बालाघाट जिला करीब 35 साल तक लाल आतंक की छाया में रहा है। यहां नक्सलवाद सिर्फ हिंसा की कहानी भर नहीं रहा, बल्कि इसने इलाके को विकास और बुनियादी सुविधाओं से भी कोसों दूर कर दिया। डर और दहशत के इस माहौल में नक्सल प्रभावित क्षेत्रों तक तरक्की कभी पहुंच ही नहीं पाई।
इन इलाकों में स्कूल तो खुले, मगर शिक्षक ज्यादा समय तक टिक नहीं पाए। जो शिक्षक रुके भी, तो जागरूकता की कमी के कारण बच्चे स्कूल तक नहीं पहुंच सके। दूसरी ओर सरकार ने भी इन स्कूलों की हालत सुधारने पर ध्यान नहीं दिया। नतीजा यह हुआ कि कई स्कूल जर्जर हो गए, जहां पढ़ने जाना जान जोखिम में डालने जैसा था। इसी वजह से बालाघाट के सैकड़ों स्कूल बदहाली की स्थिति में पहुंच गए। लेकिन अब इस तस्वीर में बदलाव दिख रहा है, और पुलिस प्रशासन की पहल से नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के स्कूलों की सूरत बदलने लगी है।
जर्जर स्कूलों से परेशान थे ग्रामीण
गांवों से अक्सर यही शिकायत आती थी कि स्कूल जर्जर हालत में हैं। बच्चे टूटी-फूटी छतों के नीचे खौफ के साये में पढ़ाई करने को मजबूर थे। ऐसे में ग्रामीण बार-बार स्कूलों की मरम्मत की मांग लेकर जिला मुख्यालय पहुंचते और सुधार की गुहार लगाते थे।
पुलिस प्रशासन ने उठाया बीड़ा
बालाघाट एसपी ने नक्सलवाद के खात्मे के बाद विद्यांजलि प्रोजेक्ट के तहत 280 स्कूलों को चिह्नित किया, जहां मरम्मत और रंगाई-पुताई का काम कराया गया। खास बात यह रही कि इस प्रोजेक्ट के लिए आम लोगों ने ही फंड जुटाया। इस पहल में कुल तीन करोड़ 90 लाख रुपए जमा हुए। मरम्मत का काम पुलिस के जवानों ने खुद अपने हाथों से किया।
अब दावा किया जा रहा है कि नक्सलवाद के खात्मे की डेडलाइन तक सभी स्कूलों का जीर्णोद्धार पूरा कर लिया जाएगा। एसपी आदित्य मिश्रा ने बताया कि बीते साल 267 स्कूलों की मरम्मत कराई गई, और यह काम तय की गई लागत से कम खर्च में पूरा हुआ।
नया प्रोजेक्ट, जिसमें हर कोई बनेगा भागीदार
बालाघाट पुलिस अधीक्षक आदित्य मिश्रा ने लोकल 18 से बातचीत में बताया कि अब विद्यांजलि 2.0 प्रोजेक्ट की शुरुआत होने जा रही है। उन्होंने बताया कि पिछली बार स्कूलों को गोद लिया जाता था, लेकिन इस बार आम जनता भी इस मुहिम का हिस्सा बन सकेगी। विद्यांजलि पोर्टल के जरिए कोई भी व्यक्ति 1 रुपए से लेकर अपनी क्षमता के अनुसार दान कर सकेगा, जिससे अंचल के स्कूलों की तस्वीर बदलने की तैयारी होगी।
फर्नीचर से लेकर कॉपी-किताब तक कर सकेंगे दान
बालाघाट के स्कूलों के विकास में जनभागीदारी के रूप में आम लोग भी अपना योगदान दे सकेंगे। इसमें लोग सिर्फ रुपए ही नहीं, बल्कि जरूरी सामग्री भी दान कर सकेंगे। ग्रामीण अंचल के लिए कॉपी, पेन, किताब, बेंच और डेस्क समेत कई चीजें दी जा सकेंगी।
इस पहल से स्कूलों का विकास तो होगा ही, साथ ही बेहतर माहौल मिलने पर बच्चों का मानसिक और शारीरिक विकास भी सुनिश्चित होगा।
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