चांवडिया तालाब बना इंडियन फ्लैपशेल कछुओं का पनाहगाह, आबादी 600 के पार पहुंची

भीलवाड़ा के चांवडिया तालाब में स्वच्छ पानी, पर्याप्त ऑक्सीजन और प्राकृतिक भोजन की वजह से इंडियन फ्लैपशेल कछुओं की संख्या करीब 600 तक पहुंच गई है, जबकि प्रदेश के दूसरे इलाकों में इनकी आबादी घट रही है।

जिला मुख्यालय से करीब 15 किलोमीटर की दूरी पर बसा चांवडिया तालाब इन दिनों इंडियन फ्लैपशेल कछुओं के लिए एक सुरक्षित और अनुकूल आश्रय स्थल के तौर पर पहचान बना रहा है। राज्य के कई जलाशयों में जहां इन कछुओं की तादाद लगातार कम होती जा रही है, वहीं इस तालाब में इनकी आबादी तेजी से फल-फूल रही है। सर्दियों में अक्सर विदेशी परिंदों से आबाद रहने वाले इस तालाब में अब कछुओं की संख्या भी लगभग 600 तक जा पहुंची है।

इस तालाब को लेकर हुआ अध्ययन अंतरराष्ट्रीय शोध पत्रिका 'जर्नल ऑफ थ्रेटेंड टैक्सा' में भी प्रकाशित हुआ है, जिसके बाद इसका महत्व और अधिक बढ़ गया है।

नेहरू तालाब से चांवडिया तक का सफर

भीलवाड़ा शहर के नेहरू तालाब में वर्ष 2022 तक इंडियन फ्लैपशेल कछुओं की अच्छी-खासी मौजूदगी थी। लेकिन वर्ष 2023 की शुरुआत के बाद बढ़ते प्रदूषण, पानी की गुणवत्ता में गिरावट और पर्याप्त सुरक्षा न मिलने के चलते वहां इनकी संख्या घटने लगी। इसके उलट चांवडिया तालाब में साफ पानी, पर्याप्त घुलित ऑक्सीजन और प्राकृतिक भोजन की उपलब्धता ने कछुओं के लिए कहीं बेहतर माहौल तैयार कर दिया, जिसके चलते यहां इनकी तादाद निरंतर बढ़ रही है।

शोध में यह बात भी उभरकर आई कि इस तालाब का पारिस्थितिकी तंत्र कछुओं के प्रजनन और उनके दीर्घकालिक अस्तित्व के लिए बेहद उपयुक्त है। यहां पानी की बेहतर गुणवत्ता के साथ-साथ प्राकृतिक संसाधन भी भरपूर हैं, जिससे कछुओं को भोजन, आश्रय और सुरक्षित प्रजनन स्थल मिल रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर इसी तरह तालाब का संरक्षण जारी रहा तो आने वाले बरसों में यहां इनकी संख्या और भी बढ़ सकती है।

प्रदेश में 33 प्रतिशत तक की गिरावट

राजस्थान के अलग-अलग इलाकों में इंडियन फ्लैपशेल कछुओं की संख्या में करीब 33 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई है। ऐसे में चांवडिया तालाब में इनकी आबादी का लगातार बढ़ना एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। शोधकर्ताओं के अनुसार कछुए साफ और कम प्रदूषित पानी में तेजी से पनपते हैं और उनका जीवन चक्र भी बेहतर बना रहता है। यही वजह है कि स्वच्छ जलाशय इनके संरक्षण में अहम भूमिका निभाते हैं।

दो साल से अधिक चला अध्ययन

यह अध्ययन विद्या प्रोफेशनल एंड टेक्निकल कॉलेज के जूलॉजी विभागाध्यक्ष एवं असिस्टेंट प्रोफेसर महावीर प्रसाद वैष्णव और अंतिम वर्ष के छात्र अमोल अरोड़ा द्वारा किया गया। जनवरी 2023 से मार्च 2025 तक चले इस अध्ययन में तालाब के विभिन्न हिस्सों का नियमित निरीक्षण किया गया। इस दौरान कछुओं की संख्या, उनके व्यवहार, भोजन की उपलब्धता और जल गुणवत्ता का गहराई से विश्लेषण किया गया, जिससे यह निष्कर्ष सामने आया कि चांवडिया तालाब इनके लिए एक आदर्श आवास बन चुका है।

प्रति 100 वर्ग मीटर में दोगुनी हुई संख्या

अध्ययन में पाया गया कि प्रति 100 वर्ग मीटर क्षेत्र में कछुओं की संख्या पहले 10 से 12 के बीच थी, जो अब बढ़कर 23 से 24 तक पहुंच गई है। यह बढ़ोतरी साफ पानी, पर्याप्त ऑक्सीजन और प्राकृतिक भोजन की उपलब्धता के कारण ही संभव हो सकी है।

विशेषज्ञों का कहना है कि चांवडिया तालाब का यह उदाहरण अन्य जलाशयों के संरक्षण के लिए भी प्रेरणादायक है। यदि जल स्रोतों को प्रदूषण से बचाया जाए और प्राकृतिक संतुलन कायम रखा जाए तो वन्यजीवों की कई प्रजातियों को सुरक्षित भविष्य दिया जा सकता है।

https://hindi.news18.com/news/rajasthan/bhilwara-chanvadiya-pond-becomes-a-safe-haven-for-turtles-local18-10555062.html