तीन वर्ष में एक बार आने वाला विभुवन संकष्टी व्रत, गणपति को अवश्य अर्पित करें ये प्रिय वस्तुएं

विभुवन संकष्टी चतुर्थी का दुर्लभ व्रत 3 जून को रखा जाएगा, जो हर 3 साल में केवल एक बार अधिकमास में आता है। इस दिन भगवान गणेश को उनकी प्रिय चीजें अर्पित करने से कई गुना फल मिलता है।

विभुवन संकष्टी चतुर्थी 2026: हिंदू धर्म में संकष्टी चतुर्थी व्रत को बहुत खास माना गया है। भगवान गणेश को समर्पित यह व्रत प्रत्येक माह कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को किया जाता है। मान्यता है कि इस व्रत के पालन से माता गौरी के पुत्र गणेश की विशेष कृपा भक्तों पर बरसती है। इस बार 3 जून को विभुवन संकष्टी चतुर्थी का व्रत रखा जाएगा, जो हर 3 साल में सिर्फ एक बार ही आता है।

उल्लेखनीय है कि विभुवन संकष्टी चतुर्थी का व्रत केवल अधिकमास में ही पड़ता है। अधिक मास होने के कारण इस दिन किए गए जप, तप, पूजन और व्रत आदि का सामान्य संकष्टी व्रत की तुलना में अनेक गुना अधिक फल मिलता है। ऐसे में इस अवसर पर गणपति जी को उनकी पसंदीदा वस्तुएं अवश्य चढ़ानी चाहिए। आइए जानते हैं कि विभुवन संकष्टी के दिन बप्पा को क्या-क्या अर्पित करना शुभ रहता है।

भगवान गणेश को प्रिय हैं ये वस्तुएं

  1. लाल रंग के फूल: विभुवन संकष्टी चतुर्थी के दिन पूजा के दौरान गणपति जी को लाल गुड़हल का फूल अथवा पीले-नारंगी रंग के गेंदे के फूल अर्पित करें। खासतौर पर लाल रंग के फूलों की माला जरूर चढ़ाएं, क्योंकि लाल रंग गणेश जी को अत्यंत प्रिय है।

  2. दूर्वा घास: गणेश जी की पूजा दूर्वा के बिना अधूरी मानी जाती है। विभुवन संकष्टी के दिन बप्पा को 21 दूर्वा की गांठें बनाकर 'ॐ गं गणपतये नमः' मंत्र का जाप करते हुए अर्पित करें। ऐसा करने से भगवान गणेश बेहद प्रसन्न होते हैं और बुद्धि व ज्ञान का आशीर्वाद प्रदान करते हैं।

  3. लाल सिंदूर: संकष्टी पर गणेश जी को लाल सिंदूर चढ़ाएं। कहा जाता है कि गणपति जी को सिंदूर का तिलक लगाना और उन्हें सिंदूर अर्पित करना बेहद शुभ होता है। सिंदूर अर्पित करने से जातक का मान-सम्मान बढ़ता है तथा नौकरी और व्यवसाय में आ रही रुकावटें दूर होती हैं।

  4. मोदक या बूंदी के लड्डू: गौरीपुत्र गणेश को मोदक और लड्डू बेहद प्रिय हैं। विभुवन संकष्टी चतुर्थी के दिन बप्पा को मोदक और बूंदी के लड्डू का भोग अवश्य अर्पित करें। ऐसा करने से घर सदा धन-धान्य से परिपूर्ण रहता है।

संकष्टी चतुर्थी के दिन ये कार्य अवश्य करें

संकष्टी चतुर्थी का व्रत रात्रि में चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद ही पूर्ण माना जाता है। इसलिए चंद्रोदय के समय कच्चे दूध और गंगाजल में सिंदूर मिलाकर चंद्रमा को अर्घ्य अर्पित करें। इसके साथ ही इस दिन जरूरतमंदों को फल, तांबे के बर्तन अथवा पीले अनाज का दान करें। ऐसा करने वाले व्यक्ति को कई गुना अधिक पुण्य की प्राप्ति होती है।

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