भीषण गर्मी और दिनोंदिन चढ़ते पारे ने पशुपालकों की चिंताएं बढ़ा दी हैं। हीट वेव का सीधा असर दुधारू पशुओं की सेहत के साथ-साथ उनके दूध उत्पादन पर भी पड़ता है। ऐसे समय में पशु चिकित्सकों का मानना है कि साफ पानी, पर्याप्त छांव, नियमित स्नान और संतुलित आहार जैसी छोटी-छोटी सावधानियां बरतकर पशुओं को गर्मी के दुष्प्रभाव से सुरक्षित रखा जा सकता है।
पशुपालन से मजबूत होती ग्रामीण अर्थव्यवस्था
लखीमपुर खीरी जिले में किसान अब खेती के साथ-साथ तेजी से पशुपालन की ओर भी बढ़ रहे हैं। जिले के हजारों किसान गाय, भैंस, बकरी और अन्य दुधारू पशुओं का पालन कर अपनी आमदनी में इजाफा कर रहे हैं। दुग्ध उत्पादन के जरिए किसानों को प्रतिदिन हजारों रुपये की कमाई हो रही है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल रही है।
पशुपालन को प्रोत्साहन देने के लिए पशुपालन विभाग की ओर से किसानों और युवाओं को लगातार अनुदान दिया जा रहा है, ताकि युवा आसानी से इस क्षेत्र में आकर अच्छा मुनाफा कमा सकें। हालांकि कई बार पर्याप्त जानकारी न होने के कारण युवाओं को कई दिक्कतों का सामना भी करना पड़ता है।
गर्मी ने बढ़ाई पशुपालकों की मुश्किलें
इस समय भीषण गर्मी ने पशुपालकों की परेशानियां और बढ़ा दी हैं। लगातार चढ़ते तापमान और तेज धूप के चलते पशुओं को कई तरह की समस्याओं से जूझना पड़ रहा है। गर्मी के मौसम में पशुओं की देखभाल में जरा सी भी लापरवाही भारी पड़ सकती है, क्योंकि इससे पशु बीमार हो सकते हैं और समय पर इलाज न मिलने की स्थिति में उनकी मौत तक हो सकती है। यही वजह है कि इस मौसम में पशुपालकों को विशेष सतर्कता बरतने की जरूरत होती है।
40 डिग्री के पार तापमान क्यों है खतरनाक
गर्मियों में सबसे बड़ी समस्या हीट वेव यानी अत्यधिक गर्मी का प्रभाव होती है। जब तापमान लगातार 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंच जाता है, तो पशुओं के लिए अपने शरीर का तापमान नियंत्रित करना मुश्किल हो जाता है। इस स्थिति में पशुओं में बेचैनी, कमजोरी, भूख कम लगना और दूध उत्पादन में गिरावट जैसी समस्याएं शुरू हो जाती हैं।
पशु चिकित्सक की सलाह
मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. दिनेश कुमार सचान ने बताया कि गर्मियों में पशुओं को साफ और ठंडा पानी देना चाहिए। उन्होंने सलाह दी कि पूरे दिन में पशुओं को 5 से 6 बार ठंडा पानी पिलाएं, जिससे उनके शरीर में पानी की कमी न हो। साथ ही पशुओं को छांव में रखें, ताकि उनके शरीर का तापमान नियंत्रित रहे।
ध्यान रखने योग्य जरूरी बातें
गाय और भैंस को प्रतिदिन स्नान कराना चाहिए, जिससे उनका शरीर ठंडा रहता है। पशुओं को संतुलित और हल्का आहार दें। कई बार पशुपालक टीन शेड के नीचे पशुओं को बंद कर देते हैं, जिसके कारण पशु बीमार पड़ जाते हैं।
- दिनभर में 5 से 6 बार साफ और ठंडा पानी पिलाएं।
- पशुओं को छांव में रखें ताकि तापमान नियंत्रित रहे।
- गाय-भैंस को रोजाना स्नान कराएं।
- संतुलित और हल्का आहार दें।
- दोपहर 12:00 बजे से 4:00 बजे तक पशुओं को खुले में न रखें।
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