जनसुनवाई में बहनों ने कलेक्टर के सामने निकाली जहर की बोतल, अफसरों में मच गई अफरा-तफरी

धार में कलेक्टर की जनसुनवाई के दौरान एक महिला अपनी दो बहनों के साथ जहर की बोतल लेकर पहुंच गई, जिसे अधिकारियों और महिला पुलिसकर्मियों ने तुरंत छीन लिया। पीड़िता का आरोप है कि लीज पर दी गई जमीन पर रिश्तेदारों ने कब्जा कर लिया और भाजपा नेता उन्हें जान से मारने की धमकी दे रहा है।

मध्य प्रदेश के धार में जिला पंचायत सभागृह में आयोजित कलेक्टर की जनसुनवाई के दौरान उस वक्त हड़कंप मच गया, जब एक महिला अपनी दो बहनों के साथ जहर की बोतल लेकर वहां पहुंच गई। बोतल देखते ही मौजूद अधिकारियों और महिला पुलिसकर्मियों ने तत्परता दिखाते हुए तुरंत उससे बोतल छीन ली। कलेक्टर राजीव रंजन मीना समेत अन्य अधिकारियों ने महिला को समझाया और उसकी शिकायत की निष्पक्ष जांच कर न्याय दिलाने का भरोसा दिया।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, महिला अपनी दो बहनों के साथ जनसुनवाई में आई थी और उसने अधिकारियों के सामने अचानक जहर की बोतल निकाल दी, जिससे पूरे कलेक्ट्रेट में अफरा-तफरी फैल गई। आनन-फानन में बोतल छीनकर उसकी बात सुनी गई।

जमीन कब्जे को लेकर सालभर से भटक रही पीड़िता

महिला का कहना है कि ग्राम गरडावद में उसके परिवार ने अपने ही रिश्तेदारों को एक साल के लिए जमीन लीज पर दी थी, लेकिन अब उन रिश्तेदारों ने उस जमीन पर कब्जा कर लिया है। न्याय की उम्मीद में वह पिछले एक साल से दर-दर भटक रही है। उसका आरोप है कि रिश्तेदारों के साथ भाजपा नेता राजेंद्र छटिया भी मिला हुआ है, जो उसे जान से मारने की धमकी देता है।

केंद्रीय राज्यमंत्री सावित्री ठाकुर पर भी आरोप

पीड़ित महिला ने आरोप लगाते हुए आगे कहा कि भाजपा नेता राजेंद्र छटिया केंद्रीय राज्यमंत्री सावित्री ठाकुर का करीबी है। महिला ने मंत्री सावित्री ठाकुर पर भी आरोप मढ़े हैं। उसका कहना है कि इस मामले की शिकायत उसने केंद्रीय मंत्री से भी की थी, लेकिन कहीं कोई सुनवाई नहीं हुई, जिसके चलते वह यह कदम उठाने पर मजबूर हुई।

इस पूरे प्रकरण को लेकर तहसीलदार दिनेश उइके ने कहा कि पीड़ित महिला की शिकायत पर जांच कर जल्द ही कार्रवाई की जाएगी।

श्योपुर में जनसुनवाई के दौरान फरियादी की हो चुकी है मौत

उल्लेखनीय है कि पिछले महीने श्योपुर में जनसुनवाई के दौरान फरियादी देवेंद्र गोयल ने जहरीला पदार्थ खा लिया था, जिससे उसकी मौत हो गई थी। इसके बाद परिजनों, समाजजनों और कई संगठनों ने शव के साथ प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन किया था। उनका आरोप था कि फरियादी की समस्या को गंभीरता से नहीं सुना गया, जिसके कारण उसने जहरीला पदार्थ खाकर जान दे दी। मामला तूल पकड़ने पर प्रशासन हरकत में आया और आखिरकार संबंधित तहसीलदार के निलंबन की कार्रवाई के बाद ही प्रदर्शन समाप्त हुआ तथा परिजन शव के अंतिम संस्कार के लिए राजी हुए।

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