छत्तीसगढ़ के 759 नगरीय निकायों में एल्डरमैन के पद खाली, जानिए क्यों अटकी है मनोनयन की प्रक्रिया

छत्तीसगढ़ में भाजपा सरकार बनने के करीब दो साल बाद भी राज्य के 759 नगर निगम, नगर पालिका और नगर पंचायतों में एल्डरमैन (मनोनीत पार्षद) की नियुक्ति नहीं हो पाई है। कांग्रेस शासनकाल में नियुक्त एल्डरमैनों को हटाए जाने के बाद से ये पद रिक्त पड़े हैं।

छत्तीसगढ़ में सत्ता परिवर्तन को करीब दो साल बीत जाने के बावजूद प्रदेश के नगरीय निकायों में मनोनीत जनप्रतिनिधियों, यानी एल्डरमैन की कुर्सियां आज भी खाली पड़ी हैं। राज्य भर के लगभग 759 नगर निगम, नगर पालिका और नगर पंचायतों में एक भी एल्डरमैन की नियुक्ति अब तक नहीं हो सकी है। कांग्रेस के कार्यकाल में नियुक्त किए गए एल्डरमैनों को पद से हटाए जाने के बाद से ये सभी स्थान रिक्त बने हुए हैं।

बहुमत के चलते मनोनीत प्रतिनिधियों की जरूरत नहीं

राजनीतिक हलकों में माना जा रहा है कि ज्यादातर नगर निगमों में भाजपा के निर्वाचित पार्षद बहुमत के साथ जीतकर आए हैं। यही वजह है कि निकायों में मनोनीत जनप्रतिनिधियों की आवश्यकता फिलहाल महसूस नहीं की जा रही है। चूंकि सत्ताधारी दल के पास पहले से ही पर्याप्त संख्या बल मौजूद है, इसलिए एल्डरमैन के पद भरने को लेकर कोई जल्दबाजी दिखाई नहीं दे रही।

कांग्रेस का आर्थिक बोझ का आरोप

दूसरी ओर, विपक्षी कांग्रेस इस मुद्दे पर सरकार को घेर रही है। पार्टी का आरोप है कि सरकार आर्थिक तंगी से जूझ रही है। कांग्रेस का कहना है कि यदि सभी एल्डरमैनों की नियुक्ति की जाती है तो राज्य के खजाने पर करोड़ रुपये का सालाना बोझ बढ़ जाएगा, और इसी वजह से सरकार नियुक्तियों से कतरा रही है।

गुटबाजी भी बनी वजह

नियुक्ति में देरी की एक वजह भीतरी खींचतान को भी बताया जा रहा है। एल्डरमैन का पद भाजपा के किस गुट के खाते में जाएगा, इसे लेकर पार्टी के भीतर अंतर्कलह की स्थिति बनी हुई है। इसी रस्साकशी के चलते मनोनयन की प्रक्रिया अटकी पड़ी है।

कुल मिलाकर, सरकार के दो साल पूरे होने के बाद भी छत्तीसगढ़ के 759 शहरी निकाय एल्डरमैन की नियुक्ति का इंतजार कर रहे हैं।

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