राजस्थान में इन दिनों प्रसूताओं की सेहत को लेकर गंभीर संकट खड़ा हो गया है। कोटा में पांच प्रसूताओं की मौत के बाद अब बीकानेर में 6 प्रसूताओं की किडनी फेल होने का मामला उजागर हुआ है। इस सबके बीच सबसे बड़ा सवाल अब भी अनसुलझा है कि आखिर कोटा में इन महिलाओं की जान किस वजह से गई। इसी सवाल पर राज्य के स्वास्थ्य मंत्री गजेन्द्र सिंह खीमसर और कमिश्नर ड्रग कंट्रोल टी सुमंगला के दावे एक-दूसरे से बिल्कुल अलग हैं, जिससे यह तय करना मुश्किल हो गया है कि किसकी बात पर भरोसा किया जाए।
स्वास्थ्य मंत्री का दावा : खून बहने से हुई मौत
स्वास्थ्य मंत्री गजेन्द्र सिंह खीमसर के अनुसार कोटा में डिलीवरी के बाद महिलाओं को टोसिन इंजेक्शन दिया गया था, जिसमें ऑक्सीटोसीन दवा होती है। यह इंजेक्शन ब्लीडिंग को रोकने का काम करता है। मंत्री का कहना है कि इन इंजेक्शनों में दवा थी ही नहीं, उनमें सिर्फ पानी था। यही वजह रही कि ये इंजेक्शन महिलाओं की ब्लीडिंग को नहीं रोक सके। इसी आधार पर खीमसर यह मानते हैं कि प्रसूताओं की मौत अधिक खून बह जाने के कारण हुई।
मंत्री ने यह भी बताया कि ये इंजेक्शन लोकल परचेज के तहत खरीदे गए थे। उनके मुताबिक कोई भी अस्पताल 20 से 25 फीसदी तक की खरीद स्थानीय स्तर पर कर सकता है।
ड्रग कंट्रोल कमिश्नर का अलग दावा
इसके उलट, कुछ दिन पहले ही स्वास्थ्य विभाग की ड्रग कंट्रोल कमिश्नर टी सुमंगला ने कहा था कि कोटा में महिलाओं को दिए गए टोसिन इंजेक्शन में ऑक्सीटोसीन दवा मौजूद नहीं थी, लेकिन इन इंजेक्शनों की वजह से किसी भी महिला की मौत नहीं हुई। उन्होंने बताया कि जिन पांच महिलाओं की मौत हुई, उन्हें ब्लीडिंग रोकने के लिए फर्स्ट लाइन ड्रग के रूप में टोसिन इंजेक्शन दिए गए थे।
सुमंगला के अनुसार आमतौर पर इन इंजेक्शनों के बाद ब्लीडिंग रोकने के लिए कुछ अन्य दवाएं भी दी जाती हैं, मगर कोटा में इन महिलाओं को टोसिन इंजेक्शन के अलावा ब्लीडिंग रोकने वाली कोई और दवा नहीं दी गई थी।
सिर्फ एक महिला को थी अधिक ब्लीडिंग
कमिश्नर का तर्क है कि यदि महिलाओं की मौत अधिक ब्लीडिंग के कारण होती, तो उन्हें ब्लीडिंग रोकने वाली दूसरी दवाएं भी दी जातीं, लेकिन उनकी जरूरत ही नहीं पड़ी। टी सुमंगला के मुताबिक मरने वाली पांच महिलाओं में से केवल एक महिला को ही अधिक ब्लीडिंग हो रही थी, जबकि बाकी में यह दिक्कत थी ही नहीं।
उन्होंने तो यहां तक दावा किया था कि कोटा में महिलाओं की मौत किसी भी दवा के कारण नहीं हुई। उनके अनुसार दवाओं की जांच भी करवा ली गई है।
आखिर किसके दावे को माना जाए सच
दूसरी ओर स्वास्थ्य मंत्री का कहना है कि कोटा में हुई मौतों के कारणों की जांच से जुड़ी सभी रिपोर्ट मिल चुकी हैं और किस मरीज की किस वजह से मौत हुई, यह सामने आ चुका है। ऐसे में सवाल यह है कि मंत्री के दावे को सही माना जाए या कमिश्नर के। मंत्री जहां अधिक खून बहने को मौत की वजह बता रहे हैं, वहीं कमिश्नर इसके पीछे इंफेक्शन को कारण मान रही हैं।
यह मामला अभी ठंडा भी नहीं पड़ा था कि इससे पहले बीकानेर में प्रसूताओं की किडनी फेल होने के मामले सामने आ गए, जिससे पूरे स्वास्थ्य महकमे में जोरदार हड़कंप मचा हुआ है।
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