जापान का ढाई लाख रुपये किलो वाला मियाजाकी आम अब जमशेदपुर में, 500 रुपये प्रति पीस में चखें स्वाद

जमशेदपुर के अमृत इक्का ने शौकिया तौर पर जापान के मशहूर मियाजाकी आम की खेती की और इस वर्ष उनके पेड़ों में 100 से अधिक फल लगे हैं। फिलहाल वे लोगों को स्वाद चखाने के लिए यह आम करीब 500 रुपये प्रति पीस की दर से उपलब्ध करा रहे हैं।

आम को यूं ही फलों का राजा नहीं कहा जाता। दुनिया भर में इसकी कई ऐसी दुर्लभ किस्में हैं, जिनकी कीमत सुनकर हर कोई हैरान रह जाता है। इन्हीं में शामिल है जापान का चर्चित मियाजाकी आम, जिसे अंतरराष्ट्रीय बाजार में सबसे महंगे आमों में गिना जाता है। कई देशों में इसकी कीमत 3 लाख रुपये प्रति किलो तक पहुंच जाती है। अपने आकर्षक लाल-बैंगनी रंग, गजब की मिठास और खास स्वाद के चलते यह आम पूरी दुनिया में चर्चा में रहता है।

शौकिया प्रयोग जो बन गया कामयाबी

अब यही दुर्लभ आम जमशेदपुर में भी लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच रहा है। शहर के अमृत इक्का ने शौकिया तौर पर मियाजाकी आम की खेती का प्रयोग किया, जिसमें उन्हें बड़ी सफलता हाथ लगी। उन्होंने बताया कि करीब दो वर्ष पहले उन्होंने रांची स्थित ग्रीन हार्ट नर्सरी से इस प्रजाति के छोटे पौधे लाकर अपने बगीचे में लगाए थे। उचित देखभाल और अनुकूल वातावरण मिलने के बाद इस वर्ष पहली बार उनके पेड़ों में 100 से अधिक मियाजाकी आम लगे हैं।

दुनिया के सबसे महंगे आमों में शुमार

मियाजाकी को दुनिया के सबसे महंगे आमों में गिना जाता है। कुछ जगहों पर नीलामी के दौरान इसकी कीमत ढाई से तीन लाख रुपये किलो तक पहुंच जाती है, जबकि सामान्य तौर पर भी यह 15 से 30 हजार रुपये किलो तक बिकता है। हालांकि अमृत केवल लोगों को स्वाद चखाने के मकसद से इसे 500 रुपये प्रति पीस तक की दर पर उपलब्ध करा रहे हैं।

सपना सच होने जैसा अहसास

अमृत इक्का कहते हैं कि यह उपलब्धि उनके लिए किसी सपने के सच होने जैसी है। आम लगने की खबर फैलते ही दूर-दूर से लोग उनके बगीचे को देखने पहुंच रहे हैं। कई लोग किलो के हिसाब से आम खरीदने की इच्छा भी जता रहे हैं, लेकिन उत्पादन फिलहाल सीमित होने के कारण उन्होंने इसे करीब 500 रुपये प्रति पीस की दर से सिर्फ स्वाद चखाने के लिए उपलब्ध कराया है।

रंग और स्वाद बनाते हैं इसे खास

मियाजाकी आम की सबसे बड़ी खूबी इसका रंग और स्वाद है। पकने पर इसका रंग गहरे लाल और बैंगनी का मिश्रण नजर आता है, जो इसे आम किस्मों से बिल्कुल अलग बना देता है। इसकी बाहरी परत अपेक्षाकृत पतली होती है, जबकि अंदर का गूदा बेहद रसीला, मुलायम और बहुत अधिक मीठा होता है। यही वजह है कि इसे प्रीमियम श्रेणी का फल माना जाता है।

देखभाल का तरीका

अमृत के अनुसार इस आम की खेती के लिए किसी खास रासायनिक तकनीक की जरूरत नहीं पड़ती। पौधों के आसपास साफ-सुथरा वातावरण, पर्याप्त धूप और नियमित देखभाल जरूरी होती है। अगर पौधों को सही माहौल मिले तो वे अच्छी तरह विकसित होते हैं और बेहतर गुणवत्ता वाले फल देते हैं।

पूरे शहर में बना चर्चा का विषय

अमृत इक्का का कहना है कि आने वाले दो से तीन वर्षों में वे मियाजाकी आम के और पौधे तैयार करेंगे, ताकि उत्पादन को बढ़ाया जा सके। उनका मानना है कि अगर झारखंड के किसान और बागवानी प्रेमी इस तरह की अधिक कीमत वाली फसलों पर ध्यान दें, तो यह भविष्य में आमदनी का एक नया और फायदेमंद विकल्प बन सकता है। फिलहाल उनका यह प्रयोग जमशेदपुर में चर्चा का विषय बना हुआ है।

https://hindi.news18.com/news/jharkhand/jamshedpur-japanese-miyazaki-mango-in-city-one-piece-costs-500-rupees-local18-ws-l-10555640.html