मुजफ्फरपुर प्रसाद हॉस्पिटल आग: जांच में सरकारी डॉक्टर की भूमिका उजागर, केस दर्ज

मुजफ्फरपुर के प्रसाद हॉस्पिटल अग्निकांड की जांच में सामने आया कि घटना के समय आईसीयू का प्रभार संभाल रहे सरकारी डॉक्टर पंकज कुमार ड्यूटी से अनुपस्थित थे। पुलिस ने उन पर केस दर्ज किया है, वहीं स्वास्थ्य विभाग यह जांच कर रहा है कि वे निजी अस्पताल में किस आधार पर काम कर रहे थे।

अग्निकांड की जांच में नया मोड़

बिहार के मुजफ्फरपुर स्थित प्रसाद हॉस्पिटल में हुए भीषण अग्निकांड को लेकर एक चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है। जांच के दौरान खुलासा हुआ कि बंदरा प्रखंड के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) में तैनात सरकारी डॉक्टर पंकज कुमार घटना के समय इसी निजी अस्पताल के आईसीयू की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। इस खुलासे के बाद स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन ने अपनी जांच और तेज कर दी है।

शॉर्ट सर्किट से लगी थी भीषण आग

उल्लेखनीय है कि बीते गुरुवार की अहले सुबह प्रसाद हॉस्पिटल के आईसीयू में शॉर्ट सर्किट के चलते भयानक आग भड़क उठी थी। इस दर्दनाक हादसे में 7 लोगों की जान चली गई थी, जबकि 16 अन्य लोग घायल हो गए थे। आग लगते ही अस्पताल में अफरा-तफरी मच गई और मरीजों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए काफी जद्दोजहद करनी पड़ी थी।

घटना के वक्त ड्यूटी से गायब रहे डॉक्टर

पड़ताल में यह बात उभरकर आई कि हादसे के समय आईसीयू का प्रभार डॉ. पंकज कुमार के पास था। आरोप है कि घटना के दौरान वे आईसीयू में मौजूद नहीं थे और अपनी ड्यूटी से अनुपस्थित पाए गए। इस लापरवाही के आरोप में ब्रह्मपुरा थाना पुलिस ने उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया था। हालांकि बाद में उन्हें कोर्ट से 24 घंटे के भीतर जमानत मिल गई।

सेवा नियमों के उल्लंघन की पड़ताल

अब स्वास्थ्य विभाग इस पहलू की जांच कर रहा है कि बंदरा पीएचसी में पदस्थापित होने के बावजूद डॉ. पंकज कुमार निजी अस्पताल में किस आधार पर सेवाएं दे रहे थे। विभागीय अधिकारियों ने उनके सेवा नियमों के उल्लंघन और सरकारी ड्यूटी से अनुपस्थित रहने के आरोपों की जांच शुरू कर दी है। इसके साथ ही उनके निलंबन की संभावना पर भी विचार किया जा रहा है।

उपस्थिति रजिस्टर की जांच

जांच टीम बंदरा पीएचसी के उपस्थिति रजिस्टर और अन्य दस्तावेजों की बारीकी से पड़ताल कर रही है। अधिकारी यह पता लगाने में जुटे हैं कि घटना के समय डॉक्टर की उपस्थिति कहां दर्ज थी और सरकारी सेवा में रहते हुए वे निजी अस्पताल में किस तरह काम कर रहे थे।

प्रशासन ने माना गंभीर मामला

इस प्रकरण पर एसडीएम पूर्वी तुषार कुमार ने कहा कि पूरे मामले की गंभीरता के साथ जांच की जा रही है। उन्होंने कहा कि किसी सरकारी डॉक्टर का निजी अस्पताल के आईसीयू में ड्यूटी करना एक गंभीर विषय है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित डॉक्टर के विरुद्ध कड़ी विभागीय और कानूनी कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग दोनों स्तरों पर जांच जारी है और अग्निकांड से जुड़े हर पहलू की गहराई से पड़ताल की जा रही है।

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