मध्य प्रदेश में राज्यसभा की कांग्रेस प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द कर दिया गया है। इस फैसले को लेकर दोनों दलों की प्रतिक्रिया एकदम विपरीत रही। भारतीय जनता पार्टी ने इसे सत्य की जीत बताया, जबकि कांग्रेस ने इसे साफ तौर पर सीट चोरी करार दिया। नटराजन का पर्चा खारिज होने से कांग्रेस को बड़ा झटका लगा है।
दिलचस्प बात यह है कि जिस दिन नटराजन के नाम का ऐलान हुआ, उसी दिन से बीजेपी उनके खिलाफ सबूत जुटाने में जुट गई थी। पार्टी ने कांग्रेस प्रत्याशी से जुड़े पुराने मामलों की पूरी पड़ताल शुरू कर दी थी।
तेलंगाना से भोपाल पहुंचे वे दस्तावेज
तेलंगाना बीजेपी के अध्यक्ष रामचंदर राव ने ही मध्य प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल को मीनाक्षी नटराजन के खिलाफ अदालती मामले और नोटिस से जुड़े दस्तावेज उपलब्ध कराए। इन्हीं कागजों ने राज्यसभा की तीसरी सीट का पूरा खेल पलट दिया।
नटराजन से जुड़े ये दस्तावेज बीते सोमवार को भोपाल भेजे गए थे। इन्हीं के आधार पर पहले मामला अदालत तक पहुंचा था, जहां कोर्ट ने समन जारी किया और नटराजन ने उसका जवाब भी दाखिल किया था।
कैसे बनी बीजेपी की रणनीति
बीते दिन इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर बीजेपी ने अपनी रणनीति तैयार की। प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को इस पूरे मामले की जानकारी दी। इसके बाद नामांकन से जुड़ी आपत्तियों की पैरवी का जिम्मा राहुल कोठारी और पूर्व जज रोहित आर्य को सौंपा गया।
भोपाल से दिल्ली तक कांग्रेस का मोर्चा
मीनाक्षी नटराजन का नामांकन निरस्त होने के विरोध में कांग्रेस ने भोपाल से लेकर दिल्ली तक मोर्चा खोल दिया है। आज बुधवार को पार्टी के नेता भोपाल में निर्वाचन आयोग के सामने उपवास पर बैठेंगे, वहीं सभी जिला मुख्यालयों पर भी उपवास का आयोजन किया जाएगा।
इस उपवास में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार, एमपी कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी, कमलेश्वर पटेल, दिग्विजय सिंह, मीनाक्षी नटराजन, हेमंत कटारे और विक्रांत भूरिया समेत बड़ी संख्या में कार्यकर्ता शामिल होंगे। कांग्रेस नेता आज चुनाव आयोग के अधिकारियों से भी मुलाकात करेंगे।
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