तृणमूल कांग्रेस को बुधवार को एक और बड़ा राजनीतिक झटका लगा, जब उसकी राज्यसभा सांसद और तेजतर्रार नेता सुष्मिता देव ने पार्टी तथा उच्च सदन की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। पार्टी में बढ़ते अंदरूनी असंतोष के बीच यह कदम सामने आया है।
एक हफ्ते में दूसरा इस्तीफा
सुष्मिता देव सुखेंदु शेखर राय के बाद, एक ही हफ्ते के भीतर इस्तीफा देने वाली तृणमूल की दूसरी सांसद हैं। बताया जा रहा है कि देव आज दोपहर एक बजे उपराष्ट्रपति और राज्यसभा के सभापति सी.पी. राधाकृष्णन से मुलाकात कर अपना इस्तीफा सौंपेंगी।
उनके इस्तीफे से पहले पार्टी के भीतर नाराजगी लगातार बढ़ रही थी। कुछ ही दिन पहले तृणमूल के कई सांसदों ने कथित तौर पर नेशनल डेमोक्रेटिक अलायंस (NDA) को समर्थन देने की बात कही थी।
काकोली घोष के दावे से बढ़ी हलचल
यह पूरा घटनाक्रम बागी तृणमूल सांसद काकोली घोष दस्तीदार के दावों के बाद तेज हुआ। उन्होंने सोमवार को कहा था कि पार्टी के करीब 20 सांसदों ने NDA के साथ जुड़ने की इच्छा जताई थी। दस्तीदार के अनुसार, इस संबंध में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को एक पत्र भी सौंपा गया था।
उल्लेखनीय है कि दस्तीदार तृणमूल के बागी गुट का नेतृत्व कर रही हैं और उन्हें इसका मुख्य सचेतक यानी चीफ व्हिप बनाया गया है। वहीं, वरिष्ठ सांसद शताब्दी रॉय को बागी गुट का उपनेता नियुक्त किया गया है। इन दावों के बाद पार्टी के भीतर संकट कितना गहरा है, इसे लेकर अटकलें और तेज हो गई हैं।
बंगाल की सियासत का असर दिल्ली तक
बंगाल की इस राजनीतिक उठापटक का साफ असर राष्ट्रीय राजधानी की राजनीति में भी दिखाई दे रहा है। इसी बीच तृणमूल सांसद पार्थ भौमिक ने मंगलवार को वह सरकारी बंगला औपचारिक रूप से खाली कर दिया, जो दिल्ली में पार्टी के कामकाज का प्रमुख केंद्र बना हुआ था।
सूत्रों के मुताबिक, भौमिक ने स्वयं ही उस आवास को छोड़ने का अनुरोध किया था। इस घटनाक्रम से संगठन के भीतर बढ़ती गड़बड़ी के संकेत और मजबूत हुए हैं, क्योंकि नेतृत्व और बागी सांसदों के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है।
नेतृत्व का कड़ा रुख
तृणमूल कांग्रेस के नेतृत्व ने इस बगावत पर सख्त रवैया अपनाया है। मंगलवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में पार्टी के वरिष्ठ नेता कल्याण बनर्जी ने काकोली घोष दस्तीदार के नेतृत्व वाले बागी गुट के रवैये की कड़ी आलोचना की।
बनर्जी ने कहा कि जो नेता पार्टी से नाखुश हैं, उन्हें पद पर बने रहने के बजाय इस्तीफा दे देना चाहिए, न कि सार्वजनिक रूप से संगठन का विरोध करना चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर कोई नेता अब तृणमूल कांग्रेस के साथ नहीं रहना चाहता या पार्टी से उसके गंभीर मतभेद हैं, तो नैतिक रूप से सही यही होगा कि वह अपना पद छोड़ दे।
https://www.indiatv.in/india/politics/west-bengal-tmc-rajya-sabha-mp-sushmita-dev-resigns-2026-06-10-1224133