जज की कुर्सी छोड़ संन्यासी बने खपड़िया बाबा: सर्प-बिच्छू बने मित्र, गोमुख से गंगासागर तक दो बार की पदयात्रा

बलिया में स्थित खपड़िया बाबा का आश्रम आज श्रद्धा और पर्यटन का बड़ा केंद्र बन चुका है। मान्यता है कि बाबा ने अपने तपोबल से जल और थल के जहरीले-गैरजहरीले जीवों से मित्रता कर ली थी।

बलिया जनपद में स्थित खपड़िया बाबा का आश्रम आज आस्था और आकर्षण का बड़ा केंद्र बन चुका है। बाबा के जीवन और तप से जुड़ी कहानियां आज भी श्रद्धालुओं के मन में गहरी श्रद्धा जगाती हैं।

तपोबल से जीव-जंतुओं से मित्रता

खपड़िया बाबा के बारे में मान्यता है कि उन्होंने अपने तपोबल से जल और थल में रहने वाले अनेक जहरीले तथा गैर-जहरीले जीव-जंतुओं से मित्रता कर ली थी। सर्प और बिच्छू जैसे प्राणी भी उनके लिए मित्र समान हो गए थे। यही प्रसंग आज भी उनके भक्तों के बीच श्रद्धा का विषय बने हुए हैं।

श्रद्धा और पर्यटन का केंद्र

आज यह आश्रम केवल बलिया जनपद का बड़ा आकर्षण केंद्र ही नहीं है, बल्कि एक प्रमुख दर्शनीय पर्यटन स्थल और सशक्त आध्यात्मिक केंद्र के रूप में भी अपनी पहचान बना चुका है। प्रदेश के कोने-कोने से श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं और संत की स्मृति में नतमस्तक होते हैं।

जीवंत चित्रण जगाता है आस्था

आश्रम परिसर में संत के जीवन से जुड़े प्रसंगों का इतना जीवंत चित्रण किया गया है कि उसे देखकर आस्था से जुड़ी लाखों भावनाएं स्वतः जाग उठती हैं। यहां आने वाला हर व्यक्ति बाबा के तप और साधना की कहानियों से प्रभावित हुए बिना नहीं रहता।

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