धान की खेती की शुरुआत में जैसे ही नर्सरी तैयार होती है, किसानों के सामने एक गंभीर चुनौती खड़ी हो जाती है, और वह है पत्ता लपेटक कीट का हमला। यह कीट धान की मुलायम पत्तियों को मोड़कर उनके भीतर छिप जाता है और धीरे-धीरे पौधे का हरा हिस्सा खाकर उसे खोखला कर देता है। नतीजतन पत्तियां सफेद पड़कर सूखने लगती हैं और पौधों की बढ़त थम जाती है। समय पर सावधानी न बरतने पर यह छोटा-सा दिखने वाला कीट पूरी नर्सरी को बर्बाद कर सकता है।
कैसे फैलता है इसका प्रकोप
फसल सुरक्षा वैज्ञानिक डॉ. हादी हुसैन खान बताते हैं कि नर्सरी के तैयार होते ही पत्ता लपेटक (लीफ फोल्डर) कीट का असर तेजी से बढ़ता है। यह कीट खासकर शुरुआती और कोमल पौधों को अपना शिकार बनाता है। मौसम अनुकूल मिलते ही इसकी संख्या में अचानक भारी बढ़ोतरी होती है और संक्रमण नर्सरी के बड़े हिस्से में फैल जाता है। अगर समय रहते ध्यान न दिया जाए तो पूरी पौध खराब हो सकती है, जिसका सीधा असर मुख्य खेत में होने वाली रोपाई पर पड़ता है।
पहचान कैसे करें
इस कीट को पहचानना आसान है। नर्सरी का निरीक्षण करते समय यदि धान की पत्तियां ऊपर से नीचे या दोनों किनारों से मुड़ी हुई नजर आएं, तो समझ लें कि पत्ता लपेटक का हमला हो चुका है। इसके लार्वा पत्तियों को आपस में जोड़कर एक नली जैसी संरचना बना लेते हैं और उसी के अंदर सुरक्षित बैठ जाते हैं। यही वजह है कि ऊपर से किया गया कीटनाशक छिड़काव भी इन पर बेअसर साबित होने लगता है।
पौधों को कैसे पहुंचाता है नुकसान
पत्तियों के भीतर छिपा यह कीट धान के नरम पत्तों के हरे भाग यानी क्लोरोफिल को खुरच-खुरचकर खा जाता है। क्लोरोफिल समाप्त होने से पत्तियों पर सफेद धारियां उभरने लगती हैं और वे पूरी तरह सूख जाती हैं। चूंकि हरा भाग ही पौधे के लिए भोजन बनाने का काम करता है, इसके नष्ट होते ही पौधों का विकास पूरी तरह रुक जाता है और वे कमजोर पड़ जाते हैं।
शुरुआती अवस्था में जैविक उपाय
संक्रमण की शुरुआती अवस्था में रासायनिक दवाओं के बजाय जैविक नियंत्रण अपनाना अधिक सुरक्षित और लाभकारी रहता है। इसके लिए किसान 1500 पीपीएम क्षमता वाले नीम के तेल को 3 से 5 मिलीलीटर प्रति लीटर पानी में घोलकर नर्सरी में छिड़काव करें। नीम की कड़वाहट के कारण कीट पत्तियों को खाना बंद कर देते हैं और उनका जीवन चक्र पूरी तरह टूट जाता है।
ज्यादा प्रकोप पर रासायनिक नियंत्रण
यदि नर्सरी में पत्ता लपेटक का प्रकोप अधिक बढ़ चुका हो और जैविक उपाय बेअसर दिखाई दे रहे हों, तो रासायनिक नियंत्रण का सहारा लें। इसके लिए कार्टाप हाइड्रोक्लोराइड 50% एसपी (Cartap Hydrochloride 50% SP) की 2 ग्राम मात्रा प्रति लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें। यह दवा कीटों के तंत्रिका तंत्र पर तुरंत असर करके उन्हें खत्म कर देती है।
भारी आक्रमण की स्थिति में क्लोरेंट्रानिलिप्रोल 18.5% एससी (Chlorantraniliprole 18.5% SC) एक बेहद आधुनिक और असरदार कीटनाशक माना जाता है। इसकी मात्र 0.4 मिलीलीटर मात्रा प्रति लीटर पानी में मिलाकर छिड़कने पर पत्ता लपेटक से लंबे समय तक बचाव मिलता है। यह दवा पत्तियों के भीतर तक पहुंचकर छिपे हुए कीटों का पूरी तरह सफाया कर देती है।
छिड़काव के समय रखें इन बातों का ध्यान
नर्सरी में किसी भी कीटनाशक का छिड़काव करते समय मौसम और समय का खास ख्याल रखना चाहिए। तेज धूप हो या बारिश की आशंका हो, तो स्प्रे बिल्कुल न करें। छिड़काव के लिए हमेशा साफ पानी का उपयोग करें और इसे दोपहर बाद या शाम के समय करें, जब धूप हल्की हो। इसके साथ ही यह बेहद जरूरी है कि दवा पत्तियों के मुड़े हुए हिस्सों तक भी पहुंचे, ताकि भीतर छिपे कीट खत्म हो सकें।
पारंपरिक और कृषि आधारित उपाय
सिर्फ रसायनों पर निर्भर रहने के बजाय कुछ पारंपरिक और कृषि से जुड़े उपाय भी कारगर साबित होते हैं। नर्सरी के आसपास उगने वाले खरपतवारों को नियमित रूप से हटाते रहें, क्योंकि ये कीटों के छिपने का मुख्य ठिकाना बनते हैं। नाइट्रोजन युक्त उर्वरक यानी यूरिया का जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल न करें, क्योंकि इससे पत्तियां अधिक कोमल हो जाती हैं और कीटों को अपनी ओर आकर्षित करती हैं।
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