पुआ का नाम सुनते ही ज्यादातर लोगों के मन में घी या तेल में तली हुई मिठाई की तस्वीर उभरती है, लेकिन झारखंड में अरवा चावल से एक ऐसा पुआ तैयार किया जाता है जिसमें तेल की एक भी बूंद इस्तेमाल नहीं होती। इसे मिट्टी की हांडी में सेंका जाता है और मीठे दूध में डुबोकर ऊपर से मेवा छिड़ककर परोसा जाता है। आइए जानते हैं यह पारंपरिक व्यंजन कैसे तैयार होता है।
पर्व-त्योहारों की पहचान बना यह व्यंजन
झारखंड का पारंपरिक ढकनेसर पुआ पर्व-त्योहारों और खास मौकों पर बड़े चाव से बनाया और खाया जाता है। अपनी विशेष मिठास और स्वाद की वजह से यह बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक हर उम्र के लोगों को खूब भाता है। बोकारो जिले के चंदनक्यारी प्रखंड स्थित दीदी किचन की संचालिका माला देवी ने इसे बनाने की आसान और पारंपरिक विधि साझा की है, जिसे कोई भी घर पर सहजता से तैयार कर सकता है।
माला देवी बताती हैं कि ढकनेसर पुआ बेहद सरल और पारंपरिक रेसिपी है, जिसे कम समय में बनाया जा सकता है। इसे तैयार करने के लिए मिट्टी की छोटी हांडी और मिट्टी के ढक्कन की आवश्यकता पड़ती है।
सबसे पहले भिगोएं अरवा चावल
इस पुआ को बनाने की शुरुआत अरवा चावल को एक से दो घंटे तक पानी में भिगोने से होती है। इसके बाद चावल को सुखाकर मिक्सर में बारीक पीस लिया जाता है। तैयार चावल के पाउडर को छलनी से छानकर और महीन किया जाता है और फिर आवश्यकतानुसार पानी मिलाकर इसका पतला बैटर बनाया जाता है।
संतुलित बैटर है सबसे जरूरी
बैटर तैयार होने के बाद उसका सही गाढ़ापन परखना बेहद अहम होता है। इसके लिए पहली बार थोड़ी मात्रा में बैटर हांडी में डालकर देखें। अगर बैटर बहुत पतला होगा तो पुआ हांडी में चिपक सकता है और अगर ज्यादा गाढ़ा होगा तो पुआ सख्त बन जाएगा। इसीलिए बैटर का संतुलित होना जरूरी है।
भाप के सहारे सिकता है पुआ
इसके बाद मिट्टी की हांडी को चूल्हे पर अच्छी तरह गर्म किया जाता है। हांडी गर्म होने पर उसमें तैयार बैटर डाला जाता है और मिट्टी के ढक्कन से ढक दिया जाता है। फिर ढक्कन के ऊपर हल्का पानी छिड़का जाता है, जिससे भाप बनती है और इसी भाप की मदद से ढकनेसर पुआ पककर तैयार हो जाता है।
मीठे दूध में डुबोकर परोसें
अगले चरण में पुआ तैयार हो जाने के बाद दूध में चीनी मिलाकर तेज आंच पर अच्छी तरह उबाला जाता है। फिर इस मीठे दूध को तैयार पुआ के ऊपर डाला जाता है। स्वाद और आकर्षण बढ़ाने के लिए ऊपर से नारियल का बुरादा और ड्राई फ्रूट्स डालकर इसे सजाया जाता है। इसके बाद गरमा-गरम ढकनेसर पुआ का आनंद लिया जा सकता है।
सख्त हो जाए तो दूध में डुबोकर रखें
माला देवी अंत में बताती हैं कि ढकनेसर पुआ शुरुआत में काफी नरम होता है, लेकिन लंबे समय तक रखने पर सख्त हो जाता है। ऐसे में अगर पुआ सख्त पड़ जाए तो उसे कुछ देर दूध में डुबोकर रखने से वह दोबारा नरम हो जाता है और उसका स्वाद पहले जैसा ही बना रहता है।
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