भगवान बांके बिहारी की नगरी मथुरा में उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब मंदिर के पास एक मकान का छज्जा अचानक टूटकर वहां से गुजर रहे श्रद्धालुओं के ऊपर आ गिरा। हादसे के तुरंत बाद चारों ओर चीख-पुकार गूंज उठी। शोरगुल सुनकर आसपास के लोग अपने घरों से बाहर निकल आए और घायल श्रद्धालुओं को बचाने का काम तेजी से शुरू कर दिया गया।
इस हादसे में करीब नौ लोगों को चोटें आई हैं। इनमें से एक व्यक्ति गंभीर रूप से घायल है, जिसे नोएडा के हायर सेंटर में रेफर किया गया है। मामला मंदिर के निकट गली नंबर-5 का बताया जा रहा है।
कैसे हुआ हादसा
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, यह हादसा मकान का छज्जा गिरने की वजह से हुआ। शाम के समय इलाके में बंदर इधर-उधर भाग-दौड़ कर रहे थे। छज्जे पर कई बंदरों के लगातार कूदने और झूलने के कारण वह टूट गया और नीचे रास्ते से जा रहे श्रद्धालुओं पर आ गिरा।
जिलाधिकारी सीपी सिंह ने बताया कि शाम करीब साढ़े 6 बजे सुधीर गोस्वामी के मकान का छज्जा गिरा। यह स्थान वृंदावन के 5 नंबर गेट से करीब 200 मीटर की दूरी पर है। उन्होंने पुष्टि की कि एक व्यक्ति गंभीर रूप से घायल है, जिसे नोएडा के हायर सेंटर भेजा गया है।
व्यवस्था के नाम पर खानापूर्ति का आरोप
घटना के बाद पुलिस ने पूरे क्षेत्र को सुरक्षित कर जांच शुरू कर दी है। प्रशासन ने श्रद्धालुओं से संयम बनाए रखने की अपील की है और मंदिर क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था भी बढ़ा दी गई है।
हालांकि स्थानीय लोगों की मानें तो हर हादसे के बाद कुछ समय के लिए व्यवस्था कड़ी कर दी जाती है, लेकिन चार दिन बीतते ही प्रशासन और पुलिस का वही पुराना रवैया लौट आता है। लोगों का आरोप है कि सुरक्षा के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति की जा रही है।
'अचानक सुनाई दी चीखें'
स्थानीय युवा प्रशांत गोस्वामी ने बताया कि वे लोग घर में ही थे, तभी अचानक लोगों के चीखने की आवाजें सुनाई दीं। आवाज सुनकर जब वे बाहर निकले तो देखा कि कुछ लोगों के सिर और हाथों से खून बह रहा था। उन्होंने तुरंत घायलों को बचाने का प्रयास किया। बाद में पता चला कि सामने वाले मकान के टूटे छज्जे के अवशेष वहां बिखरे पड़े थे।
स्थानीय लोगों का कहना है कि मकान काफी पुराना था, इसी कारण छज्जा टूटकर गिर गया। उनका आरोप है कि यहां की व्यवस्था सिर्फ दिखावे के लिए है और इलाके में कोई ठोस इंतजाम नहीं किया गया है। लोगों के मुताबिक, पहले भी कई बार ऐसे हादसे हो चुके हैं। जब भी कोई हादसा होता है तो प्रशासन की नींद टूटती है, लेकिन कुछ दिनों बाद हालात फिर वैसे ही हो जाते हैं।
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