पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में हालात बेकाबू होते जा रहे हैं। इलाके में जारी विरोध प्रदर्शनों को कुचलने के लिए पाकिस्तानी सेना लगातार बल प्रयोग कर रही है। प्रदर्शनकारी अपने हक की मांग को लेकर सड़कों पर डटे हुए हैं, जबकि सुरक्षा बल उन पर लाठीचार्ज और गोलीबारी का सहारा ले रहे हैं। इस बीच एक खुफिया रिपोर्ट में चौंकाने वाला दावा किया गया है कि 5 जून से 9 जून के बीच हुई हिंसा में 19 बच्चों और 7 गर्भवती महिलाओं की जान गई है।
शहबाज शरीफ और आसिम मुनीर के लिए यह संकट सिरदर्द बनता जा रहा है। प्रदर्शनकारी आर्थिक सुधारों और अपने अधिकारों की मांग कर रहे हैं, लेकिन सेना इन आवाजों को दबाने के लिए कठोर रवैया अपनाए हुए है। रिपोर्ट के मुताबिक अब तक दर्जनों प्रदर्शनकारी मारे जा चुके हैं और मरने वालों में बच्चों तथा गर्भवती महिलाओं की संख्या सबसे अधिक होना बेहद हैरान करने वाला है।
JAAC पर कार्रवाई से भड़की हिंसा
रिपोर्ट के अनुसार यह हिंसा उस वक्त शुरू हुई जब आर्थिक और राजनीतिक अधिकारों की मांग कर रही संयुक्त अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) के खिलाफ पाकिस्तान सरकार और सेना ने सख्त कदम उठाए। पाकिस्तान ने जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी पर आतंकवाद विरोधी कानूनों के तहत प्रतिबंध लगा दिया है।
कैसे फैली अशांति
एक रिपोर्ट के मुताबिक संकट की शुरुआत बरमंग ब्रिज पर हुई गोलीबारी से हुई, जिसके बाद विरोध प्रदर्शन पूरे क्षेत्र में फैल गए। हालात उस समय और गंभीर हो गए जब JAAC के कार्यकारी सदस्य शाहजेब हबीब की कथित तौर पर सेना ने हत्या कर दी। हबीब की मौत के बाद हजारों लोग सड़कों पर उतर आए और सरकार के खिलाफ प्रदर्शन तेज हो गए।
बच्चों और महिलाओं को भी नहीं बख्शा
आधिकारिक आंकड़ों में अब तक 11 पुरुषों की मौत की पुष्टि की गई है। हालांकि खुफिया रिपोर्ट पाकिस्तान सरकार के दावों की पोल खोलती नजर आ रही है। इस रिपोर्ट में बताया गया है कि मारे गए लोगों में 19 बच्चे और 7 गर्भवती महिलाएं भी शामिल थीं।
हालात को नियंत्रित करने के लिए पाकिस्तान ने पीओके में 14,000 मुख्यधारा के सैनिक तैनात किए हैं और पूरे इलाके में इंटरनेट सेवा ठप कर दी गई है। बताया जा रहा है कि 7 जून को शाहजेब हबीब के जनाजे में शामिल लोगों पर सुरक्षा बलों ने लाठीचार्ज किया, आंसू गैस के गोले छोड़े और बाद में गोलीबारी भी की। रिपोर्ट के अनुसार उस वक्त बड़ी संख्या में निहत्थे लोग वहां मौजूद थे।
क्यों सुलग रहा है पीओके
रिपोर्ट के मुताबिक यह असंतोष राजनीतिक रूप से हाशिए पर धकेले जाने और क्षेत्र के जलविद्युत संसाधनों के दोहन से उपजा है। इन संसाधनों का फायदा मुख्य पाकिस्तान को मिल रहा है, जबकि स्थानीय लोग लगातार बिजली कटौती और महंगे बिलों से परेशान हैं।
JAAC ने 38 सूत्रीय मांग पत्र के जरिए जनता को एकजुट किया था। इन मांगों में सस्ती गेहूं सब्सिडी फिर से बहाल करना, नेताओं को मिलने वाली सरकारी सुविधाएं समाप्त करना, क्षेत्रीय संसाधनों पर हक दिलाना और इस्लामाबाद की दखलंदाजी के बिना स्थानीय शासन की मांग शामिल थी। रिपोर्ट के अनुसार 9 जून को करीब 45 लाख कश्मीरी नागरिकों से बड़े मार्च में शामिल होने की अपील की गई थी। इसी दौरान कई जिलों में हिंसा भड़क उठी। भीमबर क्षेत्र में प्रदर्शनकारियों के काफिलों पर आसिम मुनीर की सेना की ओर से गोलीबारी की गई, जिसमें भारी संख्या में लोग मारे गए। अब तक पीओके के प्रदर्शनों में 30 से अधिक नागरिकों के मारे जाने का दावा किया गया है।
लगातार जारी है दमन
रिपोर्ट के मुताबिक हबीब की हत्या के बाद हिंसा और भड़क गई। पाकिस्तानी सेना ने बड़े पैमाने पर गिरफ्तारियां शुरू कीं, 72 से ज्यादा नागरिक नेताओं को हिरासत में लिया और JAAC के मुख्यालय को सील कर दिया। 7 जून को सुरक्षा बलों ने हबीब की नमाज-ए-जनाजा में जुटे शोकाकुल लोगों पर लाठीचार्ज, आंसू गैस और सीधी गोलीबारी की।
सबसे चौंकाने वाला दावा यह है कि पीओके पुलिस के सब-इंस्पेक्टर सरदार इनायत को पाकिस्तानी सेना ने इसलिए मार डाला क्योंकि उन्होंने प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाने के आदेश का पालन करने से इनकार कर दिया था।
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