ज्योतिष की दुनिया में बृहस्पति यानी गुरु को सबसे शुभ ग्रहों में गिना जाता है। जब-जब यह ग्रह अपनी राशि बदलता है, तब उसका प्रभाव किसी एक राशि तक सीमित न रहकर सभी लोगों के जीवन पर किसी न किसी रूप में दिखाई देता है। इस बार गुरु अपनी उच्च राशि कर्क में प्रवेश कर चुके हैं और इसी कारण इसे वर्ष के सबसे महत्वपूर्ण ग्रह गोचरों में से एक बताया जा रहा है।
हर क्षेत्र में बदलाव की संभावना
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार यह गोचर धन, करियर, विवाह, संतान, शिक्षा, स्वास्थ्य और भाग्य जैसे कई पहलुओं में बदलाव ला सकता है। हालांकि इसका असली असर इस बात पर निर्भर करेगा कि व्यक्ति की जन्म कुंडली में गुरु किस स्थिति में बैठे हैं और किस भाव को प्रभावित कर रहे हैं।
किसी के लिए यह अवधि उन्नति और मान-सम्मान लेकर आ सकती है, तो किसी को निर्णय लेते समय अतिरिक्त सावधानी बरतनी पड़ सकती है। आइए जानते हैं कि कुंडली के अलग-अलग भावों में गुरु का प्रभाव किस तरह फल देगा।
प्रथम भाव में गुरु: आत्मविश्वास और सम्मान में बढ़ोतरी
ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार यदि गुरु का प्रभाव प्रथम भाव पर पड़ता है तो व्यक्ति के व्यक्तित्व में निखार आता है। ऐसे लोग आत्मविश्वासी, समझदार और समाज में आदर पाने वाले माने जाते हैं। इस दौरान करियर में नए अवसर मिलने के योग बनते हैं और परिवार में भी सकारात्मक वातावरण बना रह सकता है।
हालांकि अगर जन्म कुंडली में गुरु कमजोर स्थिति में हों तो स्वास्थ्य से जुड़ी छोटी-मोटी परेशानियां सामने आ सकती हैं। ऐसे जातकों को अपने खानपान पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी जाती है।
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