मध्य प्रदेश को बड़ी सौगात: ग्वालियर से नागपुर तक बनेगा 6 लेन कॉरिडोर, 9 जिलों को होगा सीधा लाभ

ग्वालियर से नागपुर तक 570 किलोमीटर लंबे 6 लेन कॉरिडोर की योजना को मंजूरी मिल गई है, जिस पर करीब 40 हजार करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। इस परियोजना से मध्य प्रदेश के 9 जिलों को सीधा फायदा मिलेगा और सफर का समय 5 से 7 घंटे तक घट सकता है।

मध्य प्रदेश के लिए एक बड़ी बुनियादी ढांचा परियोजना को मंजूरी मिल गई है। ग्वालियर से महाराष्ट्र के नागपुर तक करीब 570 किलोमीटर लंबा सिक्स लेन कॉरिडोर बनाने की तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। इस महत्वाकांक्षी योजना पर लगभग 40 हजार करोड़ रुपये की लागत आने का अनुमान है। फिलहाल प्रारंभिक सर्वे का काम चल रहा है, जिसके तहत ट्रैफिक, औद्योगिक संभावनाओं और आर्थिक लाभ का आकलन किया जा रहा है। यह कॉरिडोर प्रदेश के कई जिलों को बेहतर सड़क संपर्क देने के साथ विकास की नई राहें भी खोलेगा।

किन 9 जिलों को मिलेगा सीधा फायदा

प्रस्तावित ग्वालियर-बैतूल-नागपुर कॉरिडोर से प्रदेश के 9 जिलों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है। यह मार्ग ग्वालियर, मुरैना, शिवपुरी, अशोकनगर, विदिशा, भोपाल, रायसेन, नर्मदापुरम और बैतूल से होकर गुजरेगा। बेहतर कनेक्टिविटी से इन इलाकों में व्यापार और निवेश बढ़ेगा, जबकि आसपास के क्षेत्रों को भी अप्रत्यक्ष फायदा होगा। सड़क बनने के साथ नए उद्योग और कारोबारी गतिविधियों को रफ्तार मिलेगी, जिससे क्षेत्रीय विकास तेज हो सकता है।

सड़क के साथ औद्योगिक क्षेत्रों का विकास

सरकार की योजना सिर्फ सड़क बनाने तक सीमित नहीं है। कॉरिडोर के किनारे कई जगहों पर औद्योगिक क्षेत्र भी विकसित किए जाएंगे। यहां फूड प्रोसेसिंग, टेक्सटाइल और दूसरी विनिर्माण इकाइयां स्थापित होने की संभावना है। इससे स्थानीय युवाओं को अपने ही इलाके में रोजगार के अवसर मिलेंगे और काम की तलाश में दूसरे शहरों या राज्यों की ओर पलायन की जरूरत कम होगी। उद्योगों के आने से छोटे व्यापारियों और सेवा क्षेत्र से जुड़े लोगों को भी लाभ मिलने की उम्मीद है।

किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बल

कॉरिडोर के किनारे बनने वाले औद्योगिक क्षेत्रों का फायदा किसानों को भी मिलेगा। फूड प्रोसेसिंग यूनिट लगने से कृषि उत्पादों की स्थानीय स्तर पर प्रोसेसिंग और मार्केटिंग आसान हो जाएगी। फल, सब्जी और अनाज उगाने वालों को बेहतर बाजार मिल सकेगा। परिवहन का खर्च घटने से किसानों की आमदनी बढ़ने की संभावना है। कृषि आधारित उद्योगों के पनपने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होगी और रोजगार के नए मौके भी पैदा होंगे।

22 से 25 घंटे का सफर घटकर रह जाएगा कम

मौजूदा समय में ग्वालियर से नागपुर तक सड़क मार्ग से जाने में करीब 22 से 25 घंटे लग जाते हैं। लेकिन सिक्स लेन कॉरिडोर बन जाने के बाद यह समय 5 से 7 घंटे तक घट सकता है, यानी यह सफर लगभग 16 से 17 घंटे में तय किया जा सकेगा। बेहतर सड़क और तेज यातायात से यात्रियों का समय बचेगा। साथ ही ईंधन की खपत घटने से आर्थिक लाभ मिलेगा और आवाजाही अधिक सुविधाजनक हो जाएगी।

सुरक्षा के लिए आधुनिक डिजाइन

इस परियोजना में यातायात सुरक्षा को खास तवज्जो दी गई है। नेशनल हाईवे अथॉरिटी की योजना के मुताबिक बड़े शहरों के बाहर बाईपास बनाए जाएंगे ताकि ट्रैफिक का दबाव कम हो सके। छोटे गांवों के लिए अंडरपास और ओवरब्रिज बनाए जाएंगे। हाईवे पर सीधे कट नहीं दिए जाएंगे, जिससे हादसों की आशंका घटेगी। इस आधुनिक डिजाइन से यातायात ज्यादा सुरक्षित और सुगम बनने की उम्मीद है।

लॉजिस्टिक हब और उद्योगों को लाभ

कॉरिडोर के किनारे लॉजिस्टिक हब और औद्योगिक क्लस्टर विकसित करने की भी योजना है। इससे माल ढुलाई तेज और सस्ती होगी। खनिज, फल, अनाज, दवाइयां और प्लास्टिक उद्योग को इसका विशेष फायदा मिल सकता है। परिवहन लागत घटने से कारोबारियों की प्रतिस्पर्धी क्षमता बढ़ेगी और उद्योगों को कच्चा माल तथा तैयार उत्पाद जल्दी बाजार तक पहुंचाने में मदद मिलेगी। इससे प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई गति मिलने की संभावना है।

पर्यटन और बुंदेलखंड की कनेक्टिविटी मजबूत

यह कॉरिडोर सिर्फ सड़क संपर्क तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पर्यटन और क्षेत्रीय विकास को भी बढ़ावा देगा। अशोकनगर, विदिशा और रायसेन के रास्ते सागर और बुंदेलखंड क्षेत्र की कनेक्टिविटी मजबूत होगी। बेहतर सड़क नेटवर्क से पर्यटकों की आवाजाही बढ़ सकती है और धार्मिक, ऐतिहासिक तथा प्राकृतिक पर्यटन स्थलों तक पहुंच आसान होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यह परियोजना मध्य प्रदेश के विकास में अहम भूमिका निभा सकती है और आने वाले वर्षों में बड़े आर्थिक बदलाव की नींव बन सकती है।

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