अमिताभ बच्चन की फिल्मों पर इस मुल्क में लगी थी पाबंदी, छिपकर देखी जाती थीं मूवी, बाद में मिला सबसे बड़ा सम्मान

बॉलीवुड के महानायक अमिताभ बच्चन की लोकप्रियता एक देश में इतनी बढ़ गई थी कि वहां की सरकार ने उनकी फिल्मों पर रोक लगा दी थी, लेकिन बाद में उसी मुल्क ने उन्हें 'एक्टर ऑफ द सेंचुरी' के सम्मान से नवाजा।

अमिताभ बच्चन की लोकप्रियता सिर्फ भारत तक सीमित नहीं रही। 'जंजीर' की सफलता के बाद उनकी पहचान सरहदों के पार भी फैल गई और विदेशों में भी उनके चाहने वालों की कमी नहीं रही। एक के बाद एक हिट देने वाले बिग बी की हर फिल्म की रिलीज पर फैंस की निगाहें टिकी रहती थीं। हालांकि एक ऐसा देश भी था, जहां उनकी फिल्मों पर रोक लगा दी गई थी और लोग वहां छिप-छिपकर उनकी फिल्में देखा करते थे।

हर दौर के पसंदीदा सितारे

आज देश ही नहीं, विदेश में भी अमिताभ बच्चन के असंख्य प्रशंसक हैं, जो उन पर जान छिड़कते हैं। बॉलीवुड के महानायक आज भी लोगों के चहेते बने हुए हैं। अपने करियर में उन्होंने जो मुकाम हासिल किया है, उस तक पहुंचना हर किसी के बस की बात नहीं।

राजेश खन्ना के दौर से सुपरस्टार बनने तक का सफर

बॉलीवुड के दो बड़े सितारे राजेश खन्ना और अमिताभ बच्चन 'आनंद' और 'नमक हराम' जैसी फिल्मों में साथ नजर आ चुके हैं। उस समय इंडस्ट्री में राजेश खन्ना का जलवा था। इसके बाद 1973 में आई 'जंजीर' ने अमिताभ बच्चन को रातोंरात सुपरस्टार बना दिया और उन्होंने पूरे 15 साल इंडस्ट्री पर एकतरफा राज किया। 80 के दशक में एक वक्त ऐसा भी आया, जब राजेश खन्ना की एक फिल्म का मुहूर्त शॉट देने अमिताभ बच्चन पहुंचे थे और उस फिल्म के गाने भी जबरदस्त हिट साबित हुए।

मिस्र में लगी पाबंदी

अपने करियर में अमिताभ बच्चन ने कई ब्लॉकबस्टर फिल्में दीं, लेकिन मिडिल ईस्ट, खासकर मिस्र में उनकी फिल्मों पर रोक लगा दी गई थी। इसकी वजह यह थी कि वहां उनका क्रेज इतना ज्यादा था कि वहां की सरकार चिंता में पड़ गई और उसने अभिनेता पर पाबंदी लगा दी।

खाली पड़े रहते थे लोकल सिनेमाघर

1980 के दशक में अमिताभ बच्चन सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि इजिप्ट (मिस्र) में भी सुपरस्टार बन चुके थे। जब वहां उनकी फिल्में रिलीज होती थीं, तो थिएटर के बाहर लंबी-लंबी कतारें लग जाती थीं, जबकि दूसरी ओर मिस्र के स्थानीय सिनेमाघर खाली पड़े रहते थे।

कहा जाता है कि मिस्र के सिनेमा के हालात इतने बिगड़ गए कि वहां की सरकार को सख्त फैसला लेना पड़ा। तय किया गया कि अमिताभ बच्चन की फिल्मों पर रोक लगाई जाए, ताकि स्थानीय फिल्म इंडस्ट्री को आगे बढ़ने का मौका मिल सके।

चोरी-छिपे देखी जाती थीं फिल्में

लेकिन लोग अमिताभ बच्चन की अदाकारी के इस कदर दीवाने थे कि उनकी फिल्में देखे बिना रह ही नहीं पाते थे। खुद को रोक न पाने के कारण उन्होंने छोटे थिएटरों में चोरी-छिपे फिल्में देखना शुरू कर दिया, जहां ये फिल्में गैरकानूनी तरीके से दिखाई जाती थीं।

हद तो तब हो गई, जब अमिताभ बच्चन की सुपरहिट फिल्म 'गिरफ्तार' का एक पूरा सीन हूबहू मिस्र की एक स्थानीय फिल्म में कॉपी कर लिया गया। यह देखकर लोग भी हैरान रह गए, क्योंकि वहां अमिताभ बच्चन बेहद लोकप्रिय हो चुके थे।

मिला सदी के अभिनेता का खिताब

पाबंदी के बावजूद बढ़ती लोकप्रियता का सिलसिला आखिरकार सम्मान में बदल गया। इजिप्ट ने साल 2001 में अमिताभ बच्चन को 'एक्टर ऑफ द सेंचुरी' के अवॉर्ड से सम्मानित किया।

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