चांदी का ताजा हाल: इस साल 28 फरवरी को अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच छिड़ी जंग ने वैश्विक अर्थव्यवस्था की चूलें हिला दीं। पश्चिम एशिया में बिगड़े हालात का असर केवल कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की कीमतों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने सोने और चांदी के बाजार में भी सुस्ती भर दी। जनवरी में 121.65 डॉलर प्रति औंस के ऑल टाइम हाई को छूने के बाद चांदी अब तक 44.30 प्रतिशत लुढ़क चुकी है और फिलहाल 67.70 डॉलर प्रति औंस के स्तर पर कारोबार कर रही है। ऐसे माहौल में छोटे निवेशकों के सामने सबसे बड़ी उलझन यही है कि इस समय चांदी में पैसा लगाना समझदारी होगी या नहीं।
क्या इस वक्त चांदी में निवेश करना ठीक रहेगा
केडिया एडवायजरी के डायरेक्टर और जाने-माने कमोडिटी मार्केट एक्सपर्ट अजय केडिया का मानना है कि निवेशकों को अभी नई खरीदारी से दूरी बनाकर रखनी चाहिए। उन्होंने यह भी सुझाव दिया है कि अगर निकट भविष्य में चांदी की कीमतों में उछाल आए तो उसे बेचकर बाजार से बाहर निकल जाना बेहतर होगा। अपने एक शोध के हवाले से केडिया ने बताया कि आने वाले तीन महीने चांदी के लिए मंदी और सतर्कता वाले रहने वाले हैं, इसलिए निवेशकों को खरीदारी में जल्दबाजी करने से बचना चाहिए।
170 डॉलर प्रति औंस तक जा सकता है भाव
अजय केडिया के अनुसार साल 2027 से 2029 तक का समय चांदी के लिए एक सुनहरा दौर साबित होगा। इस अवधि में लंबी अवधि के लिए किया गया निवेश मोटा मुनाफा देगा और यही चांदी में पैसा लगाने का सबसे मुफीद समय होगा। उनका अनुमान है कि इस दौरान चांदी की कीमतें 120 डॉलर से लेकर 170 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच सकती हैं।
62.55 डॉलर है अहम सपोर्ट लेवल
एक्सपर्ट का कहना है कि अमेरिकी डॉलर की मजबूती, सिल्वर ईटीएफ में भारी बिकवाली और वैश्विक स्तर पर मैन्यूफैक्चरिंग में आई गिरावट के चलते चांदी के दाम लगातार नीचे आ रहे हैं। निकट भविष्य में मौजूदा स्तर से दोबारा ऑल टाइम हाई तक पहुंचना बेहद कठिन है। जब तक चांदी की वीकली क्लोजिंग 78 डॉलर के पार नहीं जाती, तब तक बाजार में सुधार की संभावना काफी कम है। इतना ही नहीं, अगर भाव 62.55 डॉलर के महत्वपूर्ण सपोर्ट लेवल से भी नीचे फिसलता है तो इसमें और तेज गिरावट देखने को मिल सकती है।
तीन महीने में 48.60 डॉलर तक लुढ़क सकती है चांदी
केडिया एडवायजरी की रिसर्च रिपोर्ट के मुताबिक 62.55 डॉलर के नीचे आने के बाद चांदी की कीमतें 48.60 डॉलर के ऐतिहासिक सपोर्ट लेवल तक भी पहुंच सकती हैं। यानी अगले तीन महीनों में चांदी का भाव गिरकर 48.60 डॉलर प्रति औंस तक आ सकता है। अजय केडिया के मुताबिक 48.60 डॉलर वह स्तर है जहां चांदी में किया गया निवेश न सिर्फ सबसे सुरक्षित माना जाएगा, बल्कि इसी स्तर पर यह सबसे सस्ता भी पड़ेगा।
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