झारखंड राज्यसभा चुनाव का पूरा गणित: नाथवानी के मुकाबले क्यों मुश्किल में प्रणव झा, बढ़ी कांग्रेस की चिंता

झारखंड में राज्यसभा की दो सीटों के लिए त्रिकोणीय मुकाबला रोचक मोड़ पर है। भाजपा के समर्थन से निर्दलीय परिमल नाथवानी की राह आसान दिख रही है, जबकि महज 16 विधायकों वाली कांग्रेस के प्रणव झा के सामने जीत का आंकड़ा जुटाने की कड़ी चुनौती है।

झारखंड में राज्यसभा चुनाव का पूरा समीकरण भाजपा के रणनीतिक कदम और कांग्रेस की भीतरी मुश्किलों के कारण बेहद दिलचस्प मोड़ पर आ पहुंचा है। कांग्रेस की कड़ी आपत्ति और विरोध के बावजूद निर्दलीय प्रत्याशी परिमल नाथवानी की उम्मीदवारी का रास्ता अब साफ हो गया है। निर्वाचन अधिकारी ने उनकी ओर से दिए गए लिखित स्पष्टीकरण और जवाबों से संतुष्ट होकर उनके नामांकन को मंजूरी दे दी है।

तकनीकी अड़चन दूर होते ही राज्य की दो सीटों के लिए होने वाला मुकाबला त्रिकोणीय और रोमांचक हो चला है। मैदान में झामुमो के बैद्यनाथ राम, कांग्रेस के प्रणव झा और भाजपा समर्थित निर्दलीय परिमल नाथवानी आमने-सामने हैं। 18 जून को होने वाली वोटिंग से पहले राज्य में सियासी शह-मात का खेल तेज हो गया है, क्योंकि भाजपा ने अपना आधिकारिक उम्मीदवार न उतारकर नाथवानी को खुला समर्थन दे दिया है, जिससे चुनावी समीकरण पूरी तरह पलट गए हैं।

जीत के लिए जरूरी जादुई आंकड़ा

मतदान से पहले राज्य का मौजूदा दलीय गणित और जीत का समीकरण सबसे अहम पहलू है। झारखंड विधानसभा में कुल 81 निर्वाचित सीटें हैं। वर्तमान में खाली या निलंबित सीटों को हटाकर प्रभावी संख्या के आधार पर राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए हर उम्मीदवार को प्रथम वरीयता के कम से कम 27 से 28 विधायकों के वोट चाहिए होंगे। चूंकि दो सीटों पर चुनाव है, इसलिए कुल दो ही उम्मीदवार निर्वाचित होकर संसद पहुंचेंगे।

झामुमो की पहली सीट सुरक्षित

सत्तारूढ़ झारखंड मुक्ति मोर्चा के पास विधानसभा में सबसे ज्यादा विधायक हैं। पार्टी ने बैद्यनाथ राम को अपना उम्मीदवार बनाया है। झामुमो के पास अपने दम पर 27 से अधिक विधायकों का मजबूत आंकड़ा मौजूद है, जिसके चलते बैद्यनाथ राम की जीत पूरी तरह तय मानी जा रही है। इस तरह पहली सीट झामुमो आसानी से अपने नाम कर लेगा।

दूसरी सीट पर असली पेंच

असली टक्कर दूसरी सीट को लेकर भाजपा समर्थित निर्दलीय परिमल नाथवानी और कांग्रेस के प्रणव झा के बीच फंसी हुई है। नाथवानी का गणित भाजपा के साथ जुड़ा है। भाजपा के पास विधानसभा में सहयोगियों समेत करीब 26 से 32 विधायकों का ब्लॉक है, जबकि उसने अपनी ओर से कोई उम्मीदवार खड़ा नहीं किया है। यदि भाजपा अपने सभी विधायकों के वोट निर्दलीय नाथवानी को ट्रांसफर कर देती है, तो वे सीधे तौर पर जीत के 27-28 वोट के जादुई आंकड़े को पार कर जाएंगे।

प्रणव झा के सामने कठिन चुनौती

कांग्रेस के पास अपने केवल 16 विधायक हैं। जीत के लिए जरूरी 27-28 वोट तक पहुंचने के वास्ते पार्टी को झामुमो के बचे हुए अतिरिक्त वोट, राष्ट्रीय जनता दल तथा अन्य छोटे दलों या निर्दलीय विधायकों के समर्थन की सख्त दरकार है।

16 विधायकों को एकजुट रखने की परीक्षा

कांग्रेस के लिए राह इसलिए भी मुश्किल है क्योंकि पार्टी को न केवल बाहर से 11-12 अतिरिक्त वोट जुटाने हैं, बल्कि अपने 16 विधायकों को भी पूरी तरह एकजुट रखना है। झारखंड के राजनीतिक इतिहास में राज्यसभा चुनावों के दौरान क्रॉस वोटिंग और विधायकों की नाराजगी का पुराना रिकॉर्ड रहा है। ऐसे में नाथवानी जैसे मजबूत निर्दलीय प्रत्याशी की मौजूदगी में कांग्रेस खेमे को अपने ही कुनबे में सेंधमारी का बड़ा डर सता रहा है।

यदि कांग्रेस का एक भी विधायक पाला बदलता है या कोई वोट अमान्य हो जाता है, तो प्रणव झा की बची-खुची उम्मीदें भी खत्म हो जाएंगी। हालांकि अगर कांग्रेस सोच-समझकर रणनीतिक चाल चलती है, तो प्रणव झा की जीत की उम्मीद बनी रह सकती है।

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