहीं रहा है। मामले की जांच अब भी जारी है और पुलिस इस नेटवर्क से जुड़े दूसरे सहयोगियों, ठगी का पैसा हड़पने वाले मुख्य आरोपियों तथा बैंक के अन्य संदिग्धों की तलाश में लगी हुई है।

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