फ्रांस के इवियन शहर में 16 और 17 जून 2026 को आयोजित होने वाली G7 शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भागीदारी अब तय हो चुकी है। भारत के विदेश मंत्रालय ने भी इसकी आधिकारिक पुष्टि कर दी है। इसी के साथ यह कयास तेज हो गए हैं कि इस आयोजन के दौरान पीएम मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप आमने-सामने आ सकते हैं। हालांकि दोनों नेताओं की मुलाकात को लेकर अब तक कोई पुष्ट जानकारी या निर्धारित समय सामने नहीं आया है, फिर भी माना जा रहा है कि पर्दे के पीछे बड़ी हलचल चल रही है।
फ्रांस दौरे पर मुहर
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इवियन पहुंच रहे हैं, जहां 16 और 17 जून 2026 को यह प्रतिष्ठित सम्मेलन होगा और इस पर दुनिया भर की निगाहें टिकी हैं। विदेश मंत्रालय ने मंगलवार को इस अहम दौरे की पुष्टि की। सम्मेलन के दौरान पीएम मोदी G7 देशों के प्रमुखों के अलावा कई आमंत्रित देशों और बड़े संगठनों के साथ खुलकर विचार-विमर्श करेंगे।
बातचीत का मुख्य केंद्र नई साझेदारियां विकसित करने, आपसी एकजुटता प्रदर्शित करने, सुस्त पड़ी आर्थिक प्रगति को फिर से रफ्तार देने और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को सुरक्षित ढंग से आगे बढ़ाने पर रहेगा। इसके साथ ही सम्मेलन के बीच कई प्रमुख नेताओं के साथ अलग से द्विपक्षीय बैठकें भी होने की संभावना है।
क्या आमने-सामने आएंगे दोनों नेता?
इस दौरे को लेकर सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या पीएम मोदी और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की आमने-सामने मुलाकात होगी। फिलहाल विदेश मंत्रालय ने इस संभावित बैठक को लेकर कोई स्पष्ट संकेत नहीं दिया है। पिछले हफ्ते खुद ट्रंप ने घोषणा की थी कि वे भी G7 समिट में हिस्सा लेने फ्रांस जा रहे हैं, जिससे दोनों नेताओं के बीच संवाद की संभावनाओं को और बल मिला है।
अगर यह मुलाकात होती है तो फरवरी में पीएम मोदी के अमेरिका दौरे के बाद यह दोनों नेताओं के बीच पहली सीधी आमने-सामने की बातचीत होगी, जिस पर पूरी दुनिया की नजर रहेगी। हालांकि बीते महीनों में दोनों के बीच फोन पर कई बार लंबी बातचीत हो चुकी है।
ट्रेड डील के करीब भारत-अमेरिका
संभावित मुलाकात में लंबे समय से लटकी भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर भी चर्चा हो सकती है। दोनों देश एक बड़ी व्यापार डील को अंतिम रूप देने के बेहद करीब पहुंच चुके हैं। इस डील को अमलीजामा पहनाने के लिए जून के पहले हफ्ते में ही अमेरिकी अधिकारियों की एक टीम भारत आई थी और उन्होंने भारतीय अधिकारियों के साथ लंबी बैठकें कीं।
इस ताजा दौर की वार्ता में वस्तुओं के व्यापार, सीमा शुल्क नियमों, आर्थिक सुरक्षा और दोनों देशों के पारस्परिक हितों से जुड़े कई गंभीर पहलुओं पर खुलकर बातचीत हुई। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि फ्रांस की धरती पर मोदी और ट्रंप की मुलाकात होती है या नहीं, क्योंकि यह बैठक वैश्विक व्यापार और राजनीति की दिशा बदल सकती है।
तेल और ऊर्जा सुरक्षा
ईरान संकट के बीच तेल की किल्लत को लेकर भी बातचीत हो सकती है। इस दौरान कच्चे तेल की आपूर्ति और ऊर्जा सुरक्षा को लेकर सहयोग के नए रास्ते तलाशे जा सकते हैं।
एआई और आर्थिक प्रगति
G7 सम्मेलन के मुख्य एजेंडे के तहत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के सुरक्षित इस्तेमाल को आगे बढ़ाने और ठहरी हुई वैश्विक आर्थिक प्रगति को दोबारा पटरी पर लाने को लेकर भी विचार साझा किए जा सकते हैं।
फोन पर बनी रही संवाद की कड़ी
तमाम मतभेदों और तनावों के बावजूद दोनों देशों के नेता पर्दे के पीछे लगातार फोन कॉल के जरिए एक-दूसरे के संपर्क में बने रहे। पिछले महीने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के भारत दौरे के बाद रिश्तों में सुधार के नए संकेत मिले। रुबियो ने पीएम मोदी से मुलाकात कर रक्षा, तकनीक, व्यापार, ऊर्जा सुरक्षा और शिक्षा जैसे विभिन्न क्षेत्रों में हुई प्रगति की जानकारी साझा की।
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