एक एकड़ ने पलटी किस्मत: फरीदाबाद के किसान ने हल्दी की खेती से पाई नई राह

फरीदाबाद के फतेहपुर बिल्लौच गांव के किसान मुकेश कुमार ने गेहूं-धान छोड़कर एक एकड़ में ऑर्गेनिक हल्दी की खेती शुरू की और बिना रासायनिक खाद-दवा के शुद्ध हल्दी तैयार कर अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं।

हरियाणा के फरीदाबाद स्थित फतेहपुर बिल्लौच गांव के किसान मुकेश कुमार ने पारंपरिक फसलों की राह छोड़कर हल्दी की खेती को अपनाया और आज इसी से अच्छी कमाई कर रहे हैं। पहले वह गेहूं और धान उगाते थे, मगर उसमें उन्हें उतना फायदा नहीं मिल पाता था। यही वजह रही कि उन्होंने हल्दी की ओर रुख किया। अब वह अपने खेत में ऑर्गेनिक तरीके से हल्दी उगाते हैं और लोगों तक बिना मिलावट वाली शुद्ध हल्दी पहुंचा रहे हैं।

मुकेश का कहना है कि बाजार में अक्सर मिलावटी हल्दी की शिकायतें सुनने को मिलती हैं, जबकि वह पूरी तरह ऑर्गेनिक हल्दी तैयार कर रहे हैं। उनका मानना है कि बाकी फसलों के मुकाबले हल्दी की खेती कहीं ज्यादा फायदेमंद सौदा साबित होती है।

गेहूं-धान से हल्दी तक का सफर

मुकेश कुमार बताते हैं कि उन्होंने करीब चार से पांच साल पहले हल्दी की खेती शुरू की थी। उन्होंने एक एकड़ में हल्दी लगा रखी है। उनके मुताबिक गेहूं और धान में मेहनत तो बहुत लगती थी, लेकिन मुनाफा उस हिसाब से नहीं मिल पाता था। इसके बाद उन्होंने सोचा कि कोई ऐसी फसल उगाई जाए जिससे अच्छी आमदनी हो। हल्दी की खेती उन्हें बेहतर लगी और उन्होंने इसकी शुरुआत कर दी।

पेड़ के पत्तों से तैयार करते हैं खाद

मुकेश बताते हैं कि वह पूरी तरह ऑर्गेनिक खेती करते हैं। खेत में गोबर की खाद डाली जाती है। साथ ही पेड़ों से गिरने वाले पत्तों से भी वह खाद तैयार करते हैं। किसी भी तरह के रासायनिक खाद या दवा का इस्तेमाल वह नहीं करते।

असली और नकली हल्दी की पहचान

मुकेश के अनुसार, एक एकड़ में हल्दी की खेती करने पर करीब एक लाख रुपये तक की लागत आती है। खर्च भले ज्यादा हो, लेकिन मुनाफा भी अच्छा मिलता है। उनका कहना है कि असली हल्दी की पहचान उसकी लंबी और पीली गांठ से होती है। उन्होंने अपने खेत में वही असली हल्दी बो रखी है, जो बिल्कुल ओरिजिनल है। आजकल बाजार में कई जगह मिलावट देखने को मिलती है, मगर उनकी हल्दी पूरी तरह ऑर्गेनिक है।

हर चरण में रखनी पड़ती है सावधानी

मुकेश बताते हैं कि हल्दी की खेती में शुरुआत से ही सावधानी जरूरी होती है। सबसे पहले खेत में मेड बनाई जाती है और पौध को उसी मेड पर लगाया जाता है। पौधों के बीच ज्यादा दूरी नहीं रखी जाती। अगर खेत की मेड ठीक तरीके से न बने तो हल्दी खराब भी हो सकती है, इसलिए खेती के हर चरण में ध्यान देना पड़ता है।

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