जून की चिलचिलाती धूप और भीषण गर्मी के बीच बोकारो के लोग ठंडक पाने के लिए सिर्फ कोल्ड ड्रिंक या आइसक्रीम पर निर्भर नहीं हैं। इन दिनों शहर के सेक्टर-12 मोड़ पर ताड़ का फल, जिसे स्थानीय भाषा में तारकुल कहा जाता है, खूब बिक रहा है। पानी से भरपूर यह रसदार फल न सिर्फ शरीर को ठंडक देता है, बल्कि कई ग्रामीण परिवारों की रोजी-रोटी का जरिया भी बना हुआ है।
खाते ही मिलती है तुरंत ठंडक
देखने में ताड़ का फल काफी हद तक नारियल जैसा लगता है, लेकिन इसके भीतर मौजूद पानी से भरे छोटे-छोटे गोले इसे अलग पहचान देते हैं। इसे खाते ही शरीर में फौरन ठंडक का एहसास होता है। यही वजह है कि तेज गर्मी के मौसम में इसकी मांग खासी बढ़ जाती है।
परिवार की आजीविका का सहारा
तारकुल बेचने वाले विक्रेता मदन बताते हैं कि हर साल गर्मियों के मौसम में वे चंदनक्यारी से बोकारो आकर यह फल बेचते हैं। उनके मुताबिक यह उनके लिए केवल एक फल नहीं, बल्कि परिवार की आजीविका का अहम साधन है।
मदन के अनुसार ताड़ के पेड़ अक्सर घने जंगलों में होते हैं और फल तोड़ते समय कांटों, बिच्छुओं तथा जंगली जानवरों का खतरा बना रहता है। वे सुबह-सुबह फल लेकर शहर पहुंचते हैं और करीब 8 बजे दुकान लगाते हैं। दिनभर बिक्री के बाद शाम को गांव लौट जाते हैं।
रोजाना 1500 से 2000 रुपये की कमाई
तारकुल का फल 20 रुपये प्रति पीस की दर से बिकता है। मदन बताते हैं कि रोजाना उनकी करीब 1500 से 2000 रुपये तक की बिक्री हो जाती है, जिससे परिवार को अच्छी मदद मिल जाती है। चूंकि यह फल सिर्फ गर्मी के मौसम तक सीमित है, इसलिए बरसात के दौरान वे खेती-किसानी का काम संभालते हैं।
सेहत के लिए भी फायदेमंद
फल खरीद रहीं ग्राहक यशोदा ने बताया कि तारकुल स्वादिष्ट होने के साथ-साथ सेहत के लिए भी काफी लाभकारी है। उनका कहना है कि गर्मियों में शरीर में पानी की कमी यानी डिहाइड्रेशन की समस्या आम हो जाती है, ऐसे में यह फल शरीर को हाइड्रेट रखने और प्राकृतिक रूप से ठंडक पहुंचाने में मदद करता है।
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